“गंडक पर सियासत भारी!  बगहा–बेलवनिया पुल रद्द होने से भड़का जनआक्रोश, मूल मार्ग पर निर्माण की मांग तेज”

“गंडक पर सियासत भारी!  बगहा–बेलवनिया पुल रद्द होने से भड़का जनआक्रोश, मूल मार्ग पर निर्माण की मांग तेज”

 
कुशीनगर।  बगहा (बिहार) को यूपी कुशीनगर जिले के बेलवनिया से जोड़ने वाला प्रस्तावित गंडक पुल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। वर्षों से प्रतीक्षित शास्त्रीनगर–बेलवनिया पुल परियोजना को रद्द किए जाने अथवा उसके मार्ग में बदलाव की सरकारी तैयारी ने स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। पुल को क्षेत्र की जीवन रेखा मानने वाली जनता अब सड़क पर उतर आई है और सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पुल बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों को सीधा जोड़ता, जिससे मात्र 8 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए वर्तमान में लगने वाली 50 किलोमीटर से अधिक की यात्रा से मुक्ति मिलती। पुल के न बनने से न केवल आवागमन बाधित रहेगा, बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार जैसे क्षेत्रों का विकास भी ठप पड़ जाएगा।
विवाद की जड़ तब गहरी हुई जब सरकार ने भारी लागत और किसानों की उपजाऊ भूमि प्रभावित होने की आशंका का हवाला देते हुए शास्त्रीनगर–बेलवनिया मार्ग को रद्द करने का संकेत दिया। इसके स्थान पर पुल को मंगलपुर होते हुए बेलवनिया ले जाने का प्रस्ताव सामने आया, जिससे शास्त्रीनगर और आसपास के गांवों के लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों ने चुनाव के समय पुल निर्माण का आश्वासन दिया था, लेकिन अब सरकार अपने फैसले से पीछे हट रही है। जनता का कहना है कि धनहा–रतवल पुल के चौड़ीकरण का विकल्प इस क्षेत्र की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लोग अब “बोटिंग प्रोटेस्ट” जैसे अनोखे तरीकों से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलनकारियों की स्पष्ट मांग है कि पुल का निर्माण मूल शास्त्रीनगर–बेलवनिया मार्ग पर ही किया जाए, या फिर जटहा–पिपरासी मार्ग को अपनाया जाए, जो तकनीकी और सामाजिक दोनों दृष्टि से अधिक व्यावहारिक है।
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स्थानीय संगठनों के जदयू पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता राकेश सिंह, पुल निर्माण संघर्ष समिति के रविकेश पाठक, विशाल पांडेय, समाज के सचेतक जयेश सिंह सहित हजारों लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। गंडक नदी के दोनों किनारों पर बसने वाली जनता आज एक सुर में कह रही है— “पुल नहीं तो विकास नहीं, और विकास के बिना अब चुप्पी नहीं।”

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