विकास के शिलान्यास से मोदी का चुनावी शंखनाद : सिंगूर से बदली बंगाल की सियासी हवा
On
पश्चिम बंगाल के लिए बीते 24 घंटे केवल सरकारी कार्यक्रमों या परियोजनाओं की घोषणाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राज्य की राजनीति, विकास की दिशा और आगामी चुनावी समीकरणों को एक नई गति दे दी। हुगली जिले के बालागढ़ और सिंगूर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया, उसने स्पष्ट संकेत दे दिया कि बंगाल अब केवल राजनीतिक संघर्ष का मैदान नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ विजन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। इन कार्यक्रमों ने न सिर्फ बुनियादी ढांचे से जुड़ी उम्मीदों को मजबूत किया, बल्कि चुनावी माहौल में भी नई हलचल पैदा कर दी।
प्रधानमंत्री मोदी का सिंगूर और बालागढ़ आना अपने आप में प्रतीकात्मक रहा। सिंगूर वही स्थान है, जो कभी औद्योगीकरण बनाम कृषि भूमि विवाद के कारण राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहा था। आज उसी सिंगूर से विकास कार्यों की शुरुआत का संदेश देना, केंद्र सरकार की यह मंशा दर्शाता है कि अतीत के टकरावों को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर बढ़ा जाए। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्वी भारत के विकास को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि जब तक पूर्वी राज्यों की प्रगति तेज नहीं होगी, तब तक देश का समग्र विकास अधूरा रहेगा। बंगाल, झारखंड, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों को केंद्र में रखकर बनाई जा रही नीतियां इसी सोच का हिस्सा हैं।
बालागढ़ में एक्सटेंडेड पोर्ट गेट सिस्टम का शिलान्यास इस दिशा में एक ठोस कदम है। इस परियोजना में इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट टर्मिनल और ग्रेड ओवर ब्रिज जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की लॉजिस्टिक व्यवस्था को नई मजबूती देंगी। गंगा नदी पर विकसित जलमार्ग के साथ यह परियोजना मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगी। इससे कोलकाता जैसे महानगर पर ट्रैफिक और माल ढुलाई का दबाव कम होगा और उद्योगों को तेज, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि बीते 11 वर्षों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। सागरमाला योजना के तहत सड़क और पोर्ट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कोलकाता पोर्ट ने हाल के वर्षों में कार्गो हैंडलिंग के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि इससे जुड़े रोजगार, व्यापार और उद्योग के अवसरों का विस्तार भी है, जो बंगाल की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा।
रेल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी बंगाल के लिए यह समय ऐतिहासिक बताया जा रहा है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत, कई नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का शुभारंभ और बंगाल को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने वाली नई रेल सेवाएं इस बात का संकेत हैं कि राज्य को राष्ट्रीय परिवहन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे बीते 100 वर्षों में शायद पहली बार 24 घंटे के भीतर इतना बड़ा काम बताया। रेल परियोजनाओं का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी तेज होता है।
इन सभी विकास घोषणाओं के बीच राजनीतिक संदेश भी उतना ही स्पष्ट था। प्रधानमंत्री मोदी ने बिना किसी आक्रामक शब्दावली के यह संकेत दे दिया कि केंद्र सरकार बंगाल के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें राजनीति आड़े नहीं आने दी जाएगी। हालांकि, चुनावी दृष्टि से देखें तो इन कार्यक्रमों ने राज्य की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है। लंबे समय से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच, विकास के मंच से दिया गया यह संदेश मतदाताओं को सीधे संबोधित करता है।
सिंगूर में विकास कार्यों की शुरुआत विशेष रूप से चुनावी नजरिए से महत्वपूर्ण है। कभी जिस क्षेत्र को औद्योगिक असफलता और राजनीतिक विवाद के प्रतीक के रूप में देखा जाता था, आज वहीं से विकास का नया अध्याय शुरू करने की कोशिश की जा रही है। यह संदेश किसानों, युवाओं और उद्योग जगत तीनों के लिए है। किसानों को यह भरोसा दिया जा रहा है कि विकास उनके हितों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर होगा। युवाओं के लिए यह रोजगार और अवसरों की बात है, जबकि उद्योगों के लिए यह स्थिर नीति और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का संकेत है।
प्रधानमंत्री के दौरे ने यह भी दिखाया कि केंद्र सरकार जलमार्ग, रेल, सड़क और हरित मोबिलिटी को एक साथ जोड़कर समग्र विकास मॉडल पर काम कर रही है। मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का यह दृष्टिकोण न केवल लागत कम करता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी ध्यान में रखता है। ग्रीन मोबिलिटी और इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट जैसे विकल्प भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हैं, और बंगाल जैसे नदी-समृद्ध राज्य के लिए यह विशेष अवसर प्रदान करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन परियोजनाओं और घोषणाओं का असर केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले चुनावों में विकास बनाम शासन, केंद्र बनाम राज्य और भविष्य बनाम अतीत जैसे मुद्दे और अधिक मुखर होंगे। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा और सिंगूर से दिया गया विकास का संदेश भाजपा के लिए एक मजबूत चुनावी आधार तैयार करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह इन घोषणाओं के बीच अपनी उपलब्धियों और नीतियों को कैसे सामने रखती है।
कुल मिलाकर, सिंगूर और बालागढ़ से उठी यह विकास की आवाज केवल ईंट-पत्थर की परियोजनाओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति, अर्थव्यवस्था और भविष्य की दिशा को प्रभावित करने वाला क्षण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकास के शिलान्यास के साथ चुनावी शंखनाद भी कर दिया है। अब यह बंगाल की जनता पर निर्भर करेगा कि वह इस विकास के वादे को किस नजर से देखती है और आगामी चुनावों में किसे अपना समर्थन देती है। इतना तय है कि बंगाल की सियासी हवा बदल चुकी है और विकास का मुद्दा केंद्र में आ गया है।
कांतिलाल मांडोत
About The Author
स्वतंत्र प्रभात मीडिया परिवार को आपके सहयोग की आवश्यकता है ।
Related Posts
राष्ट्रीय हिंदी दैनिक स्वतंत्र प्रभात ऑनलाइन अख़बार
19 Jan 2026
18 Jan 2026
17 Jan 2026
Post Comment
आपका शहर
18 Jan 2026 18:10:15
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक तनाव के बीच एक नया कूटनीतिक संकेत सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड...
अंतर्राष्ट्रीय
14 Jan 2026 21:34:09
नई दिल्ली। ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों और इंटरनेट शटडाउन के बीच वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को...

Comment List