फसलों को ऊंचाई पर रखे खेतों से निकाल दे पानी 

फसलों को ऊंचाई पर रखे खेतों से निकाल दे पानी 

महोबा। जिले के तकरीबन दो लाख 34 हजार 152 हेक्टेयर में रवि फसल की बुवाई हुयी है, बहुत से खेतों से अनाज, दलहन व तिलहन की फसलें कट चुकी है, लेकिन अभी भी बहुत सी फसलें कटने के बाद खलिहानों में पड़ी हुयी है, अनाज की फसलें भी अभी बहुत से खेतों पर पककर तैयार नहीं हुयी है, और बहुत से स्थानों पर पक कर खड़ी है। ऐसे में यहां दो दिन से मौसम का मिजाज बेहद बदला हुआ है, रविवार को हुयी तकरीबन एक घण्टें की मूसलाधार बारिश और हल्के वजन ओले भी गिरे है, ऐसे में फसलों की नुकसान की संभावनाए खड़ी हुयी है।

कृषि विभाग का इस सम्बंध में कहना है, कि फसलों के नुकसान का आंकलन किया जा रहा है, स्थितियां एक दो दिन के बाद पूरी तरह से स्पष्ट होगी फिर भी उन्होंने काश्तकारों को सलाह दी है, कि जो फसलें कट गयी है, उन्हें ऊंचाई पर रखें और जिन खेतों पर पानी भर गया है, उन खेतों से पानी को बाहर निकाल दें इस तरह की हिकमत और प्रयास से फसलों को खराब होने से बचाया जा सकता है, कृषि विभाग का कहना है, कि मौसम अभी पूरी तरह से साफ नहीं हुआ है, मंगलवार को भी विभाग ने बारिश होने की संभावनाए व्यक्त की है।

फसलों को बचाने के लिए किसान अभी उनकी हार्वेस्टिंग न करायें उन्हें एक दो दिन धूप में ही खड़ा छोड़ दें ऐसा करके फसलों को बचाया जा सकता है। हालांकि सरसों पक गयी है, ऐसे में उसको नुकसान हो सकता है, हार्वेस्टिंग के समय इनकी फली गिर जायेगी।  

कुल मिलाकर बीते कुछ सालों से एन फसल कटाई के वक्त किसानों को इस तरह की दैवीय आपदाओं का सामना करनें को मजबूर होना पड़ रहा है, और जिसके चलते उनके सामनें आर्थिक समस्याए उत्पन्न हो रही है, अबकि बार किसान खेतों में रवि की लहलहाती फसलों को देखकर बेहद खुशी से फूला नहीं समा रहा था, समय पर कटाई और मढ़ाई का काम शुरू कर दिया था, लेकिन अभी भी जिले के एक बहुत बड़े रकबे में कटाई व मढ़ाई का काम बाकी रह गया था, बहुत सी फसलें कटने के बाद खेतों पर पड़ी थी, ऐसे में बीते दिन हुयी जोरदार बारिश फसलें पानी से तरबतर हुयी है, जिसे देखकर किसान माथा पीट रहा है। 

दो लाख 34 हजार हेक्टेयर में बोयी गयी रबि की फसल 
महोबा। जिले के किसानों का पूरा जोर रवि की फसल पर ही रहता है, और अबकि बार जिले में दो लाख 34 हजार हेक्टेयर से अधिक भू-भाग में इसकी बुवाई की गयी थी, 77 हजार 311 हेक्टेयर में अनाज की फसल बोयी गयी थी, एक लाख 34 हजार 616 हेक्टेयर में दलहन की फसल बोयी गयी थी, और 22 हजार 25 हेक्टेयर में तिलहन की फसल बोयी गयी थी, यह सारी फसलंे अबकि बार अच्छी तरह की उत्पादित होने का अनुमान लगाया जा रहा था, बेहतर उपज देखकर किसान भी खुश दिखाई पड़ रहा था, लेकिन मौसम के बिगड़े मिजाज ने किसान की खुशियों को काफूर करने का काम किया है। 

फिर साल भर तक खाली पड़े रहते है खेत 
महोबा। पानी का उत्तम बंदोबस्त न होने के कारण यहां का किसान रबि की फसल ही बा मुश्किल तमाम हासिल कर पाता है, जायद व खरीफ की फसलें यहां का किसान नहीं कर पाता है, जायद और खरीफ की फसलें इक्का-दुक्का क्षेत्रों में ही भगवान भरोसें की जाती है, सिंचाई के उत्तम संसाधन उपलब्ध न होने के कारण रबि फसल के बाद यहां के खेत लगभग साल भर तक खाली ही पड़े रहते है, यही वजह है कि यहां का काश्तकार सिर्फ एक फसल के भरोसे ही शिक्षा, शादी समारोह, समेत अनेक काम बेहतर उपज आने के बाद ही सम्पन्न कर पाता है, लेकिन बीते कई सालों से मौसम उसके अरमानों पर पानी फेरने का काम करता आ रहा है।  

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