ये माननीय, जो मान नहीं रहे; वोट लेने के बाद जनता को भूले, विकास को तरस रही विधानसभाएं
ब्यूरो प्रयागराज। चुनाव आते ही नेता अपने-अपने वादों के साथ जनता के सामने पेश होते हैं. जनता को विकास और खुशहाली के लोकलुभावने सपने दिखाते हैं, लेकिन जीतने के बाद स्थितियां बदल जाती हैं. कुछ नेता जीतने के बाद अपने वादों पर खरे उतरते हैं, लेकिन कुछ तो गायब ही हो जाते हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश के वर्तमान विधायक अपने क्षेत्र में विकास के लिए विधायक निधि का कितना सही इस्तेमाल कर रहे हैं, इसको लेकर ग्राम्य विकास विभाग उत्तर प्रदेश की ओर से mlaladsup.in पर अपलोड किए गए डाटा का विशलेषण किया गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
ग्राम्य विकास विभाग के अनुसार, 10 विधायकों ने 5 करोड़ में से 1 करोड़ भी जनता के लिए खर्च कर पाए हैं. इनमें उन्नाव के सफीपुर विधायक बंबा लाल ने तो 2 लाख रुपये ही वित्तीय वर्ष 2024-25 में खर्च के लिए स्वीकृत किया है. जबकि सिधौली विधायक मनीष रावत, गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह, मुंगरा बादशाहपुर विधायक पंकज सिंह, वाराणसी उत्तरी विधायक रवीन्द्र जायसवाल, बलिया विधायक दया शंकर सिंह, मछलीशहर विधायक डॉ. रागिनी, भोगनीपुर विधाक राकेश सचान, जखनियां विधायक बेदी, जौनपुर विधायक गिरीश चन्द्र यादव और अलीगढ़ शहर से विधायक मुक्ता संजीव राजा 1 साल में एक करोड़ निधि का भी काम नहीं करवाए हैं।
सुल्तानपुर के विधायक विनोद पूरे प्रदेश में टॉपः वहीं, विधायक निधि का सबसे अधिक विकास कार्यों के लिए सुल्तानपुर से विधायक विनोद सिंह ने किया है. विनाद सिंह ने 9.35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इनमें 2023-24 में जारी निधि भी शामिल है, जो बच गई थी. वहीं, बागपत विधायक योगेश धामा (6.95 करोड़), रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह (6.84 करोड़), हमीरपुर विधायक डा. मनोज कुमार प्रजापति (6.45 करोड़), कैम्पियरगंज विधायक फतेह बहादुर (6.28 करोड़), मुरादनगर विधायक अजीत पल त्यागी ( 6.27 करोड़), प्रतापपुर विधायक मती विजमा यादव (6.13 करोड़ ), हर्रैया विधायक अजय सिंह (5.90 करोड़), लखनऊ उत्तर विधायक डॉ. नीरज बोरा (5.88 करोड़) और सिरसागंज विधायक सर्वेश सिंह ने 5.8 करोड़ रुपये अपनी निधि से खर्च किए हैं।
Read More Winter Camping: सर्दियों की पहाड़ी ट्रिप बनानी है यादगार? कैंपिंग से पहले जान लें ये टिप्सग्राम्य विकास विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध डाटा के मुताबिक 2024-25 में अपनी भविष्य निधि न खर्च करने वाले एनडीए के विधायक आगे हैं. भाजपा के 4, आरएलडी और सपा के 1-1 विधायक शून्य खर्च वाले हैं. वहीं, निधि का एक हिस्सा का भी इस्तेमाल न करने में भाजपा के माननीय अव्वल हैं. भाजपा के 7, सपा के 2 और सुभासपा के 1 विधायक 70 लाख रुपये तक खर्च किया है।
Read More New Expressway: यूपी-हरियाणा में बनेगा 750 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे, 22 जिलों को जोड़ेगा आपस में सबसे अधिक निधि का उपोयग करने में भी सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही टॉप किया है. भाजपा के 7 विधायकों ने 2024-25 में जारी होने वाली निधि के साथ ही पिछले साल के बची निधि भी जनता के कार्यों में लगा दिया है. इस लिस्ट में समाजवादी पार्टी के भी 2 विधायक शामिल हैं. वहीं, बसपा के एक मात्र विधायक उमाशंकर सिंह ने भी पूरी निधि खर्च कर दी है।
Read More दिल्ली के बाद हिली लेह-लद्दाख की धरती, 5.7 तीव्रता का आया भूकंप, घरों-दफ्तरों से बाहर निकले लोगगौरतलब है कि विधायक या एमएलसी अपने क्षेत्र की आवश्यकतानुसार मुख्य विकास अधिकारी को निर्माण कार्यों का विवरण देते हैं. इसके बाद स्वीकृत कार्य को शाकीय कार्यदायी विभागों के साथ ही राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कार्यदायी संस्था को कार्य दिया जाता है. यानी सिर्फ विधायक द्वारा योजनाओं की स्वीकृत देते हैं. इसके बाद कार्य की रूपरेखा, टेंडर व अन्य प्रक्रिया शासन द्वारा अपनाई जाती है. कार्य पूरा होने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जिलाधिकारी (DM) के जरिए विधायक निधि से सीधे कार्यदायी संस्था को भुगतान किया जाता है. विधायक द्वारा प्रस्ताव देने के बाद 45 दिनों में कार्य स्वीकृत और 3 महीने में कार्य शुरू करने का प्रावधान है।

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