उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी, कलंक कथा 1 

जहाँ एक तरफ उत्तर प्रदेश की जनता इतनी गरीब है की 60% जनता को जीवित रखने के लिए मुफ्त अनाज वितरण की योजना चल रही है वही दूसरी तरफ भ्रष्ट आईएएस अधिकारी के विदेश में इलाज पर करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे है

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विशेष संवाददाता, स्वतंत्र प्रभात, लखनऊ 

भारतीय प्रशासनिक सेवा का पद सम्मान का पद होता है, लाखों का वेतन, भत्ते, गाड़ी, बँगला, नौकर चाकर, सुरक्षाकर्मी, अनेको सुख सुविधाओं के बाद भी आईएएस अधिकारी भ्रष्ट हो जाता है, बात करते है उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत त्रिवेदी की, जिनकी आयुष घोटाले में सीबीआई जांच शुरू हो चुकी है, पूरा मामला कुछ इस प्रकार से है वर्ष 2021-22 में आयुष कॉलेजों (राजकीय आयुर्वेद कॉलेजों) में यूजी-पीजी में दाखिले के लिए घोटाले में फसें तत्कालीन मंत्री धर्म सिंह सैनी, तत्कालीन अपर मुख्य सचिव प्रशांत त्रिवेदी सहित अन्य आला अफसरों पर घूस लेने का आरोप है। 

dharm singh saini

मामले की जांच कर रही यूपी एसटीएफ ने 8 गवाहों से पूछताछ की थी। इसमें ये बातें सामने आईं थी कि आरोप है कि मंत्री ने अपने बंगले पर एक करोड़ पांच लाख रुपए लिए। जबकि प्रशांत त्रिवेदी ने भी 25 लाख लिए। एसटीएफ ने इन बयानों को कोर्ट में भी सब्मिट किया। ये भी आरोप भी लगे थे कि घूस के पैसों की बंदरबांट निदेशक से लेकर सचिव व सेक्शन अफसर तक हुई।

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छात्रों को सीट आवंटन के नाम पर कॉलेजों से बड़ी राशि लिए जाने के भी आरोप हैं। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आयुष विभाग में फर्जी दाखिले की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। जांच के घेरे में पूर्व मंत्री धर्म सिंह सैनी और तत्कालीन अपर मुख्य सचिव आयुष प्रशांत त्रिवेदी हैं। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट की फटकार के बाद आईएएस प्रशांत त्रिवेदी को साइड में तैनाती दी गई है।

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उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के भ्रष्ट आईएएस अधिकारी, कलंक कथा-2

साल 2021-22 में काउंसिलिंग के लिए आयुर्वेद निदेशालय ने बोर्ड का गठन किया था। IT सेल न होने के कारण बोर्ड की निगरानी में निजी एजेंसी सॉफ्ट सॉल्यूशन को काउंसिलिंग का ठेका दिया गया। इस एजेंसी को अपट्रान पावरट्रानिक्स लि. ने नामित किया था। एक फरवरी 2022 से शुरू हुई काउंसिलिंग प्रक्रिया 19 मई तक 4 चरणों में पूरी की गई।

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प्रदेश के राजकीय और निजी कॉलेजों में 7338 सीटों पर एडमिशन हुए। काउंसिलिंग से लेकर ‌वेरीफिकेशन तक की जिम्मेदारी निजी एजेंसी की थी। दाखिलों के बाद सीट एलॉटमेंट भी कर दिया गया। 1181 छात्रों के रिकॉर्ड नीट काउंसिलिंग की मेरिट सूची से नहीं मिले। इनमें से 22 छात्र ऐसे थे जो नीट में शामिल ही नहीं हुए थे। 1181 में से 927 को सीट आवंटन किया गया था। इनमें से 891 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश ले लिया। आरोप है कि पांच-पांच लाख रुपए में बिना नीट काउंसिलिंग कराए ही सीटें बेची गई थी।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत त्रिवेदी प्रमुख  सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं भी रह चुके है, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं रहने के दौरान यह गंभीर रूप से बीमार पड़े थे और उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार ने नियम विरुद्ध जाकर विदेश में इनका इलाज कराने में उत्तर प्रदेश की गरीब जनता के करोड़ों रूपये खर्च कर दिए थे, इनके इलाज पर खर्च किये गए करोड़ों रूपये पर कई संगठनों ने विरोध दर्ज़ किया है और जांच की मांग भी कई बार की है,

, इन सब प्रकरणों को देखते हुए उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस पालिसी सिर्फ एक जुमला ही प्रतीत होती है I अगले शुक्रवार के अंक में उत्तर प्रदेश की उपयोगी सरकार के एक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के भ्र्ष्टाचार का खुलासा पढियेगा I

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