दिल्ली में आप की आतिशबाजी

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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के 74 वे जन्मदिन पर देश में आतिशबाजी हुई या नहीं,लेकिन दिल्ली में आम आदमीपार्टी ने जमकर आतिशबाजी की। दिल्ली के मुख्य्मंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद आतिशी को अपनाउत्तराधिकारी बनाकर प्रधानमंत्री जी को अनूठा उपहार दिया गया है। कालकाजी विधानसभा सीट से विधायक आतिशी दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री होंगी। आतिशी को 09 मार्च 2023 को पहली बार मंत्री बनाया गया था। मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद उन्हें केजरीवाल कैबिनेट में एंट्री मिली थी।

आतिशी के दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने से और कुछ हो या न हो किन्तु भाजपा की राजनीति को  ग्रहण जरूर लग गया है। भाजपा की मोदी सरकार  ने पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली ,झारखंड ,और बंगाल के मुख्यमांत्रियों को अपना निशाना बनाया था लेकिन तीनों ही भाजपा के शिकंजे से निकल गए। तीन में से दो हेमंत सोरेन और अरविंद केजरीवाल को हालांकि जेल यात्रा करना पड़ी लेकिन ममता बनर्जी अभी तक बची हुई है। सन्देशखाली और  कोलकात की वारदात भी उनका बाल-बांका नहीं कर सकी। अब भाजपा खीज चुकी है,उसकी बौखलाहट सार्वजनिक हो चली है।

दिल्ली में नेतृत्व परिवर्तन यद्यपि भाजपा सरकार द्वारा आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर बनाया गया दबाब ही है, लेकिन केजरीवाल की वक्र  चाल ने  भाजपा के अब तक के किये कराये पर पानी फेर दिया। आम आदमी पार्टी की सियासत अब दोराहे पर है और भाजपा भी।। उसे साबित करना है कि उसका नहले पार दहला कारगर है या नहीं ?
अब आम आदमी पार्टी की ही नहीं भाजपा और गैर भाजपा गठबंधन की राजनीति में भी बदलाव साफ़ नजर आएगा। आतिशी को दिल्ली की कमान मिलने से आम आदमी पार्टी के वो नेता भी कहीं पीछे छूट गए हैं जिनका अरविंद केजरीवाल से रिश्ता पार्टी की स्थापना से भी पुराना है।

केजरीवाल के इस्तीफे से खाली हुए शून्य  को तो आतिशी के जरिए भर दिया गया है ,लेकिन भारी-भरकम मंत्रालयों का कार्यभार संभाल रहीं आतिशी को नई जिम्मेदारी मिलने से कैबिनेट में जगह खाली हो गई है। यानी नए नेताओं की दिल्ली की सरकार में एंट्री तय है. दूसरी तरफ भले ही अगले चुनाव तक आतिशी मुख्यमंत्री रहें, लेकिन संगठन की दृष्टि से भी उनके कद में इजाफा तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री  होने के नाते वो पहली पंक्ति की नेता हो जाएंगी, प्रमुख ' स्टार कैंपेनर ' भी बन जाएंगी। आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अब भाजपा के खिलाफ अभियान छेड़ने के लिए परम स्वतंत्र है।  अब उनकी लड़ाई का रुख भी बदल जायेगा।

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अब केजरीवाल भाजपा की बेईमानी और अपनी ईमानदारी को लेकर राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश करेंगे ,लेकिन ये काम वे अकेले नहीं कर सकते। उन्हें भी इस अभियान में ईमानदारी के साथ पेश आते हुए कांग्रेस की बैशाखी का इस्तेमाल करना पडेगा।  कहते हैं न कि - 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता '। इसी तरह अकेले अरविंद केजरीवाल भाजपा का बाल-बांका  नहीं कर सकते। वर्ष 2024  के आम चुनाव में भाजपा का जो भी नुक्सान हुआ वो कांग्रेस के नेतित्व वाले गठबन्धन की एकजुटता की वजह से हुआ ,केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का उसमें कोई उल्लेखनीय योगदान नहीं है ।  आम आदमी पार्टी पंजाब से आगे ही नहीं बढ़ पायी । यहां तक कि  दिल्ली में भी उसे लोकसभा की एक भी सीट नहीं मिली।
आम आदमी पार्टी की दिल्ली की नयी मुख्यमंत्री आतिशी में कितना आतिश है ये फरवरी 2025  में होने वाले दिल्ली विधानसभा के चुनावों में स्पष्ट हो जाएग।

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आतिशी के पास करने के लिए कुछ भी नया नहीं है। वे केजरीवाल का मुखौटा हैं और मुखौटा ही रहेंगी ,जो कुछ करेंगे वो सब केजरीवाल ही करेंगे। केजरीवाल को यदि अपनी पार्टी को सचमुच राष्ट्रीय दल बनाये रखना है तो उन्हें दिल्ली के बाहर की राजनीति के बारे में भी सोचना और करना पड़ेगा। दिल्ली और पंजाब में सरकार चलकर आम आदमी पार्टी न कांग्रेस हो सकती है और न भाजपा। आम आदमी पार्टी कल भी भाजपा और कांग्रेस से मीलों  पीछे   थी और आज भी है ,शायद कल भी रहेगी। आम आदमी  पार्टी की नई करवट   से सत्तारूढ़ भाजपा को वेदना तो हो रही है और भाजपा की वेदना अलग-अलग तरीके से सामने आ भी रही है।

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हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनावों में भाजपा की पूरी टीम का विचलन साफ़ दिखाई दे रहा है। यहां तक कि  माननीय प्रधानमंत्री को गणेश पूजा के दौरान मुख्य न्यायाधीश के घर अपनी मौजूदगी पर भी मुंह खोलकर कांग्रेस पर हमला करना पड़ा है ।  जाहिर है कि  वे बेफिक्र होकर  पद पर नहीं हैं हालाँकि उनकी कोशिश अपनी फ़िक्र को लगातार छिपाए रखने की है। देश में श्राद्ध  पक्ष शुरू हो चुका ह।  भाजपा केलिए ये देश के पूर्वजों को गरियाने  का और शेष विपक्ष केलिए उनके प्रति शृद्धा प्रदर्शित करने का अवसर भी है। जम्मू-कश्मीर की जनता आज चुनाव के पहले चरण में किस तरह से पेश आती है ,ये देखना भी बाक़ी है। जैसा कि  मैंने पहले ही कहा की भाजपा को आम आदमी पार्टी का ग्रहण लग चुका है ,क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने अब भाजपा सरकार और डबल इंजिन की तमाम सरकारों के हाथ  से बुलडोजर संहिता छीन ली है।  

अब भाजपा बुलडोजर   के जरिये देश के अल्पसंख्यक समुदाय को आतंकित नहीं कर सकती। अब भाजपा को अल्पसंख्यकों को हड़काने के लिए कोई नया औजार तलाशना होगा। प्रधानमंत्री अपनी  टीस को ज्यादा दिन छुपा नहीं पाते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के घर गणेश पूजन में शामिल हुए थे। इस पर विपक्ष के नेताओं ने सवाल उठाया था। प्रधानमंत्री ने आखिर  अपने 74वें जन्मदिन पर भुवनेश्वर में इसका जवाब दे ही  दिया।प्रधानमंत्री ने कहा- 'गणेश पूजन में गया तो कांग्रेस के इकोसिस्टम के लोग भड़क उठे। बांटों और राज करो की नीति पर चलने वाले अंग्रेजों को गणेश उत्सव खटकता था। आज समाज को बांटने और तोड़ने में लगे सत्ता के भूखे लोगों को गणेश पूजा से परेशानी हो रही है।'वे सच बोल रहे हैं या झूठ ये वे खुद जानें लेकिन मुझे लगता है की वे सच कम ही बोलते हैं।

जाहिर है कि  प्रधानमंत्री जितना विचलित कांग्रेस की बढ़त से हैं उतने ही विचलित आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली में की गयी आतिशबाजी से भी है। आम आदमी पार्टी ने सुश्री आतिशी को दांव पर लगाकर एक बड़ा जोखिम लिया है।  इसमका उसे लाभ भी हो सकता और नुक्सान भी । लेकिन सत्ता में बने रहने और सियासत में प्रासंगिकता बनाये रखने के लिए ऐसे जोखिम लेना ही पड़ते हैं। भाजपा तो हर दिन अल्पसंख्यकों  से लड़ने का जोखिम लेती है। अब देखना ये है कि  क्या दिल्ली की आतिश से भाजपा का दुर्ग झुलसता है या दिल्ली की आतिश भीगी हुई बारूद साबित होती है ? खेल दिलचस्प हो गया है। देखते रहिये।

राकेश अचल 

 
 

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