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Longest Railway Bridge: ये है भारत का सबसे लंबा रेल पुल, जानें क्या है इसकी खासियत
Longest Railway Bridge : भारतीय रेलवे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है, जबकि एशिया में यह दूसरे स्थान पर आता है। देशभर में रेलवे का नेटवर्क 67 हजार किलोमीटर से अधिक फैला हुआ है, जिसमें करीब 8 हजार रेलवे स्टेशन और 13 हजार से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। हर दिन 2.5 करोड़ से अधिक यात्री ट्रेन के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं।
रेल यात्रा सिर्फ सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर भी होती है। सफर के दौरान ट्रेनें ऊंचे-ऊंचे पुलों, लंबी सुरंगों और खूबसूरत नजारों से होकर गुजरती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा पुल कौन-सा है और वह कहां स्थित है। अगर आप इसके बारे में नहीं जानते, तो आइए विस्तार से जानते हैं।
भारतीय रेलवे में कितने पुल हैं
आधिकारिक आंकड़ों और रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय रेलवे के पास करीब 1 लाख 60 हजार पुल हैं। इनमें से 700 से 800 पुल बड़े और महत्वपूर्ण नदियों पर बने हुए हैं। वहीं 12 से 13 हजार प्रमुख पुल हैं, जबकि छोटे नालों और रास्तों के ऊपर बने पुलों की संख्या 1 लाख से अधिक बताई जाती है।
भारत का सबसे लंबा रेल पुल कौन-सा है
भारत का सबसे लंबा रेलवे पुल असम में स्थित बोगीबील ब्रिज है। यह एक रेल-सह-सड़क पुल है, यानी इस पर ट्रेन के साथ-साथ सड़क वाहनों की भी आवाजाही होती है। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना हुआ है और पूर्वोत्तर भारत के लिए बेहद अहम माना जाता है।
Read More सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों की ‘मनी पावर’ पर रोक लगाने की याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब मांगाकितनी है बोगीबील ब्रिज की लंबाई
बोगीबील ब्रिज की कुल लंबाई 4.94 किलोमीटर है। यह पुल असम के डिब्रूगढ़ और धेमाजी जिलों को आपस में जोड़ता है। पुल के निचले हिस्से में दो रेलवे ट्रैक हैं, जबकि ऊपरी हिस्से में तीन लेन की सड़क बनाई गई है।
पुल का निर्माण और इतिहास
बोगीबील ब्रिज का शिलान्यास 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने किया था। हालांकि, इसका वास्तविक निर्माण कार्य 2002 में शुरू हुआ। इस विशाल परियोजना पर करीब 5,900 करोड़ रुपये की लागत आई। आखिरकार, 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक पुल का उद्घाटन किया।
बोगीबील ब्रिज से जुड़े रोचक तथ्य
इस पुल की डिजाइन लाइफ 120 साल तय की गई है। पुल के ऊपर बनी सड़क इतनी मजबूत है कि आपात स्थिति में यहां फाइटर जेट की लैंडिंग भी की जा सकती है। यह भारत का इकलौता ऐसा पुल है, जो पूरी तरह वेल्डिंग तकनीक से बना है। इसमें कहीं भी नट-बोल्ट या रिवेट्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l

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