गौशाला मेंभूख से आए दिन मर रही गायों को नोच नोच कर खा रहे कौवे और कुत्ते

हाल ए गौशाला चाऊपुर पंडरी विकास खण्ड नकहा का है जहां मृत गौवंशों को ट्रैक्टर में बांधकर खींचते देखा जा सकता है

गौशाला मेंभूख से आए दिन मर रही गायों को नोच नोच कर खा रहे कौवे और कुत्ते

इस गौशाला में आए दिन 4 से5 गौवंशों के मरने तथा मृत गौ वंशों की  हड्डियां बेचे जाने के भी जिम्मेदारों पर ग्रामीणों ने लगाये आरोप

लखीमपुर खीरी भले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रखर गौ प्रेमी कहे जाते हो और गोवंशों की रक्षा के लिए तथा उनके चारा भूसा और पानी के लिए खजाने का मुंह खोले हुए हो।पर गौशालाओं में बंद गौ वंशों की स्थिति बद से बदतर हो रही है ।आए दिन भूख और प्यास से तड़पते हुए गोवंश अपने प्राण त्याग रहे हैं। जिम्मेदार गोवंशों के लिए आने वाली धनराशि से मालामाल होते दिखाई दे रहे हैं ।इसका जीता जागता उदाहरण विकासखंड नकहा की च उवापुर पडरी गौशाला में देखा जा सकता है।
 
जहां पर आए दिन गोवंश भूख प्यास से तड़पते हुए मृत्यु को प्राप्त होते देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों के बताएं अनुसार इस गौशाला में लगभग 7 से 800 गोवंशीय पशु हैं और आए दिन दो-चार गोवंशीय पशुओकी मौत हो जाती है जिसे केयरटेकर द्वारा प्रधान के ट्रैक्टर में बांधकर घसीटते हुए खाई में फेंक दिया जाता है जब इन गोवंशो की चमड़ी सड जाती है और शेष कंकाल बचता है तो इनकी हड्डियों का भी सौदा करके अपनी जेब में भर ली जाती है। हद तो तब हो गई जब शुक्रवार को संवाददाता चाउपुर पडरी गौशाला के पास से निकली रास्ते से गुजर रहा था ।इस समय प्रधान पुत्र अपने ट्रैक्टर में रस्सी से बांधकर दो मृत गोवंश पशुओं को खींचते चला आ रहा था और लाकर गौशाला के किनारे छोड़ दिया जिनको कौवे नोच-नोच कर खा रहे थे। उस समय गोवंशीय पशु ट्रैक्टर में रस्सी से बंधे हुए थे।
 
जिसका वीडियो संवाददाता द्वारा बनाया गया। वीडियो बनते देखा प्रधान पुत्र ने अपने पिता को फोन लगा कर बताया प्रधान द्वारा अपने पुत्र से यह जानकारी ली गई क्या वीडियो बनाने गौशाला के अंदर पत्रकार आए थे या बाहर से बनाया था पुत्र ने यह बताया कि नहीं सड़क पर से ही वीडियो बनाया था। गोवंशीय पशुओं की रक्षा के लिए खोले गए स्थानीय गौशालाओं में भूसा चारा दाना पानी की समुचित व्यवस्था के लिए भले ही योगी सरकार लाखों का बजट भेज रही हो पर इन गौशालाओं में रह रहे गोवंशीय पशुओं की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
 
जिसका कारण ग्राम पंचायत अधिकारी ग्राम प्रधान व पशुचिकित्सक की मिली भगत से किया जा रहा सरकारी धन का बंदर बांट मुख्य कारण बताया जाता है। जिम्मेदारों की खाओ कमाऊ  नीति के चलते गौशालाओं में बंद गोवंशीय पशु भूख और प्यास से तड़प तड़प कर असमय काल के गाल में जाने को विवश हो रहे हैं और प्रशासन आंख बंद किए हुए बैठा सब कुछ देख रहा है। शायद यही है योगीराज का रामराज्य तथा भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश की तस्वीर।
 
 

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