बीजेपी एम एल सी  के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल कर फंड से ट्रांसफर कर लिए 3.20 करोड़ रुपये।

प्रसाद लाड ने कथित तौर पर अवैध तरीके से उनकी सहमति के बिना उनके एमएलसी फंड से 3.20 करोड़ रुपये के ट्रांसफर के बारे में जानकारी का मुद्दा उठाया।

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।
प्रयागराज।
 
 
महाराष्ट्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड के फर्जी हस्ताक्षर और लेटरहेड का उपयोग करके एमएलसी फंड से अवैध ट्रांसफर का मामला सामने आया है। इसके बाद महाराष्ट्र विधान परिषद के अध्यक्ष राम शिंदे ने बुधवार को राज्य प्रशासन को निर्देश दिया कि विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर और लेटरहेड का उपयोग करके एमएलसी फंड के अवैध हस्तांतरण के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड ने इस मुद्दे को उठाया था।
 
प्रसाद लाड ने कथित तौर पर अवैध तरीके से उनकी सहमति के बिना उनके एमएलसी फंड से 3.20 करोड़ रुपये के ट्रांसफर के बारे में जानकारी का मुद्दा उठाया। प्रसाद लाड ने बताया, “मुझे रत्नागिरी कलेक्टर के घर से एक कॉल आया जिसमें बीड जिले से मेरे लेटरहेड पर 36 कार्यों की सूची के बारे में एक पत्र था, जिसके लिए विधायक निधि से 3.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। लेकिन मैंने कभी पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, न ही मेरा लेटरहेड किसी को दिया गया था।”
प्रसाद लाड ने मांग करते हुए कहा, “पुलिस ने इस मामले में अपराधियों की पहचान कर ली है। आरोपी चाहे किसी भी पार्टी से जुड़े हों, इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। टेलीफोन पर एआई के जरिए मेरी आवाज का भी इस्तेमाल किया गया। 
 
इस तरह की फंड चोरी को रोकने के लिए राज्य सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। सभी दलों के विधायकों ने कहा कि वे सभी इस तरह के प्रयासों का सामना कर चुके हैं और हर गुजरते दिन के साथ ये प्रयास बढ़ते जा रहे हैं। अध्यक्ष राम शिंदे ने कहा, “जब मैं मंत्री था, तब भी मुझे इस तरह के प्रयासों का सामना करना पड़ा था। उमा खापरे, निरंजन दावखरे जैसे अन्य विधायकों को भी इसका सामना करना पड़ा है। हमने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और पैसे का ट्रांसफर रोक दिया गया।”
 
अध्यक्ष राम शिंदे ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार को इस तरह की चोरी को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा, “हमने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं। हमें उम्मीद है कि आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस मुद्दे पर कोई नीतिगत निर्णय होना चाहिए। तकनीकी पहलुओं को ठीक करने की जरूरत है और राज्य सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

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