राजनीति
तरहार क्षेत्र में 100 साल से सड़क नहीं
पत्थरों पर रेंगती जिंदगी
प्रयागराज यमुनानगर (बारा)। तहसील और शंकरगढ़ ब्लॉक का तरहार गांव बुनियादी सुविधा सड़क से वंचित है।यहां की सड़क नहीं, बल्कि मदारिया पहाड़ की नुकीली गिट्टियों से भरा एक दुश्वार रास्ता है, जिस पर चलना हर दिन लोगों की मजबूरी बन चुका है।ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं,बल्कि सैकड़ों साल से भी अधिक पुरानी है,लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका।
स्कूल जाने वाले बच्चों के जूते फट जाते हैं,पैर छिल जाते हैं, और कई बार हादसे का डर बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पक्की सड़क केवल सपना नहीं, बल्कि वह सपना है, जो हर पीढ़ी देखती है और अधूरा छोड़ जाती है।सरकारी योजनाओं में "हर गांव सड़क से जुड़े" जैसे दावे किए जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास की तेज रफ्तार की बात करते हैं,और प्रयागराज प्रशासन स्मार्ट सिटी की तस्वीरें पेश करता है,लेकिन तरहार गांव आज भी उसी जर्जर रास्ते पर खड़ा है।

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