मनरेगा  घोटाला : काग़ज़ों पर  ही आधा दर्जन काम  दिखा  लाखों  का भुगतान निकाले जाने के आरोप

किसने पास किया स्टीमेट, और किसने की   फर्जी  एम  बी  यक्ष प्रश्न  यदि मामले की करायी जाये  निष्पक्ष जांच  तो  रोजगार सेवक से लेकर  पंचायत सचिव, टी. ए,और जे.ई   समेत  ए पी ओ मनरेगा  पर  गाज गिरना तय  खंड बिकास अधिकारी  विजुआ  की भी तय होगी  जबाब देही 

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लखीमपुर खीरी।  मामला विकास खंड  विजुआ  की ग्राम पंचायत  बेलहा  सीकटिहा का बताया जाता है जहां पर  योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस  नीति को ताक पर रखकर  जमकर सरकारी धन की लूट किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।बताया जाता है कि इस खेल में  पंचायत सचिव से लेकर  खंड बिकास अधिकारी तक शामिल हैं।
 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार   ग्राम पंचायत बेलहा  सीकटिहा में वित्तीय वर्ष2024-25  में मनरेगा योजना के तहत जमकर धांधली  की गई है  लगभग आधा दर्जन काम महज काग़ज़ों पर कराकर  दसों  लाख का भुगतान निकाला गया है।जबकि हकीकत के धरातल पर यह काम हुए ही नहीं है।
 
जब इस मामले पर रोजगार सेवक से लेकर  ए.पी. ओ. मनरेगा,  जे.ई., टी ए., और खंड बिकास अधिकारी  चाही गई  तो किसी से भी स्पष्ट  जवाब नहीं मिल सका। जिम्मेदारों  की चुप्पी मामले को और भी सन्देशहापद  बना दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है  कि कहीं  मनरेगा के धन की लूट के  इस खेल में  सभी की हिस्सेदारी  तो नहीं है।
 
वहीं ग्रामीणों का आरोप है  जब धरातल पर काम हुआ ही नहीं  तो फिर  किसने की  एम.बी  और किसने पास  किया  भुगतान, और किस सक्षम अधिकारी ने दिया कार्य पूर्ण  प्रमाण पत्र  अहम सबाल बने हुए हैं।मामले की  जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराकर  दोषी लोगों के विरूद्ध  कार्रवाई किए जाने की मांग  की  जा रही है।
 
ग्राम निधि में भी  घोटाला किए जाने  का मामला बना चर्चा का विषय- ग्राम पंचायत बेलहा  सिकटीहा में ग्राम पंचायत सचिव  की मिलीभगत से  एक ही काम के दो दो बार भुगतान  निकाले जाने  के आरोपों का सिलसिला थमने का नाम  ही नहीं  ले रहा है।
 
लोगों का आरोप है कि  शौचालय, आंगनबाड़ी मरम्मत  कार्य तथा  विद्यालय  मरम्मत कार्य में  भी कई बार  भुगतान  निकाला गया है  जो जांच का विषय  बना है  जांच   हुई तो कई लोगों पर  जांच की आंच आना  तय माना जा रहा है।
 
आखिर किस  सक्षम अधिकारी के  आदेश से फाइल पर पंचायत सचिव  के हस्ताक्षर  वगैर  कर दिया गया भुगतान-  विभागीय   सूत्र बताते हैं  कि  सचिव  गोल्डी वर्मा की कई ऐसी फाइल है  जिन पर  उनके हस्ताक्षर  बनाए  वगैर ही  भुगतान  कर दिया गया है।जो भ्रस्टाचार  का मामला  प्रतीत होता है।
 
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत सचिव  ने दो प्राइवेट  मुन्शी  लगा रखे हैं  वही सारा काम  सचिव साहिबा  का देखते हैं  बताया तो यहां तक गया है  कि  पंचायत सचिव  सहाब  के डोंगल  भी  इन्हीं। प्राइवेट मुन्शी गणों  के पास ही है।  इन्हीं  लोगों के द्वारा  ही मनमाने  ढंग से भुगतान  निकाला कर सब मिलकर  आपस  में बंदर बाट  कर लेते है।
 
कहीं इन्हीं  लोगों के द्वारा तो  नहीं ek ही काम के दो दो  बार भुगतान  निकाला गया है ।आखिर इन  मुन्शी  लोगों की  सैलरी  कौन और कहा से दी जाती हैं। कहीं इन्हीं लोगों के द्वारा  तो नहीं  किया जाता है काग़ज़ी आंकड़ों की बाजीगरी का खेल और अपनी आमदनी का जरिया  बनाया  जाता रहा  है  स्थानीय लोगों  का कहना है  कि मामले  की  निष्पक्ष  जांच कराकर दोषी  पंचायत सचिव  और रोजगार सेवक  सहित अन्य   जिम्मेदारी पर कार्रवाई की मांग की है।अब देखना यह है इस गंभीर  मामले  की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी  या फिर  यू  ही  फाइलो  में दफन  कर दिया  जाएगा।

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