शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाए उत्तर प्रदेश सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार की प्रत्येक भर्ती किसी ना किसी पेंच से कोर्ट में फंस जा रही और फिर राज्य सरकार की किरकिरी करा रही । उत्तर प्रदेश के युवा काफी नाराज है , सरकार को प्राथमिक तौर पर शुरू से लेकर अब तक के सभी भर्तियों  को पुनः शुरू करने की जरूरत है ।

सरकार को शुरआत 2012 के 72000 वाले नए एड को शुरू कर के तत्काल ओवर एज हो रहे अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से करना चाहिए । फिर 13000 वाली नियुक्ति पर पेटिशन डालकर उसे निस्तारित कराए । 15000 और उच्च प्राथमिक की 29000 विज्ञान वाले  रिक्त पदों को भी तत्काल भर कर 68500 और अभी हाल ही में स्थगन से प्रभावित हुए 69000 को निस्तारित करे ।

मेरा मानना है कि योगी जी , अगर सही समय पर पुरानी भर्तियों को निस्तारित नहीं करवाए तो आने वाले समय में कोई भी नई भर्ती सुचारू रूप से पूर्ण नहीं होगी और बेरोजगार युवाओं के धरने और आक्रोश का दंश जो झेलेंगे सो अलग ।2011 में प्रस्तावित 72000 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती कई पचड़ों में फंस के रह गई ,और तात्कालिक मायावती सरकार ने बेरोजगार युवाओं से केवल राजस्व कमाया ।

किन्तु ठीक उसी समय नए एड जो कि उस समय के समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी द्वारा पुनः 72000 की नए और न्यायसंगत नियमों से लाई गई उसपर काम शुरू किया  । वो कोर्ट ने भी सही माना और आज भी वो कोर्ट में जीवित है । योगी सरकता यदि समय रहते वो भर्ती पूर्ण करा दे तो मेरे हिसाब से आधी संकट खत्म हो जाए ।यदि  समय रहते वर्तमान सरकार कोर्ट में अपील लगाती तो वो पुरानी भर्ती जो कि पूरी भर्ती प्रक्रिया के ट्रेन का इंजन है ,

पटरी पर आ जाती और जो लोग थोड़ी थोड़ी कमियों पर खुन्नस में कोर्ट चले जा रहे वो सब नौकरी में रोजगार पाकर अड़नगेबाजी बन्द कर देते और युवाओं का भविष्य सुरक्षित होना शुरू हो जाता जो रोज चंदो ,बेरोजगारी धरनों और राजनीति की भेट चढ़ रही ।उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् की अदूरदर्शिता और संवेदनहीनता के शिकार हुए बेरोजगार अब भी 2012 के उस नए एड के लिए संघर्षरत है और अभी हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी।

दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने सहायक शिक्षकों के घोषित परिणाम में कुछ प्रश्नों की सत्यता पर सवाल उठाए थे। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई, 2020 को होगी। भर्ती को लेकर काउंसलिंग शुरू हुई थी, लेकिन इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है, अब यू0जी0सी0 के चेयरमैन से इस मामले में राय लेकर आगे फैसला लिया जाएगा, यू0जी0सी0  आपत्तियों का निस्तारण करेगी

यह आदेश जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने दर्जनों याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करके जारी किया। इससे पहले हाईकोर्ट ने 1 जून, 2020 को अपना आदेश सुरक्षित किया था, जिसे आज सुनाया गया। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को विवादित प्रश्नों पर अपनी आपत्ति एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को उत्तर प्रदेश सरकार यू0जी0सी0 को भेजेगी और यू0जी0सी0 आपत्तियों का निस्तारण करेगी। अगली सुनवाई 12 जुलाई, 2020 को होगी। 


दरअसल उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् को माननीय उच्च न्यायालय में 2012 के नए एड समेत अन्य सभी लम्बित याचिकाओं के निस्तारण के बाद ही काउंसलिंग कराना चाहिए था। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् द्वारा अति आत्मविश्वास और जल्दबाजी में लिए गये काउंसलिंग के निर्णय से अभ्यर्थियों की कितनी दुर्दशा हो रही है। जब अभ्यर्थियों को जानकारी हुई कि उनकी काउंसलिग किस तिथि को निर्धारित है, तो कितनी कठिनाई से अभ्यर्थी काउंसलिंग के लिए चार-पांच सौ किलोमीटर तक की यात्रा करके काउंसलिंग सेण्टर पहुंचे।

आज, जबकि यात्रा के कोई नियमित सााधन नहीं है, कितनी परेशानी अभ्यर्थियों को उठानी पड़ी, इसका अन्दाजा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् को नहीं है। ऐसा लगता है कि प्रशासनिक अमला पूरी तरह संवेदनहीन और विवेकहीन हो गया है। जब कई नियुक्ति -प्रक्रिया माननीय उच्च न्यायालय में लम्बित है, तो सबसे पहले उसका निस्तारण कराना चाहिए था, न कि युवाओं को ऐसी विवेकहीन भर्तियों में फंसाकर दुर्दशा का शिकार बनने के लिए मजबूर करना चाहिए था। यह बहुत ही दुःखद पहलू है , और राजस्व बढ़ाने की चाल भी । उत्तर प्रदेश सरकार इन भर्तियों से राजनीतिक रूप से भी प्रभावित होती रहेगी । सरकार शुरुआत से अब तक के सारे भर्तियों का निस्तारण शीघ्र कराएं ।

पंकज कुमार मिश्रा