ईद-उल-अजहा में नहीं मिले गले, दूर से किया सलाम

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स्वतंत्र प्रभात

भाटपाररानी,देवरिया। ईद-उल-अजहा यानि बकरीद का पर्व इस साल फीका रहा।पहले की तरह इस त्योहार में कोई खास रौनक नहीं दिखी।इस पर्व पर कोरोना का खौफ खूब दिखा।मुस्लिम समाज के लोग एक दूसरे से गले नहीं मिले।लोगों ने दूर से ही एक दूसरे को सलाम कर बकरीद की मुबारकबाद दिया।गांवों से लेकर कस्बों तक ईदगाहों में वीरानी छाई रही।शनिवार को मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा ईद-उल-अजहा का पर्व मनाया गया।

इस दौरान सामूहिक नमाज अदा नहीं की गई।अन्य वर्षों की तरह इस वर्ष इस पर्व में कोई रौनक नहीं दिखा।नई लिबास पहनकर ईदगाह जाने की छोटे बच्चों की हसरत अधूरी रही।भाटपाररानी कस्बा स्थित जामा मस्जिद सहित क्षेत्र के भोपतपुरा,हाता, जमनटोला,खेमीपुर, भवानी छापर,रहीमपुर,खामपार, सरयां,मेहरौना, बहोरवा,ततायर,रामपुर बुजुर्ग, दास नरहिया,इंगुरी सराय,खोराबार,भिंगारी बाजार आदि ईदगाहों व मस्जिदों में कोई चहल -पहल नहीं दिखी।इक्के-दुक्के लोगों ने मस्जिदों में व बाकी अन्य लोगों ने घरों में ही नमाज अदा कर मुल्क की सलामती व कोरोना वायरस से निजात की दुआएं मांगी।बुजुर्गो ने कहा कि जिंदगी में पहली बार ईद व बकरीद पर्व पर ऐसी उदासी दिखी।

भाटपार रानी जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना अहमद हुसैन, भोपतपुरा निवासी मौलाना महमूद आलम कादरी व हाफिज रहमतुल्लाह अजीजी,करौंदी निवासी मौलाना सिद्दीक अजीजी,भठवा तिवारी निवासी मौलाना रफीक आलम,सरयां निवासी मौलाना बरकत अली,भवानी छापर निवासी मौलाना अली अख्तर,खेमीपुर के मौलाना मुकीमुद्दीन, पिपरा बघेल के मौलाना सिराजुद्दीन,बंगरा बाजार के मौलाना अबू नसर,जमनटोला निवासी मौलाना अब्दुल जब्बार,लामीचौर के मौलाना अब्बास अली आदि  ने बताया कि पूरी सादगी के साथ बकरीद का पर्व मनाया गया।सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस का पूरा-पूरा पालन किया गया।

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