उन्नाव की सड़कों पर आवारा गौवंशों का लगातार जारी आतंक, जिम्मेदार मौन

पशुपालन विभाग का दावा आवारा पशुओं को संरक्षित करना हमारा काम नही

उन्नाव की सड़कों पर आवारा गौवंशों का लगातार जारी आतंक, जिम्मेदार मौन

किसान आवारा पशुओं से हो चुका परेशान

 

मो.अरमान विशेष संवाददाता

उन्नाव।

वर्षों से किसान के लिए आवारा गौवंश एक बड़ी समस्या बन चुकी है। क्या दिन क्या रात हर समय किसान आवारा जानवरों को लेकर परेशान है। सरकार भी इनको संरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठा रही है। करोड़ों रुपए सरकार संबंधित विभाग को भेजकर आवारा जानवरों को संरक्षित कराने का कार्य करने के आदेश पे आदेश जारी करती है। पर जिम्मेदारों ने जनपदों में कई हजार जानवर गौशालाओं में संरक्षित किए जा चुके है ऐसा बताते नजर आते हैं।

जिसके कागज संबंधित विभाग के लोग दिखाकर खुद ही अपनी पीठ थपथपाते नजर आते हैं। लेकिन असलियत बिल्कुल इसके परे है। यदि आप शहर के अंदर किसी भी सड़क पर चले तो जरा संभलकर चले क्योंकि यहां सड़क पर आपके सामने कब आवारा जानवर आ जाय इसका कोई भरोसा नहीं है। हो सकता है उस दुर्घटना में आपकी जान भी चली जाए। इसलिए आप जब भी सड़क पर चले तो अपना बचाव खुद ही करें क्यों कि यहां जिम्मेदारों का कहना है कि मुख्य सचिव ने हमसे हमारी जिम्मेदारी छीनकर और लोगों में बांट दिया। अगर बात की जाए पूर्व की तो पूर्व में भी शहर के बुरे हाल रहे हैं।

उन्नाव की सड़कों पर आवारा गौवंशों का लगातार जारी आतंक, जिम्मेदार मौन

आवारा जानवरों से किसानों को मुक्ति नही मिल पा रही है। कहने को जनपद में सैकड़ों गौशाला हैं लेकिन बात की जाए उनमें संरक्षित जानवरों की तो गांवों में बने अधिकतर गौशालाओं में जानवर है ही नही। जब भी कोई जिम्मेदार जांच करने जाता है तो उसी रात गांव के सभी आवारा जानवर पकड़वाकर गौशाला में बंद कर दिए जाते हैं। जांच कर कोरम पूरा होने के बाद पुनः जानवर छोड़ दिए जाते हैं। किसान ठिठुरती ठंड हो या मुंह जला देने वाली गर्मी सभी मौसम की मार झेलता हुआ आवारा जानवरों से अपने खेतों की रखवाली करने को मजबूर है। उसकी कोई सुनने वाला नहीं है। जिम्मेदार एयर कंडीशन लगे कार्यालयों में विराजमान है। और कागज पर कोरम पूरा कर अपनी पीठ खुद ही थपथपाते नजर आते हैं।

जानवर संरक्षित करने के नाम पर पूरे देश और प्रदेश में जिम्मेदार विभाग अपनी रैंकिंग गिनाता नजर आता है। शहर के कासिफ अली सराय में शीतला मंदिर गेट के सामने रात दिन आवारा जानवरों का डेरा रहता है, पाली खेड़ा मैदान में जानवरों का झुंड अक्सर दिखाई देगा, कासिम नगर तारिक शाह के मैदान में आवारा जानवरों का बड़ा हुजूम दिखेगा। कानपुर लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पडरी चौराहे पर भी जानवरों के झुंड से आपका सामना हो सकता है। दही चौकी तिराहे के इर्द गिर्द भी देखकर निकलना पड़ेगा, बड़ा चौराहा एसबीआई मुख्य शाखा, छोटा चौराहा, एबी नगर, गांधी नगर तिराहा, जिला अस्पताल, भूरी देवी मंदिर, कल्याणी देवी, भरत मिलाप मैदान आदि किसी भी मोहल्ले या सड़क मैदान में आप जायेंगे

तो आपको पहले आवारा जानवरों से निपटना होगा। अभी कुछ दिन पूर्व सफीपुर से एक खबर की चर्चा थी कि एक व्यक्ति को आवारा सांड ने पटक दिया जिससे उसकी जान चली गई। ऐसे ही कई दुर्घटनाएं हो चुकी है लेकिन जिम्मेदार इससे भी सबक नही लेते और मौन है। जनता के नौकर जनता के ही काम नहीं आ रहे।

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