खेती मे अव्वल युवक को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित 

.....नगर पंचायत मोहनलालगंज के गौरा निवासी युवा शुभम द्विवेदी को प्रदेश के सीएम और राज्यपाल द्वारा मिला सम्मान

 खेती मे अव्वल युवक को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित 

.....सीएम से सम्मान पर बधाई वालो का लगा तांता

स्वतंत्र प्रभात 
....एमबीए करने के बाद नौकरी के बजाए,खुद की जमीन पर शुरू की कड़ी मेहनत
मोहनलालगंज/ लखनऊ
प्रदेशिक फल शाकभाजी एंव पुष्प प्रदर्शनी के दौरान अव्वल पैदावार के लिये नगर पंचायत मोहनलालगंज गौरा के युवा शुभम द्विवेदी को प्रदेश के सीएम और राज्यपाल द्वारा सम्मान मिला तो शुभम सहित घर वालो की खुशी का ठिकाना न रहा।वही इस सम्मान से गांव सहित इलाके के लोग अपने को खुशनसीब मान रहे है।यही वजह रोजना आसपास के किसान युवा शुभम के घर पहुचकर उन्हें बधाई देने के साथ खेती करने के गुर सीख रहे है।

गौरा के किसान प्रमोद द्विवेदी ने बताया उनके भतीजे शुभम को पाली हाउस की स्थापना कर ड्रिप सिंचाई एंव मल्चिंग तकनीकी के साथ रंगीन शिमला मिर्च एंव अन्य सब्जियों की जैविक खेती करके रिकार्ड उत्पादन एंव विक्रय कर सामान्य से दो तीन गुनी आमदनी करने के उपलक्ष्य में राजभवन में सीएम और राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया है।

कड़ी मेहनत और लगन से हासिल किया मुकाम-------

विकासखण्ड मोहनलालगज के गौरा गांव में रहने वाले किसान प्रमोद द्विवेदी बताते है कि पहले वो धान गेंहू सरसों की खेती किया करते थे।समय के साथ जब उन्होंने संसाधन जुटाए तो किसानी का तरीका बदला और धान गेंहू के साथ अन्य फसलों की खेती शुरू की जिसमे उनका हाथ भाई भतीजे बंटाते है।
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इसी बीच भतीजे शुभम ने बीएससी से एग्रीकल्चर कर अपनी एमबीए की पढ़ाई पूरी कर अपने खेतों में ही करने की ठानी और उसकी लग्न को देखकर दो हजार स्क्वायर मीटर लगभग 16 बिस्वा में पॉलीहाउस का निर्माण कराया जिसमे में सीजन के हिसाब से खेती करनी शुरू कर दी।इस समय पॉलीहाउस में हरा,लाल,पीला शिमला मिर्च शुभम ने लगा रखा है।जिसे राजधानी की बड़ी-बड़ी मंडियों में रोजाना स्वयं पहुचाकर आते है।

जिसके चलते केवल अकेले 16 बिस्वा के पॉलीहाउस से सालाना पांच लाख रुपये की आमदनी हो जाती जोकि आम फसलों में सम्भव नही है।साथ ही इसके लिये निरंतर मेहनत भी करनी पड़ती है।इसके साथ ही अन्य जमीनों पर गेहूं और धान मटर सहित सीजन के हिसाब से खेती कर सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच देते है।

किसान प्रमोद द्विवेदी बताते है कि उनकी फसलों को देखने के लिये अन्य गांव के किसान समय-समय पर आकर देखते और मशविरा लेते है।जिनसे हम यही कहते है कि खेती में अब समय है कि आप मौसमी फसलों के साथ कुछ भाग में अलग किस्म की फसले तैयार करे ताकि आपकी आमदनी बड़े और घर परिवार सहित आने वाली पीढ़ी तरक्की करें।जरूरी नही सब बच्चे पढ़कर अधिकारी ही बने पढ़े लिखे बच्चे भी अब अपनी ऊर्जा लगाकर अपनी ही जमीन में बड़े पैकेज वाली तनख्वाह कमा सकते है बस जरूत है मेहनत और लगन की।

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