पत्रकारिता को बदनाम करती फर्जी पत्रकारों की टोली, ऑडियो वायरल

पत्रकारिता-के-नाम-पर-पूरे-देश-में-एक-लचर-व्यवस्था-कायम-हो-गई-है-जिसका-खमियाजा-आम-जनता-के-साथ-शासन-प्रशासन-को-भी-भुगताना-पड़-रहा-है।
पत्रकारिता-के-नाम-पर-पूरे-देश-में-एक-लचर-व्यवस्था-कायम-हो-गई-है-जिसका-खमियाजा-आम-जनता-के-साथ-शासन-प्रशासन-को-भी-भुगताना-पड़-रहा-है।
  • स्वतंत्र प्रभात
    (विशेष संवाददाता)

त्रिवेणीगंज, (सुपौल)। पत्रकारिता के नाम पर पूरे देश में एक लचर व्यवस्था कायम हो गई है जिसका खमियाजा आम जनता के साथ शासन -प्रशासन को भी भुगताना पड़ रहा है।वह निर्णय नही ले पा रहे है कि वास्तविक पत्रकारिता और दिखावटी पत्रकारिता में अंतर क्या है?

जी हां इन दिनों जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र में फर्जी यूट्यूब चैनल वाले पत्रकारों की भरमार कुछ ज्यादा ही हो गई है।उनके कारनामों से लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया इन दिनों तार-तार होता जा रहा है।

सुबह से ही बैग टांगे निकल जाते है जैसे कि बड़े लाइव कवरेज में जा रहे है यह तथाकथित पत्रकार लोगों को बड़े-बड़े बोल बच्चन देते है।ताजा मामला त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जहां विगत दिन मचहा गांव में अज्ञात वाहन की ठोकर से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

सूचना पर स्थानीय थाना पुलिस भी घटना स्थल पर पहुंची लेकिन ग्रामीणों ने पोस्टमार्टम तो दूर कुछ बताने से भी इंकार कर दिया।वही गांव के पंचायत समिति सदस्य विनोद कुमार को एक तथाकथित पत्रकार ने फोन कर अपने व टोली के साथी पत्रकार को मैनेज करने की बात कह रहे है।

फोन कॉल (ऑडियो)की रिकॉर्डिंग शोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जो कि आमजनमानस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।अनुमंडल क्षेत्र में फर्जी पत्रकारों की बढ़ती तादात ने पत्रकारिता छवि को धूमिल कर दिया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के हवाले से इसमें हैरानी का विषय यह है कि अपने स्वंयभू पत्रकार घोषित करने वालो पत्रकारों की शैक्षिणकता पर ही प्रश्न चिन्ह नही बल्कि इनकी कार्यशैली भी संदेह के घेरे में रहती है।

वर्तमान स्थिति यह हो गई है कि नॉन -प्रोफशनल फर्जी पत्रकारों ने जनता और प्रशासनिक अधिकारियों को इस तरह से भ्रमित कर दिया है कि वह सही और गलत का अनुमान नही लगा पा रहे है।

उन्हें इस बात का अंदाजा भी नही की वह इन फर्जी पत्रकारों के भ्रमजाल में फसता जा रहा है।शहर में कोई भी अछूता नही है जिन्हें इन फर्जी पत्रकारों ने परेशान नही किया हो अवैध कमाई का जरिया बना चुके पत्रकारिता को इनके द्वारा बदनाम किया जा रहा है।

फर्जी पत्रकार बन अपना धंधा चला रहे हैं, जिसके कारण वास्तविक पत्रकार बदनाम हो रहे है। फर्जी पत्रकार ज्यादातर सरकारी कार्यालयों व थानों के इर्द गिर्द घूमते हैं तथा किसी भी परेशान व्यक्ति को देख उसे लपक लेते हैं तथा काम कराने के नाम पर मोटी रकम ऐंठ खिसक लेते हैं।

यही नहीं व्यापारियों व उद्यमियों को भी बिना वजह परेशान करते हैं। कहा तो ये भी जाता हैं कि पत्रकारिता की आड़ में यह लोग अधिकारियों को भी गुमराह करते है तथा पत्रकारिता के सम्मान जनक पेशे को बदनाम करने में लगे हैं।

लोगों से अवैध वसूली कर रहे यह लोग पत्रकारिता के स्तर को निम्न करने में लगे हुए है जिसका खमियाजा सही और प्रोफेशनल पत्रकार भुगत रहे है।अब देखना यह है कि इस तरह के फर्जी पत्रकारों के जमावड़े के रोकथाम के लिए प्रशासन किया कर सकता है।