स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष 

जोखिम, नवाचार और युवाशक्ति से भविष्य निर्माण में विकास की मुख्यधारा

स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष 

भारत आज जिस दौर से गुजर रहा है, वह केवल आर्थिक विस्तार का नहीं बल्कि सोच, साहस और सपनों के विस्तार का दौर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया संदेश, “युवा जोखिम उठाएं और आगे बढ़ें, अब यही है विकास की मुख्यधारा” इसी बदली हुई राष्ट्रीय चेतना को व्यक्त करता है। स्टार्टअप इंडिया मिशन के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अपने भविष्य को सुरक्षित नौकरियों या पारंपरिक ढर्रों में नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और जोखिम उठाने की संस्कृति में देख रहा है। यह मिशन बीते एक दशक में युवाओं की मानसिकता, देश की अर्थव्यवस्था और भारत की वैश्विक छवि तीनों को गहराई से प्रभावित करने वाला साबित हुआ है।
 
स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत 2016 में एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ हुई थी।भारत में ऐसा इकोसिस्टम बनाना, जहां नए विचारों को सम्मान मिले, असफलता को अपराध नहीं बल्कि अनुभव माना जाए और युवा अपने दम पर समाधान गढ़ने के लिए प्रोत्साहित हों। दस वर्ष पहले देश में स्टार्टअप्स की संख्या बेहद सीमित थी और उद्यमिता को जोखिम भरा, अस्थिर और केवल चुनिंदा लोगों का क्षेत्र माना जाता था। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। स्टार्टअप्स की संख्या दो लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है और भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। यह परिवर्तन केवल नीतियों का परिणाम नहीं है, बल्कि उस विश्वास का नतीजा है, जो सरकार ने युवाओं पर दिखाया और युवाओं ने स्वयं पर किया।
 
प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि पहले भारतीय समाज में जोखिम लेने को हतोत्साहित किया जाता था। सुरक्षित नौकरी, तय वेतन और स्थिर जीवन को ही सफलता की कसौटी माना जाता था। स्टार्टअप इंडिया ने इस सोच को चुनौती दी। आज युवा यह मानने लगे हैं कि असफल होना अंत नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। यही मानसिक बदलाव इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। स्वयं प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि जोखिम उठाना उनकी व्यक्तिगत कार्यशैली का हिस्सा रहा है। उन्होंने ऐसे निर्णय लिए, जिनसे सरकारें वर्षों तक राजनीतिक नुकसान के डर से बचती रहीं, लेकिन राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी। यह संदेश युवाओं को यह सिखाता है कि बड़ा परिवर्तन बिना साहस के संभव नहीं होता।
 
युवाओं के लिए स्टार्टअप इंडिया केवल एक योजना नहीं, बल्कि अवसरों का द्वार है। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और यदि इस युवा शक्ति को सही दिशा नहीं मिली, तो वह बोझ बन सकती है। स्टार्टअप इंडिया इस शक्ति को उत्पादक बनाने का माध्यम बना है। यह युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने की प्रेरणा देता है। आर्थिक दृष्टि से स्टार्टअप्स ने लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं। बौद्धिक स्तर पर उन्होंने युवाओं में समस्या समाधान, तकनीकी दक्षता और वैश्विक सोच विकसित की है। सामाजिक स्तर पर यह आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करता है।
 
इस मिशन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। आज मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है। महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की फंडिंग के मामले में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम बन चुका है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि उद्यमिता अब केवल पुरुषों तक सीमित क्षेत्र नहीं रहा। महिलाओं की भागीदारी से न केवल लैंगिक समानता को बल मिला है, बल्कि नवाचार में विविधता भी आई है, जो किसी भी मजबूत इकोसिस्टम के लिए आवश्यक है।
 
वैश्विक स्तर पर भारतीय स्टार्टअप्स को अब गंभीरता से देखा जा रहा है। एक समय था जब भारत को केवल सस्ता श्रम और बड़ा बाजार माना जाता था, लेकिन आज भारत नवाचार और तकनीकी समाधान का केंद्र बनता जा रहा है। फिनटेक, हेल्थटेक, एडटेक, एग्रीटेक, क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खड़े हैं। विदेशी निवेशक भारत को दीर्घकालिक संभावनाओं वाले देश के रूप में देख रहे हैं। यूपीआई, आधार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने भारत को कम लागत में उच्च प्रभाव वाले नवाचारों का उदाहरण बना दिया है। यही कारण है कि कई विदेशी स्टार्टअप्स भारत में अपने रिसर्च सेंटर खोल रहे हैं और भारतीय स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी कर रहे हैं।
 
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास पर दिया गया जोर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि एआई केवल तकनीक नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक जरूरत है। भविष्य की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और शासन तीनों में एआई की भूमिका निर्णायक होगी। यदि यह तकनीक विदेशी सर्वरों और विदेशी कंपनियों के नियंत्रण में रही, तो डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता पर खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए उन्होंने भारतीय युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय सर्वरों पर स्वदेशी एआई विकसित करें। फरवरी 2026 में प्रस्तावित एआई इम्पैक्ट समिट इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो भारत को वैश्विक एआई नेतृत्व की ओर ले जा सकता है।
 
प्रधानमंत्री मोदी का युवाओं से संवाद उन्हें केवल प्रेरित नहीं करता, बल्कि उनके भीतर छिपी क्षमता पर विश्वास भी जगाता है। जब वे कहते हैं कि डिग्रियों से ज्यादा आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा मायने रखती है, तो यह उन लाखों युवाओं के लिए संबल बनता है, जो पारंपरिक रास्तों से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं। सरकारी मंचों पर स्टार्टअप्स को सम्मान मिलना, उन्हें राष्ट्रीय विकास का भागीदार मानना और उनके विचारों को सुना जाना यह सब युवाओं का हौसला बुलंद करता है।
 
आने वाला दशक स्टार्टअप इंडिया के लिए और भी महत्वपूर्ण होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक, स्पेस टेक और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भारत के पास नेतृत्व करने का अवसर है। ग्रामीण और कृषि आधारित स्टार्टअप्स से समावेशी विकास को गति मिलेगी और भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगा। इसके लिए आवश्यक है कि नीतिगत स्थिरता बनी रहे, पूंजी तक पहुंच आसान हो और शिक्षा प्रणाली नवाचार को बढ़ावा दे।
 
अंततः, स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष यह साबित करते हैं कि यदि युवाओं को विश्वास, अवसर और स्वतंत्रता दी जाए, तो वे असाधारण परिणाम दे सकते हैं। जोखिम, नवाचार और आत्मनिर्भरता आज भारत की विकास यात्रा की मुख्यधारा बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश केवल प्रेरणादायी वक्तव्य नहीं, बल्कि नए भारत का घोषणापत्र है।एक ऐसा भारत, जहां युवा केवल भविष्य की आशा नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति हैं।
 
कांतिलाल मांडोत

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