वैश्विक देशों का भारत के प्रति तर्कसंगत राजनयिक विश्वास l

(विश्व युद्ध टालने और शांति बहाली में भारत की नई भूमिका)

वैश्विक देशों का भारत के प्रति तर्कसंगत राजनयिक विश्वास l

भारत के पांचवी आर्थिक शक्ति बनने के बाद इसराइल हमास के विनाशकारी युद्ध हमास का आतंकवादी चेहरा और इजरायल की बदला लेने की सनक के साथ रूस के तानाशाह व्लादिमीर पुतिन के परमाणु अस्त्रों के इस्तेमाल की यूक्रेन तथा यूरोपीय देशों के विरुद्ध धमकी ने अमेरिका, ब्रिटेन ,फ्रांस, कनाडा ,न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों को चिंता में डाल दिया हैl ऐसे में विश्व के देशों ने भारत की ओर आशा लगाकर भारतीय प्रधानमंत्री से यह उम्मीद की जा रही है कि भारत के प्रधानमंत्री इजरायल अमेरिका और फिलिस्तीन के साथ ईरान, इराक, सऊदी अरब के नेताओं के मध्य संवाद करवा कर शांति का रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे, दूसरी तरफ पुतिन को अपने पुराने संबंधों के चलते विश्व शांति का पाठ पढ़ा सकते हैंl भारत की विश्व में नई सामरिक तथा आर्थिक स्थिति अब पहले से ज्यादा कई गुना मजबूत हो गई है। अब भारत अपनी बात हर तरह से मनवाने में सक्षम भी हैl दूसरी तरफ इंग्लैंड की प्रधानमंत्री के सामने भारत से अपने मूल रूप से संबंध अच्छे करने की चुनौती भी है।


उज़्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन की अति महत्वपूर्ण बैठक में भारत ने अपनी नई दमदार विदेश नीति का आगाज किया है। भारत अब वो पुराना भारत नहीं रहा है। इस बात को दुनिया के सामने इस संगठन की बैठक में भारत ने बड़ी मजबूती के साथ रखा है। भारत की विदेश नीति के तहत भारत किसी एक मजबूत राष्ट्र का सहारा ना लेकर रूस और अमेरिका को एक ही तराजू में तौल रहा हैl भारत की नई कूटनीति तथा विदेश नीति की धमक अब स्पष्ट रूप से इस संगठन की बैठक में दिखाई दी हैl भारत में अपनी कूटनीति के चलते बैठक में उपस्थित चीन तथा पाकिस्तान को दरकिनार कर पूरे विश्व को समझा दिया है की चीन और पाकिस्तान दुनिया में अलग-थलग पड़ गए हैंl इसी तरह यूक्रेन के मामले में भारत में रूस के व्लादिमीर पुतिन को साफ साफ शब्दों में वैश्विक शांति की बातें समझाइ हैl अमेरिका को भी भारत में समझा दिया है की रूस और यूक्रेन मामले में वह अमेरिकी दबाव में ना आकर वाह रूस को मौन समर्थन देना नहीं छोड़ेगा औऱ इसके अलावा रूस से अपने व्यवसायिक रिश्ते बनाकर क्रूड आयल, डीजल तथा पेट्रोल की खरीदी निरंतर जारी रखेगाl उल्लेखनीय है कि भारत ने विगत 3 वर्षों से अपनी विदेश नीति कुछ इस तरह निर्धारित की है कि जिसमें बड़े राष्ट्रों पर केंद्रित न होकर वह हर राष्ट्र से संबंध बनाकर वैश्विक जगत में अपनी नई स्वतंत्र विदेश नीति का आगाज करने जा रहा हैl

 

आने वाले समय में भी भारत की विदेश नीति एवं भारतीय गणतंत्र एक नई विदेश नीति लेकर उभरेगा। भारत को संभवत शंघाई सहयोग संगठन और g20 तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद जैसे महत्वपूर्ण संगठनों में अध्यक्षता का अवसर भी मिलेगा क्योंकि आने वाले वर्ष में भारत वर्ष में ही शंघाई संगठन सहयोग और जी-20 की महत्वपूर्ण बैठक है आयोजित होने वाली हैं। जी 7 देशों में भी जर्मनी तथा कुछ अन्य देश इस समूह में भारत को शामिल करना चाहते हैं। इस तरह इन देशों के समर्थन से भारत जी 7 का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन सकता है। स्वतंत्रता के बाद से ही भारत ने अपने को स्वतंत्र विदेश नीति का पोषक बना कर रखा है और विगत वर्षों से भारत ने अपने को एक गुट निरपेक्ष राष्ट्र की तरह वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया है। रूस यूक्रेन युद्ध तथा ताजा ताजा चीन ताइवान तथा अमेरिकी द्वंद में भारत में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत एक अलग मध्यम मार्ग बनाए रखा है। रूस यूक्रेन युद्ध में अंतरराष्ट्रीय दबाव में न आकर भारत ने रूस की निंदा से परहेज कर अपने व्यापारिक संबंध रूस से बनाए रखे हैं एवं अमेरिकी दबाव से बाहर आकर भारत ने नाटो देशों का भी समर्थन नहीं किया है। यह घटना भारत की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में सामने आई है । भारत में इस संगठन की बैठक के दौरान यह स्पष्ट रूप से बता दिया है कि जो देश उसके साथ जिस तरह का व्यवहार करेगा

भारत उसे उसी तरह से जवाब देने में सक्षम है चीन को भी स्पष्ट रूप से भारत ने चेतावनी दी है कि यदि वह एल,ए,सी तथा लद्दाख में किसी भी तरह की दखलअंदाजी करेगा तो भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा एवं यदि वह दोस्ती की पहल करता है तो भारत दो कदम आगे आकर वार्ता में शामिल होने का तैयार है। भारत ने स्पष्ट रूप से रूस को यह समझा दिया है कि उसकी पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी रास नहीं आ रही है, इसी तरह अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को किसी भी तरह की सहायता दिए जाने का खुलकर विरोध करेगा। भारत ने अपनी विदेश नीति तथा कूटनीति को साफ कर दिया है ,वह जहां शंघाई संगठन का खास सदस्य है जो अमेरिका का घोर विरोधी माना जाता है दूसरी तरफ वह 5 देशों वाले मजबूत संगठन क्वाड का भी हिस्सा है जो स्पष्ट रूप से चीन का विरोधी संगठन माना जाता है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह देश के हितों के नफा और नुकसान देखकर अपने संबंध अन्य देशों से स्थापित करेगा। भारत वैश्विक स्तर पर विश्व के अनेक देशों से अपने अलग-अलग व्यवसायिक एवं राजनैतिक रिश्ते बनाने में विश्वास रखता है। भारत की स्वतंत्र विदेश नीति इस बात से भी स्पष्ट हो जाती है कि भारत g20 जैसे संगठन का सदस्य भी है जिसमें अमेरिका चीन जैसे परंपरागत घोर विरोधी अमेरिका तथा चीन भी अहम सदस्य हैं।

आने वाला वर्ष भारत की नई विदेश नीति और कूटनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इसलिए होने वाला हैं कि भारत जी 20 तथा शंघाई संगठन की मेजवानी कर अध्यक्षता करेगा और इन समूहों तथा बैठकों में अपने मनपसंद तथा मित्र देशों को बुलाने का अधिकार भारत के हाथ में ही होगा।ऐसे में भारत नए और मजबूत भारत के रूप में उभरेगा इसके अलावा भारत g20 देशों की बैठक में बांग्लादेश, नीदरलैंड ,मिश्र ,मॉरीशस ,संयुक्त अरब अमीरात ,नाइजीरिया ,ओमान, सिंगापुर और स्पेन को बुलाकर उनसे विचार-विमर्श करने की बहुत बड़ी तथा महत्वकांक्षी योजना बनाई है क्योंकि इन देशों के शामिल होने से भविष्य में एक नया परिदृश्य उभरने की संभावना बनती है। भारत में वैश्विक स्तर पर अपनी नई को अपनी तथा विदेश नीति के चलते एक नए भारत को दुनिया के सामने पेश करने की पेशकश की है। भारत में भविष्य देश के अंदर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उज्जवल होने की संभावना को एक नई दिशा मिलने की संभावना बन रही है।
संजीव ठाकुर ,स्तंभकार ,चिंतक, 

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