युवाओं के जीवन से खिलवाड़ कर रहा पेपर लीक गैंग

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पूरे प्रदेश में शिक्षा माफियाओं का बोलबाला

उन्नाव।

 

उत्तर प्रदेश में परीक्षा का पर्चा लीक हो जाने और बाद में रद्द होने के बाद फिर से दुबारा पेपर होना पूरे यूपी में एक सामान्य परिघटना बन चुकी है। यह एक ऐसी सतत समस्या बन चुकी है जो कुछ समूहों और व्यक्तियों की कुटिल करतूतों की ओर इशारा करती है जिन्हें राज्य में ‘पेपर-लीक गैंग’ के नाम से जाना जाता है, और वह सड़ांध जो राज्य सरकार की नौकरशाही और परीक्षाओं को आयोजित करने वाले संगठनों में भयानक रूप से बजबजा रही है।

जहाँ एक तरफ कई कोचिंग संस्थान हमेशा राडार में बने हुए हैं और इस बात के पुख्ता सुबूत भी हैं कि यूपीटीईटी (उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा), सीटीईटी (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) और अब सिपाही भर्ती परीक्षा जैसी प्रमुख परीक्षाओं के पेपर लीक होने के पीछे इनका हाथ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा राज्य सरकार, योगी राज के तहत कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार लाने का दावा करते हुए अपनी छाती पीटती रहती है, लेकिन इस प्रकार की समस्या का कोई ठोस समाधान ढूंढ पाने में विफल साबित रही है

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जिसने लाखों अभ्यर्थियों के समय और उर्जा को खाक में मिला दिया है। वही सिपाही भर्ती परीक्षा लीक होने के मामले में योगी सरकार ने अपनी किरकिरी से बचने के लिए दोबारा परीक्षा 6 माह के भीतर आयोजित करने का फैसला लिया है वही दूसरी ओर अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि योगी राज के तहत पेपर लीक होना आम बात हो गई है।यूपी में पेपर लीक की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। बीते कुछ सालों में उत्तर प्रदेश में पेपर लीक की घटनाएं हुई है जिनमे मामला 2017 का है जहां दारोगा पद के लिए हो रही ऑनलाइन परीक्षा के लिए प्रदेश के 22 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। 25 और 26 जुलाई 2017 को तकरीबन 1 लाख 20 हजार आवेदकों को परीक्षा देनी थी, लेकिन पेपर लीक होने की वजह से इसे निरस्त कर दिया गया था। इस मामले में आगरा के ओम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट से 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 2 फरवरी 2018 में यूपीपीसीएल पेपर लीक का मामला सामने आने पर जूनियर इंजीनियर (जेई) परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था।

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इसमें यूपी एसटीएफ ने जौनपुर के रहने वाले परमिंदर सिंह को गिरफ्तार किया था। जुलाई 2018 में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। एसटीएफ ने पेपर लीक होने की पुष्टि की तो तत्काल प्रभाव से इसे भी रद्द कर दिया गया था। 14 विभागों में लोअर सबऑर्डिनेट के पदों के लिए करीब 67 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। 2 सितंबर 2018 को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत ही नलकूप ऑपरेटरों की भर्ती के लिए होने वाला पेपर आउट हो गया था। इस मामले में यूपी एसटीएफ ने मेरठ से 11 लोगों को गिरफ्तार किया था।अगस्त 2021 में प्रीलिमिनरी एलिजिबिलिटी टेस्ट हुआ था। 75 जिलों में लगभग 70 हजार सीसीटीवी कैमरों से इस परीक्षा की निगरानी की जा रही थी लेकिन फिर भी पेपर आउट होने पर सभी के होश उड़ गए थे। 6 अगस्त 2021 को पहली शिफ्ट में बीएड परीक्षा का पेपर लीक होने की बात सामने आई थी। हालांकि सरकार ने जांच कराई तो यह पेपर लीक मामला फर्जी निकला था। 12 सितंबर 2021 को नीट एग्जाम होना था।

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लेकिन नीट परीक्षा से एक दिन पहले यानी 11 सितंबर 2021 को सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने का दावा किया गया था। हालांकि अधिकारियों ने पेपर लीक का खंडन करते हुए इसे फर्जी खबर करार दिया था। 28 नवंबर 2021 को यूपीटीईटी पेपर लीक होने की खबर सामने आने पर उसे भी रद्द कर दिया गया था। फिर यह परीक्षा 23 जनवरी 2022 को हुई थी। 17, 18 फरवरी वर्ष 2024 को उत्तर प्रदेश पुलिस बोर्ड की सिपाही भर्ती की भी परीक्षा लीक हुई ।जिसका मामला सोशल मीडिया में चर्चा में आया मामले ने जब तूल पकड़ा तो सरकार को भी कड़ा एक्शन लेना पड़ा और दुबारा परीक्षा आयोजित कराने का निर्णय लिया है।

हाल ही के कई वर्षों में हुई पेपर लीक की घटनाओं ने एक बात तो साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा माफियाओ का बोलबाला है। इन शिक्षा माफियाओं ने पेपर लीक करवाकर योगी सरकार के निष्पक्ष परीक्षा कराने के दावों की लचर व्यवस्था की पोल खोल दी है। अब तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं युवाओं को भरोसा ही नहीं रह गया है कि वह जिस चीज की परीक्षा दे रहे हैं वह निष्पक्ष परीक्षा हो रही है।

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