कुशीनगर में दिनदहाड़े कत्ल, सड़क पर उतरा इंसाफ का गुस्सा
कुशीनगर में इकलौते बेटे की हत्या से टूटा परिवार, एनकाउंटर और बुलडोजर की मांग पर अड़ा गांव
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ब्यूरो चीफ प्रमोद रौनियार
कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से आई यह खबर न सिर्फ एक नौजवान की बेरहमी से की गई हत्या की है, बल्कि उस टूटते भरोसे की भी है, जो पीड़ित परिवार का कानून और व्यवस्था पर डगमगाता नजर आया।
निशांत को क्या पता था आज जिंदगी की आखिरी यात्रा होगी?
अमरपुर गांव का रहने वाला निशांत उर्फ शक्तिमान सिंह—जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान था—वह बुधवार को घर से महज एक छोटे से काम के लिए निकला था। खेत के लिए खाद लेने जा रहा निशांत को क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कसया थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े फैजल और नौशाद ने अपने साथियों के साथ मिलकर निशांत और उसके दोस्त को रोका। पहले दोस्त के साथ मारपीट हुई और जब निशांत ने विरोध किया तो उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार कर दिए गए। गले और पेट पर किए गए हमले इतने घातक थे कि अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसकी सांसें थम गईं।
घटना के बाद गांव और परिवार में कोहराम मच गया। पोस्टमॉर्टम के बाद जब गुरुवार सुबह करीब 10 बजे शव गांव पहुंचा, तो गुस्सा सड़कों पर उतर आया। सैकड़ों ग्रामीणों ने शव को चौराहे पर रखकर जाम लगा दिया। परिवार ने साफ कहा—जब तक आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, अंतिम संस्कार नहीं होगा।
निशांत की मां का दर्द शब्दों से बाहर था। उन्होंने कहा—

“जैसे मेरे बेटे को मारा गया, वैसे ही आरोपियों का एनकाउंटर हो। अगर ये नहीं हो सकता तो हमें भी गोली मार दो।”
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर 5 थानों की पुलिस और एक कंपनी पीएसी तैनात करनी पड़ी। बाजार बंद रहे, माहौल तनावपूर्ण रहा। करीब 7 घंटे बाद एडीएम वैभव मिश्रा और एएसपी सिद्धार्थ वर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस ने पहले ही एक आरोपी नौशाद को गिरफ्तार कर लिया था और गुरुवार को फरार आरोपी फैजल की भी गिरफ्तारी कर ली गई। अन्य संलिप्त लोगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।
निशांत सिर्फ एक नाम नहीं था। वह किसान पिता संतोष सिंह का सपना था—जो 12वीं के बाद सेना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। एक होनहार युवक, जो देश की सेवा का सपना देख रहा था, आज सिस्टम से जवाब मांगती एक फाइल बन चुका है।

यह मामला फिर एक सवाल छोड़ जाता है—
क्या इंसाफ इतना तेज होगा कि पीड़ित परिवार को सड़क पर उतरना न पड़े? कानून का असली इम्तिहान अब शुरू हुआ है।
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