नागरिक जिम्मेदारी

सुविधाएँ बढ़ीं, बजट बढ़ा, फिर भी व्यवस्था वहीं क्यों?

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” शिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं, स्कूल में शिक्षक नहीं, सड़क पर रोशनी नहीं, कार्यालय में कर्मचारी नहीं। लेकिन सवाल हो कि जो है, वह काम कर रहा है या...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

अधिकारों की तुलना में कर्तव्य और जिम्मेदारियां के प्रति हम ज्यादा अनभिग्य

महात्मा गांधी ने कहा था कि “अधिकारों का वास्तविक स्रोत कर्तव्य है, यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो अधिकार अपने आप मिल जाएंगे,” भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन का प्रश्न...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

शहर की सेहत ठीक नहीं—हमारी आदतें इसका रोग हैं

शहरों की असल तस्वीर उनकी ऊंची इमारतें नहीं, बल्कि बिखरी हुई नागरिक आदतें बयान करती हैं। भागती सुबह में उड़ता कचरा, लाल बत्ती को रौंदती गाड़ियां, फुटपाथों पर जमे वाहन और सार्वजनिक स्थानों के प्रति बेपरवाही—ये सब...
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