गुजरात में दो महीने में 48 धार्मिक ढांचे गिराए गए, सरकार ने हाई कोर्ट को बताया

गुजरात में दो महीने में 48 धार्मिक ढांचे गिराए गए, सरकार ने हाई कोर्ट को बताया

ब्यूरो प्रयागराज। गुजरात के गृह विभाग ने गुरुवार को हाई कोर्ट को बताया कि 1 नवंबर से 31 दिसंबर, 2025 के बीच यानी दो महीने में राज्य भर में 48 गैर-कानूनी धार्मिक ढांचे गिराए गए. 38 को दूसरी जगह बसाया गया और 30 को नियमित किया गया

गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रैन की पीठ ने सड़कोंबगीचों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर गैर-कानूनी धार्मिक कब्जों के बारे में एक स्वतः संज्ञान वाली याचिका (Suo Moto) की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान गृह विभाग ने पीठ के समक्ष एक डिटेल्ड एफिडेविट पेश किया

गृह विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने याचिका के जवाब में एफिडेविट फाइल किया और धार्मिक अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई पर दूसरी रिपोर्ट भी पेश की. मामले में अगली सुनवाई अब 11 मार्च को होगी

राज्य सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने पीठ को बताया कि राज्य सरकार गैर-कानूनी धार्मिक ढांचों के खिलाफ नियमितपारदर्शी और कानूनी कार्रवाई कर रही है. उन्होंने साफ किया कि किसी खास धर्म या पंथ को निशाना बनाने का कोई इरादा नहीं हैलेकिन जनता के हित में और कानून को बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी है

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गृह विभाग के हलफनामे के मुताबिकपिछले दो महीनों में राज्य भर में 48 धार्मिक अतिक्रमण हटाए गए. इनमें से 38 को दूसरी जगह स्थापित किया गया और 30 से अधिक को नियमित किया गया

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त्रिवेदी ने आगे कहा कि सड़कोंबगीचों या अन्य सार्वजनिक जगहों पर गैर-कानूनी धार्मिक ढांचों के खिलाफ 468 नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें से 97 नोटिस अखबारों में छपवाए गए. साथ हीधार्मिक नेताओं से सहयोग मांगने के लिए उनके साथ 97 बैठकें की गईं

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कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार को तीन हफ्ते के भीतर लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है। यह मामला मौत की सजा के तरीके को लेकर महत्वपूर्ण हैक्योंकि कई देशों ने फांसी छोड़कर इंजेक्शन लगाने जैसे तरीके अपना लिए हैं। भारत में अभी मौत की सजा के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत फांसी ही निर्धारित तरीका है।

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