अदालतों में लंबित मामले

गरीबों के हिस्से में कानून और अमीरों की झोली में न्याय

संविधान की चौखट पर बराबरी का वादा, लेकिन अदालत की दहलीज पर आर्थिक हैसियत क्यों बन जाती है इंसाफ का पैमाना? भारत का संविधान कहता है कि कानून की नजर में सभी नागरिक बराबर हैं। लेकिन जब यही कानून अदालतों,...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

संपादकीय पेज के लिए आलेख 

अंतर्राष्ट्रीय दबाव बेरोजगारी असमानता से जूझती आज़ादी !     मनोज कुमार अग्रवाल     इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक...
आपका शहर  पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश