सन्यासी के राजा बनने की परंपरा सनातन धर्म के विरुद्ध है- जगत गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद
इस पर सत्ता पक्ष के लोग हो या विपक्ष के लोग सारे लोगों में पुलिस के इस कृत्य का विरोध हो रहा है ।
स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।दया शंकर त्रिपाठी
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि धर्म सत्ता और राज्य सत्ता दो अलग-अलग केंद्र बिंदु है सनातन धर्म में धर्म सत्ता राज्य सत्ता पर अंकुश रखती थी जिससे राज्य सत्ता निरंकुश और धर्म के विरुद्ध कार्य न करें। लेकिन जब राज्य सत्ता पर कोई धर्म संस्था वाला व्यक्ति कब्जा कर ले तो वह धर्म विरुद्ध कार्य करने लगेगा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कीमुगलों में खलीफा सर्वोच्च धर्म गुरु होता है और वही राज सट्टा का भी मालिक होता है। लेकिन सनातन धर्म में ऐसा कभी नहीं था ।जिससे आज की प्रदेश सरकार निरंकुश और तानाशाह हो गई है क्योंकि उसने धर्म और राज का घाल मेल कर दिया है ।वह अपने को राजसत्ता के मद में धर्म सत्ता को गौर समझने लगा है।
स्वमि जी ने कहा कि कभी भी मुगलों और अंग्रेजों के शासन में भी किसी धर्माचार्य को ना तो स्नान करने का नहीं पुलिस ने कभी दुराचार किया और जब भी उसने धर्म सत्ता से टकराया तो यही साधु संत और शंकराचार्य ने उनसे संघर्ष किया और सनातन धर्म को जिंदा रखा ।
माघ मेले को जो गंगा तट पर लगता है तीर्थराज प्रयाग में धार्मिक और तपस्या की धर्म ध्वजा लहरा रही है इसको रोकने का प्रयास किया था तो साधु संतों ने ही उनसे संघर्ष करके पुनः माघ मेले को स्थापित किया था।और तब से आज तक परंपरा चली आ रही है
स्वामी जी ने कहा की शिखा हमारी सनातन परंपरा और स्वाभिमान की प्रतीक हैं ।घनानंद ने चाणक्य का अपमान शिखा पकड़ कर किया था और चाणक्य ने वही सिखा को पकड़ कर प्रतिग किया था जब तक तुम्हारी सत्ता को नहीं पलट दूंगा तुम्हारा दंभ नहीं चूर कर दूंगा तब तक चैन से नहीं बैठूंगा और उस घनानंद को राज्य सत्ता से पदचह्यूत करने के बाद चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी सोप करके पुनः अपने सनातन धर्म की परंपरा को संचालन करने लगे ।यह नकली सनातनी धर्म वाले लोग केवल धर्म संता का उपयोग जब राज सत्ता के लिए करने लगे तो कहां से सनातन धर्म बचेगा।

अब तो इसमें विचार करना पड़ेगा की कौन नकली हिंदू है और कौन असली हिंदू है क्योंकि ऐसे लोगों को मैं असली हिंदू नहीं मानता जो सत्ता के लिए सनातन धर्म के सारे नियम और मर्यादा तोड़ दें ।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को धर्म संस्था के लोगों ने इसलिए मदद करके राज सत्ता पर बैठने का काम किया की जिससे सनातन धर्म जिंदा रहे। और उनमें यह गुण दिखाई भी पड़ा था। लेकिन कुछ समय में वह मृगतृष्णा साबित हो गया। गाय की रक्षा का कसम खाई गई जबकि गौ माता की जितनी दुर्दशा इस समय हो रही है उतनी इसके पहले नहीं हुई थी ।और उसकी बात उठाने वाला व्यक्ति इनका दुश्मन हो जा रहा है।
राज्य सत्ता के मध्य में कुछ ऐसे व्यक्ति भी भेष बदल करके बैठ गए हैं जो नकली शंकराचार्य और तरह-तरह के महामंडलेश्वर और अनेक उपाधियां देकर के असली धर्माचार्य को नष्ट करने के लिए खेल करना चाहते हैं जो कभी सफल नहीं होंगे ।क्योंकि यहां नहीं ऊपर तो इसे बैठा हुआ व्यक्ति सर्व शक्तिमान ईश्वर दिखाई पड़ रहा देख रहा है।
उन्होंने यह भी कहा राज सत्ता के मुखिया ने बयान दिया है कि कुछ लोग काल नेमी बनकर सनातन धर्म को बदनाम करना चाहते हैं इसका फैसला हो जाना चाहिए। जो भेष बदलकर धर्म सत्ता को नष्ट करने के लिए सब कम करने पर उतारू है ।

बीजेपी में कुछ नेताओं के की तारीफ करते हुए कहा कि अभी भी वहां पर कुछ सनातनी धर्म वाले नेता हैं जो धर्म सत्ता को राज्य सत्ता से ऊंचा मानते हैं और उनकी इज्जत करते हैं लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया जाता है और जो काल नेमी की तरह भेस बदल करके कब्जा कर लिए हैं वह अपने को सनातनी का सबसे बड़ा लंबरदार बन गए हैं ।ऐसे लोगों को अब धर्म सत्ता के अनुयाई लोगों को सत्ता से बेदखल कर देना चाहिए ।वरना सनातन धर्म के लिए आगे बहुत ही कठिनाई और संघर्ष का रास्ता तय करना पड़ेगा।
यहां यह बताना जरूरी है कि शंकराचार्य स्वामी अभी मुक्तेश्वर आनंद को मौनी अमावस्या पर स्नान करने जा रहे थे तो पुलिस ने रोक दिया और उनके समर्थकों को के साथ और वेद पार्टी बटुकधारी ब्राह्मणों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया बल्कि पुलिस ने उनकी पिटाई तक की जिसकी विरोध में शंकराचार्य ने स्नान न करने का ऐलान किया और बसंत पंचमी तक भी स्नान नहीं किया ।
इस पर सत्ता पक्ष के लोग हो या विपक्ष के लोग सारे लोगों में पुलिस के इस कृत्य का विरोध हो रहा है ।
जहां पर इसकी निंदा विरोध पक्ष के अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री संजय सिंह राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमन सिंह पूर्व सांसद उनके लड़के उज्जवल अमर सिंह कांग्रेस के सांसद चारों शंकराचार्य और अनेक धर्माचार्य ने भारी विरोध किया किया है वहीं पर भारतीय जनता पार्टी के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने भी शंकराचार्य जी से क्षमा मांगते हुए विनम्र भाव से अपील की कि वे गंगा स्नान करें और जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी प्रदेश अध्यक्ष भी इस घटना की आलोचना की है अनेक विधायकों ने भी और साधु संतों ने भी प्रतिदिन सोशल मीडिया पर समाचार पत्रों में बयान देकर के इस घटना की निंदा करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री के इशारे पर किया गया है का आरोप लगाया है जिससे कि राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है।
लेकिन अभी तक ना तो ऐसे अधिकारियों को चिन्हित किया गया ना ही कोई जांचकराई गई। बल्कि उल्टे शंकराचार्य से ही उनके शंकराचार्य का प्रमाण पत्र मांगा जाने लगा और यह कहा गया कि आपको भविष्य में क्यों न मेले में आने से रोक दिया जाए स्वामी जी ने आज कहा इनके मेले में आने के लिए कोई मोहताज नहीं है लेकिन इनका मेला भी नहीं है कि रोक देंगे।
कठिनाई और संघर्ष का रास्ता तय करना पड़ेगा।
यहां यह बताना जरूरी है कि शंकराचार्य स्वामी अभी मुक्तेश्वर आनंद को मौनी अमावस्या पर स्नान करने जा रहे थे तो पुलिस ने रोक दिया और उनके समर्थकों को के साथ और वेद पार्टी बटुकधारी ब्राह्मणों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया बल्कि पुलिस ने उनकी पिटाई तक की जिसकी विरोध में शंकराचार्य ने स्नान न करने का ऐलान किया और बसंत पंचमी तक भी स्नान नहीं किया ।
इस पर सत्ता पक्ष के लोग हो या विपक्ष के लोग सारे लोगों में पुलिस के इस कृत्य का विरोध हो रहा है ।
जहां पर इसकी निंदा विरोध पक्ष के अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री संजय सिंह राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमन सिंह पूर्व सांसद उनके लड़के उज्जवल अमर सिंह कांग्रेस के सांसद चारों शंकराचार्य और अनेक धर्माचार्य ने भारी विरोध किया किया है वहीं पर भारतीय जनता पार्टी के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने भी शंकराचार्य जी से क्षमा मांगते हुए विनम्र भाव से अपील की कि वे गंगा स्नान करें और जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी प्रदेश अध्यक्ष भी इस घटना की आलोचना की है अनेक विधायकों ने भी और साधु संतों ने भी प्रतिदिन सोशल मीडिया पर समाचार पत्रों में बयान देकर के इस घटना की निंदा करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री के इशारे पर किया गया है का आरोप लगाया है जिससे कि राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। लेकिन अभी तक ना तो ऐसे अधिकारियों को चिन्हित किया गया ना ही कोई जांचकराई गई। बल्कि उल्टे शंकराचार्य से ही उनके शंकराचार्य का प्रमाण पत्र मांगा जाने लगा और यह कहा गया कि आपको भविष्य में क्यों न मेले में आने से रोक दिया जाए स्वामी जी ने आज कहा इनके मेले में आने के लिए कोई मोहताज नहीं है लेकिन इनका मेला भी नहीं है कि रोक देंगे।
