अधिकारी व कर्मचारी वर्ग चला बसपा के साथ: ओपीएस इन्द्रा साहेब

अधिकारी व कर्मचारी वर्ग चला बसपा के साथ: ओपीएस इन्द्रा साहेब

कु0 मायावती ने अपने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस व आगरा से शुरू हुई उत्तर प्रदेश आमचुनाव-2022 की चुनावी जनसभा में अधिकारी-कर्मचारी वर्गों की सारी वाज़िब माँगों जिसमे ओपीएस भी शामिल है को एक आयोग बनाकर लागू करने का ऐलान किया है


लखनऊ। बहनजी ने देश व प्रदेश की आम जनता, किसानों, फौजियों, गरीबों, बेरोजगारों, अकलियतों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, महिलाओं, विधवाओं, विद्यार्थियों, विकलांगों और मेहनतकश वर्गों व मजदूरों की जरूरतों एवं उनकी वाजिब माँगों को ध्यान में रखते हुए उनकी आवाज़ बनकर भारत के फलक पर गूँजती रहीं हैं। साथ ही देशवासियों के मान-सम्मान व स्वाभिमान का पूरा ख्याल रखते हुए उत्तर प्रदेश में संविधान सम्मत शासन देकर आमजनता के साथ-साथ अधिकारी-कर्मचारी वर्गों व उनके हितों का पूरा ख्याल रखा हैं और उनकी वाजिब माँगों को पूरा किया अधिकारी-कर्मचारी वर्गों के हितों व हक़ों की तरफ गौर करें तो हम पाते हैं कि जहाँ यूरपीय देशों ने अपने नागरिकों की सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने का मानवीय कार्य किया है वहीँ 2004 के दौरान भारत में अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा की केंद्र सरकार और मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने सरकारी अधिकारी-कर्मचारी वर्गों की पेंशन ओपीएस को ख़त्म करके उनके साथ अन्याय किया है और उनकी सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा जो कि एक वेलफेयर स्टेट के नागरिकों का मूलभूत अधिकार है को तार-तार करने का निन्दनीय व अमानवीय कार्य किया है अधिकारी-कर्मचारी वर्गों के हक़ों व हितों को ध्यान में रखते हुए बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्षा संसद के दोनों सदनों की कई बार सदस्य व उत्तर प्रदेश की चार-चार बार मुख्यमन्त्री रहीं बहन कु0 मायावती ने अपने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस व आगरा से शुरू हुई उत्तर प्रदेश आमचुनाव-2022 की चुनावी जनसभा में अधिकारी-कर्मचारी वर्गों की सारी वाज़िब माँगों जिसमे ओपीएस भी शामिल है को एक आयोग बनाकर लागू करने का ऐलान किया है अधिकारी-कर्मचारी वर्गों का बहनजी व बसपा में शुरू से ही विश्वास रहा है। यही वजह है कि महीनों पहले अधिकारी-कर्मचारी वर्गो के तमाम संगठन बहनजी से मिलकर बहनजी को अपनी समस्याओं से अवगत कराया है जिसमे ओपीएस भी शामिल है। बहनजी ने उनकी मांगों को आयोग बनाकर मान लेने का आश्वासन दिया था जिसमें ओपीएस प्रमुख हैं अधिकारी-कर्मचारी वर्गों का बसपा व बहनजी में दृढ़ आस्था व अटूट विश्वास को देखते हुए सपा खेमे में खलबली मच गयी। इसलिए आनन-फानन में सपा ने अधिकारी-कर्मचारी वर्गों की अन्य सभी महत्वपूर्ण माँगों को किनारे कर ओपीएस को लागू करने की बात कह दी जबकि ओपीएस को उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार ने ही खत्म किया था। ध्यान देने योग्य है कि भाजपा की तरह सपा भी जुमलों की बदौलत ही चुनाव मैदान में है। इसलिए अधिकारी-कर्मचारी वर्गों की अन्य सभी महत्वपूर्ण माँगों को किनारे कर सपा ने सिर्फ और सिर्फ ओपीएस जो कि चुनावी समर में ज्यादा लुभावना व वोटारू है को लागू करने की बात कह दी जबकि बसपा ओपीएस समेत सभी वाज़िब माँगों को लागू करने की पैरवी शुरू से ही कर रही हैं जिस पर अधिकारी-कर्मचारी वर्गों को पूर्ण भरोसा है क्योंकि बहनजी जो कहती हैं उसे जरूर पूरा करती हैं। सपा अधिकारी-कर्मचारी वर्गों को गुमराह करने व लुभाने के लिए जब जुमलेबाजी पर उतर आयी तो पुरानी पेंशन व्यवस्था ओपी एस लागू करने की अपनी मंशा को बहनजी ने पुनः १२.०२.२०२२ को औरैया की जनसभा में स्पष्ट तौर पर चिन्हित कर दिया है। दुनिया जानती है कि बसपा कहने में कम और कार्य करके दिखने में ज्यादा विश्वास करती हैं। इसलिए बसपा ज्यादा एडवर्टाइज नहीं करती जिसका उसे कभी-कभी नुक्सान भी उठाना पड़ता हैं। प्रचार कम करने की वजह से लोग उसके एजेण्डे व मुद्दे को अपना बताकर प्रचार करने लगते हैं जैसा कि ओपीएस के संदर्भ में सपा कर रही है। देश की जनता को बहनजी की बातों व कार्यप्रणाली पर सदा से ही पूर्ण भरोसा रहा है जो कि उनके पिछले कार्यकाल उनकी वैचारिकी व कार्यशैली से साबित हो चुका है। इसलिए उत्तर  प्रदेश विधानसभा आमचुनाव-२०२२ में उत्तर प्रदेश की जनता के साथ-साथ उत्तर प्रदेश का अधिकारी व कर्मचारी वर्ग खुले तौर पर बसपा को वोट कर रहा है क्योंकि वह जानता है कि ऐसे साहसिक व ऐतिहासिक निर्णय सिर्फ और सिर्फ बहनजी ही ले सकतीं है रही बात सपा व भाजपा की तो अटल बिहारी भाजपा ने केंद्र में और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव सपा ने पुरानी पेंशन प्रणाली ओपीएस खत्म की थी। अखिलेश यादव ओपीएस को लागू नहीं कर सकते हैं। इसकी दो प्रमुख वजह है। 

पहली अखिलेश की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। दूसरी २०१२-२०१७ के कार्यकाल से स्पष्ट है कि अखिलेश यादव में साहसिक निर्णय लेने की क्षमता का अभाव है। फलत: अधिकारी व कर्मचारी वर्ग अखिलेश यादव पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करता है। रही बात भाजपा की तो भाजपा पूंजीपतियों की पार्टी है। भाजपा सदा से अधिकारी व कर्मचारी विरोधी पार्टी रही है। इसलिए वह एकमुश्त निजीकरण में विश्वास रखतीं है और आये दिन सरकारी अधिकारी व कर्मचारी वर्ग में अपने अविश्वास को जाहिर करती रहती है। इसलिए भाजपा पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करने के बारे में सोच ही नहीं सकती है। ओपीएस के अलावा आमजन की तरह ही अधिकारी व कर्मचारी वर्ग अपने कार्यालयों में सपा व भाजपा के गुण्डो की गुण्डागर्दी के बजाय मान-सम्मान चाहता है जो कि कानून द्वारा कानून के राज में निहित है और कानून द्वारा कानून का राज सिर्फ और सिर्फ बहनजी ही स्थापित कर सकतीं हैं। अतः उत्तर प्रदेश की आम जनता के साथ-साथ उत्तरप्रदेश का नौकरी पेशा वर्ग जिसकी तादात लम्बी है प्रभाव क्षेत्र वृहद है एकमुश्त बसपा को वोट कर रहा है। साथ ही बसपा ने सर्वसमाज की समुचित भागीदारी को सुनिश्चित करने में सामाजिक समीकरणों व राजनैतिक क्रमचय-संचय को बहुत बारीकी से क्रियान्वित किया है। इसलिए बसपा पूरी तैयारी व दमदारी के साथ सत्तशीन होने वाली है। साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा आमचुनाव-२०२२ में उत्तर प्रदेश के वोटर के रूख से स्पष्ट है कि भाजपा को भारी नुकसान तो होगा ही परन्तु सपा दफ़न हो जायेगी।

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