Pension: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए जरूरी खबर, पेंशन के नियमों में हुआ ये बदलाव
Pension: केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को राहत देने के लिए पेंशन से जुड़े नियमों को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। खासतौर पर पेंशनर या फैमिली पेंशनर के निधन के बाद पेंशन भुगतान आदेश (PPO) की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया गया है। इसके साथ ही रिटायरमेंट के बाद पेंशन में मनमानी कटौती या रिकवरी से बचाने वाले पुराने नियमों को भी दोहराया गया है।
वित्त मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (CPAO) ने साफ किया है कि किसी पेंशनर या फैमिली पेंशनर की मृत्यु होने पर बैंक का केंद्रीकृत पेंशन प्रसंस्करण केंद्र (CPPC) केवल निर्धारित प्रक्रिया का ही पालन करेगा। नियमों के अनुसार, PPO का डिस्बर्सर हिस्सा, डेथ सर्टिफिकेट और CPAO द्वारा जारी अन्य आवश्यक दस्तावेज केवल CPAO के माध्यम से ही लौटाए जाएंगे।
इन्हें सीधे वेतन एवं लेखा कार्यालय (PAO) या संबंधित विभाग को भेजना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। CPAO ने बताया कि कुछ बैंक इस प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे थे, जिस वजह से यह सख्त स्पष्टीकरण जारी किया गया है। अब निर्देशों की अनदेखी पर संबंधित बैंक के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
हालांकि यह निर्देश तकनीकी लग सकता है, लेकिन इसका सीधा फायदा दिवंगत पेंशनरों के परिवारों को होगा। एक तय चैनल से PPO लौटने पर दस्तावेजों के गुम होने, अनावश्यक देरी और बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचा जा सकेगा। अक्सर पेंशनर के निधन के बाद परिवार पहले ही मानसिक तनाव में होता है, ऐसे में पेंशन से जुड़े कागजात अटकने से परेशानी और बढ़ जाती है। सरकार का मानना है कि CPAO के जरिए एकल प्रक्रिया अपनाने से ट्रैकिंग आसान होगी और विवादों की संभावना भी कम होगी।
पेंशन कटौती और रिकवरी पर भी बड़ी राहत
इसके साथ ही पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने पेंशन कटौती और रिकवरी को लेकर भी राहत भरे निर्देश दोहराए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एक बार पेंशन या फैमिली पेंशन फाइनल हो जाने के बाद उसमें कटौती नहीं की जा सकती, जब तक कोई स्पष्ट clerical error न हो। यदि दो साल बाद कोई गलती सामने आती है, तो DoPPW की मंजूरी के बिना पेंशन कम नहीं की जा सकेगी।
रिकवरी पर भी सख्त शर्तें
यदि सरकारी गलती के कारण पेंशनर को अधिक भुगतान हुआ हो और इसमें पेंशनर की कोई भूमिका न हो, तो रिकवरी माफ करने पर भी विचार किया जाएगा। अगर किसी स्थिति में रिकवरी जरूरी हो, तो पेंशनर को कम से कम दो महीने का नोटिस देना अनिवार्य होगा और कटौती एक साथ न करके किश्तों में ही की जाएगी।


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