महिलाओं के नाम पर चल रहा है 'पति राज'

अनुमंडल सभागार में हुई बैठक में दिखा नजारा ,खुलेआम उड़ी सशक्तीकरण की धज्जियाँ

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एम के रोशन
 
सुपौल ,बिहार - महिला सशक्तीकरण के नाम पर पंचायती राज व्यवस्था में 50% आरक्षण देकर महिलाओं को नेतृत्व का अवसर देकर मुख्यधारा में लाने   की सरकारी कोशिशें धरातल में दम तोड़ती नज़र आ रही हैं। अधिकारी ही इसमें पलीता लगाने में जुटे हुए हैं।इसका बीभत्स नजारा त्रिवेणीगंज अनुमंडल सभागार में हुई मुखिया  की बैठक में दिखा। जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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मुखिया के बदले 'पति पहुँचे  बैठक में
 
एसडीएम  अभिषेक कुमार की अध्यक्षता में सोमवार की शाम सभागार में प्रखंड के मुखियाओं से साथ हुई बैठक में  महिला मुखिया  की भागीदारी लगभग नगण्य रही। हाल यह था कि महिला मुखिया की  जगह उनके पति या अन्य पुरुष परिजन बैठक में  न सिर्फ  शामिल हुए, बल्कि विकास योजनाओं पर चर्चा में भी सक्रिय भूमिका निभाते नज़र आए।
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 लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर लगती दिखी चोट
 
 पंचायती राज अधिनियम के मुताबिक निर्वाचित प्रतिनिधि को स्वयं  ही निर्णय लेने और बैठकों में भाग लेने का अधिकार है। ऐसे में 'पति प्रतिनिधियों' की भागीदारी न केवल इस कानून की अनदेखी है, बल्कि यह महिलाओं को महज़ प्रतीकात्मक चेहरा बनाकर उनके अधिकारों का हनन है।
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'सशक्तीकरण' शब्द खो रहा है अर्थ
 
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक महिलाएं स्वयं निर्णय लेने की भूमिका में नहीं आएंगी, तब तक आरक्षण का कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। महिला प्रतिनिधि के बदले पति का यह कार्य  महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य को खोखला बना रहा है।
 
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल
बैठक में मौजूद अधिकारियों द्वारा इस गंभीर स्थिति पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई, न ही कोई कार्रवाई के संकेत दिए गए। इससे साफ है कि यह प्रवृत्ति अब सामान्य बनती जा रही है, जो संविधान और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा प्रहार और सरकार के अरमान पर पानी फेरना ही  है।

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