अवैध कब्जा, अतिक्रमण, ट्रैफिक व्यवस्था पर सरकार की चुप्पी ने शहर को बनाया बंधक देखिये नाकामी की 11 तस्बीर

अवैध कब्जा, अतिक्रमण, ट्रैफिक व्यवस्था पर सरकार की चुप्पी ने शहर को बनाया बंधक देखिये  नाकामी की 11 तस्बीर

 

 संवाददाता हर्षित मिश्रा खास रिपोर्ट
ये है मुख्य बिन्दु : 
1 सड़क आदि इलाकों में आवारा पशुओं का रहता है जमघट
2 ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ने मे टेंपो और ई-रिक्शा वालों का बड़ा हांथ
3 शहर की हालत ऐसी है, कि लगातार सड़कों पर लगा रहा है जाम
4 फुटपाथ व रोड पर धडल्ले से जारी है कबाड़ मार्केट का अवैैध गोरखधंधा
5 प्राइवेट वाहन भी खड़ा करके सवारियां भर कर यातायात व्यवस्था को कर रहे हैं चौपट
6 सवाल उठता है कि क्या कर रही है जिले की ट्रैफिक पुलिस
7 ये है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का हाल

ये है उत्तर प्रदेश कि राजधानी लखनऊ का हाल

शहर में अतिक्रमण और सफाई दो समस्याएं हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर के अधिकतर इलाकों में अतिक्रमण की वजह से सड़कें सिकुड़कर पतली हो गई हैं। इससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। 

कई बार तो पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। दुकानों के आगे फैला सामान और उनके आगे लगे ठेले-फड़ वाले सड़क घेरे रहते हैं। कुछ इलाकों में अवैध रूप से दुकानें लगी रहती हैं। 

अतिक्रमण के अलावा शहर की हालत अस्थायी स्टैंडों ने बिगाड़ रखी है तो रही सही ट्रैफिक व्यवस्था टेंपो और ई-रिक्शा वालों ने बिगाड़ दी है। जहां मन में आता है, वहीं अपना वाहन रोक लेते हैं। 

चाहे कितना जाम लगा हो, जहां चाहते हैं वहीं से ई-रिक्शा मोड़ लेते हैं। सवारियां सड़क पर ई रिक्शा लगाकर बैठाते हैं। पीछे लाइन में कितने वाहन लगे हैं। इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता। शहर में जाम लगने का मुख्य कारण यही है। 

शहर के बीच कई दूध की डेयरियां चल रहीं हैं। यहां पाले जाने वाले पशु दिन में खोल दिए जाते हैं। जो शहर के मार्गों पर जहां-तहां घूमते रहते हैं। शहर के फैज्जुलागंज का तो सबसे बुरा हाल है।

यहां सड़क के दोनों ओर पशु बंधे रहते हैं। वहीं सड़क आदि इलाकों में आवारा पशुओं का जमघट रहता है। यह पशु बीच रोड पर ही बैठ जाते हैं। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए कई बार शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा चुका है।

इनमें कई स्थान ऐसे हैं, जहां एक नहीं, बल्कि कई बार अभियान चलाया गया। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं आया। आज शहर की हालत ऐसी है, कि लगातार सड़कों पर जाम लग रहा है। जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है। 

इन स्थानों पर लगता है जाम 

इस समय शहर में सबसे बुरी हालत टेंढीपुलिया चौराहा से लेकर खुर्रमनगर से आगे चलते पॉलिटेक्निक चौराहा तक की है। यहां एक अ​स्पताल और मॉल की वजह कभी भी जाम लग जाता है। इनके बाहर वाहन खड़े रहते हैं। जिससे निकलना दूभर हो जाता है। कुछ आगे खुर्रमनगर मंदिर के पास मैजिक वाहनों की लाइन लम्बी कतारें लगी रहती है। 

वहीं निशातगंज क्रासिंग/रोड, सिकन्दरबाग, हजरतगंज, वार्लिंटन चौराहा से चारबाग, आईटी चौराहा से हनुमानसेतु, खदरा बाजार से लालपुल, नक्खास, राजाजीपुरम, लालबाग, कैसरबाग, आलम्बाग, अशियाना, कचहरी तिराहा, लालपुल तिराहा आदि स्थानों पर आए दिन जाम लग जाता है। 

सड़कों पर ही चल रहा कबाड़ करोबारियों का बाजार

शहर के सीतापुर केशव नगर मोड़ से लेकर के सामुदायिक केन्द्र तक लाइन से अवैध कबाड़ मार्केट व अन्य का गोरखधंधा धडल्ले जारी है। कबाड़ की कई दुकानें हैं। इन दुकानों में मरम्मत का कार्य सड़कों पर होता है।

यहां आने वाले वाहन सड़क पर खड़े रहते हैं। ट्रक, ट्रॉली का निर्माण भी सड़कों पर होता हैं। इस वजह से सड़क का अधिकतर हिस्सा घिर जाता है। इधर से गुजरने वाले वाहनों की रफ्तार कम हो जाती है। रास्ते में कोई वाहन आ जाए तो जाम भी लग जाता है। 


हार्डवेयर कारोबारियों की मनमानी से रोड में लगता है जाम 

शहर की अधिकतर बिल्डिंग मैटेरियल की दुकानों का सामान सड़क तक फैला है। जी हां बता दे कि, टेंड़ीपुलिया से खुर्रमनगर चौराहे तक बि​ल्डिंग मैटेरियल (हार्डवेयर), फर्नीचर व अन्य बड़े बड़े शोरूम का सामान पुरी रोड घिरी रहती है, इसी तरह निशातगंज, अलीगंज और जानकीपुरम मार्ग पर कई दुकानें चल रहीं हैं। जिनका सामान सड़कों पर बिक रहा है। 

अखिर कब सुधरेंगे रोडवेज स्टैंड के हालात

रोडवेज स्टैंड के बाहर जाम नहीं लगे इसके लिए पुलिस और एआरटीओ कई बार अभियान चला चुके हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग भी हुई थी। इसके बावजूद सड़क पर बसें लगा कर सवारियां भरी जा रही हैं। रोडवेज चौराहे पर प्राइवेट वाहन भी खड़े रहते हैं और सवारियां भर कर यातायात व्यवस्था को चौपट कर रहे हैं। 

क्या कहते हैं शहरवासी
शहर की हालत ऐसी है कि पता नहीं कब जाम लग जाए। इससे सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को होती है। उन्हें बाजार जाने के लिए कई मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं। कभी-कभी पैदल निकला मुश्किल हो जाता है। इसके लिए टेंपो और ई-रिक्शा वालों को कंट्रोल किया जाए। तभी सही रहेगा। 
-प्रि​ती यादव, निशातगंज
शहर में निकलते समय ऐसा लगता है कि टेंपो और ई-रिक्शा वालों को ट्रैफिक नियमों का कोई ज्ञान ही नहीं है। मन में आता है, वहीं रोक देते है। जाम लगा देते हैं। इससे सबसे बड़ी परेशानी पीछे आने वालों को होती है। 
सूरज सिंह, नक्खास
शहर में जाम लगना कोई नई बात नहीं है। यहां तो रोज आते हैं और रोज परेशान होते हैं। परंतु सवाल उठता है कि जिले की ट्रैफिक पुलिस क्या कर रही है। यह काम तो ट्रैफिक पुलिस का है। व्यवस्था में सुधार लाए तो क्या नहीं हो सकता। 
सौम्या तिवारी, हज़रतगंज 
यहां जाम लगता है तो पुलिस वाले खुलवा देते हैं लेकिन जब सीतापुर रोड पर जाम लगता है तो कोई खुलवाने नहीं जाता। निशातगंज रोड पर तो लोग कटिया डालकर वेल्डिंग कर रहे हैं और उनका सामान सड़कों पर फैला रहता है। 
आलोक शुक्ला , परिवर्तन चौक
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