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सामान समेटकर निकलो! चीन पर भड़का पाकिस्तान, क्या बंद होने की कगार पर है CPEC?
पाकिस्तान ने पहली बार स्वीकारा—CPEC से नहीं मिला कोई फायदा
International Desk
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) अब विवादों के घेरे में है। पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि इस बहु-अरब डॉलर की परियोजना से देश को वह लाभ नहीं मिला जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
पाकिस्तान के योजना मंत्री एहसान इक़बाल ने कहा कि CPEC से देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के कई मौके मिले थे, लेकिन पिछली सरकारों की नाकामियों और नीतिगत गलतियों के कारण इन अवसरों का लाभ नहीं उठाया जा सका।
उन्होंने साफ कहा कि चीनी निवेशक अब पाकिस्तान छोड़कर जा रहे हैं क्योंकि उन्हें यहां सुरक्षा, स्थिरता और नीतिगत भरोसा नहीं मिल रहा।
“हमने गेम चेंजर प्रोजेक्ट भी बर्बाद कर दिया” – पाक मंत्री
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इक़बाल ने स्वीकार किया कि CPEC पाकिस्तान के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता था, लेकिन लापरवाही और राजनीति ने इसे ठप कर दिया।
Read More 'न्याय नहीं, देरी व दबाव के लिए हो रहे कई मुकदमे', मुकदमों की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्टयह पहली बार है जब किसी पाकिस्तानी मंत्री ने खुले तौर पर माना है कि CPEC अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सका।
60 अरब डॉलर की परियोजना अब ठप?
CPEC चीन के शिंजियांग प्रांत को पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट से जोड़ता है।
करीब 60 अरब अमेरिकी डॉलर की यह परियोजना चीन की वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा मानी जाती है, जिसके तहत वह विभिन्न देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर बना कर अपना प्रभाव बढ़ाता है।
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बलूचिस्तान में चीनी इंजीनियरों पर हमले और उनकी मौतें,
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सुरक्षा व्यवस्था की असफलता,
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राजनीतिक अस्थिरता,
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निवेशकों का भरोसा टूटना।
इन कारणों से CPEC की रफ्तार लगभग रुक गई है।
चीन-पाकिस्तान रिश्तों में तनाव?
पाकिस्तान के मंत्री के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या चीन अब CPEC से अपना हाथ खींच सकता है?
जहां चीन लगातार सुरक्षा की मांग करता रहा, वहीं पाकिस्तान इसे पूरा करने में विफल दिखाई दे रहा है।
ताज़ा बयानों ने दोनों देशों के रिश्तों पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
क्या CPEC बंद होने की कगार पर है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई चीनी कंपनियों ने पहले ही पाकिस्तान में अपनी गतिविधियां सीमित कर दी हैं।
पाकिस्तान खुद मान रहा है कि CPEC “एक तरह से ठप” हो चुका है।
यदि हालात यूं ही बने रहे तो यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी तरह रुक सकती है—जो चीन और पाकिस्तान, दोनों के लिए बड़ा झटका होगा।


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