खाद्य एवं रशद विभाग अम्बेडकर नगर में महाघोटाला,कई नामचीन अधिकारी शामिल।

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स्वतंत्र प्रभात

सीनियर रिपोर्टर-विपिन शुक्ला

खाद्य एवं रशद विभाग अम्बेडकर नगर का एक बड़ा घोटाला सामने आया है जिसके बारे में पूरे जिले में लोगो के बीच  चर्चा का विषय बना हुआ है।सरकार किसानों के लिए एक से एक योजना लेकर आती है शायद अगर वो योजना ढंग से किसानों तक पहुंचे तो किसानों की दुर्दशा काफी सुधर जाये। हम जय जवान जय किसान का नारा लगाते है लेकिन किसानों का हक सरकार के अधिकारी ही बीच के दलालो के माध्यम से खा जा रहे है और पूंजी पतियों को फायदा पहुंचा रहे है। 

आपको बता दें कि सरकार की नीतियों के अनुसार खाद्य और रशद विभाग के अधिकारी को धान की खरीद किसानों से करनी होती है।जिससे सरकार द्वारा तय मूल्य सीधे किसानों तक पहुंच सके। और जिले में कई जगह सक्षम अधिकारी द्वारा सेंटर बनाये जाते है,जहाँ से किसान अपने अनाज को बेंच सके । और हर सेंटर से बकायदा टेंडर के द्वारा निर्धारित वाहनों के द्वारा अनाज को गोदाम में पहुंचाया जा सके।

भ्रष्टाचार के मास्टर माइंड-

शिकायत कर्ता द्वार  जिला अम्बेडकर नगर के खाद्य एवं विपणन अधिकारी अजीत कुमार सिंह को इसका मास्टर माइंड बताया जा रहा है। सुत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय विपणन अधिकारी ज्ञान प्रकाश वर्मा लगभग 8 वर्षों से अपने पद पर तैनात है जबकि नियम के अनुसार उनका कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए बताया जाता है कि ज्ञान प्रकाश वर्मा खाद्य एवं विपणन अधिकारी अजीत कुमार सिंह के काफी करीबी माने जाते है

और ये भ्रष्टाचार का  सारा खेल इनके साथ  मिलकर खेला गया है।इनके अलावा कुछ लोग के और नाम सामने आये है विपणन निरीक्षक जलालपुर अयोध्या प्रसाद सिंह,विपणन अधिकारी बसखारी विजय बहादुर सिंह,विपणन निरीक्षक भीटी संजीत सिंह आदि कुछ और नाम है जो जांच के बाद सामने आयेंगे बताया जाता है कि इसमें जिले के कई बड़े अधिकारी भी सम्मिलित है।

धान की खरीद वर्ष 2019-20 के दौरान  गलत और मनमाने ढंग से खरीद फरोख्त का इन सब पर आरोप लगा है। जिसकी जाँच भी चल रही है।

ये है  भ्रष्टाचार का पूरा मामला है-

दरसअल सरकार किसानों का जो मूल्य तय करती है उसी मूल्य पर अनाज की खरीद फरोख्त करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होती है।लेकिन यहाँ पर गलत तरीके से धान की खरीद फरोख्त की गयी और  नियम है कि सेंटर पर धान की खरीद डायरेक्ट किसानों से करनी होती है

लेकिन किसानों की जगह बिचौलियों से कम रेट पर खरीदा गया जबकि सरकार से किसानों के द्वारा तय मानक मूल्य के अनुसार अधिकारी के द्वारा पेमेंट लिया गया।और सबसे बड़ी बात की छुट्टी के दिन बिना किसी सक्षम अधिकारी के निर्देश के खरीद फरोख्त किया गया।और सबसे बड़ी बात खरीद के बाद जिस गाड़ी से माल को भेजा गया वो बस,बाईक,आटो रिक्शा,और बैटरी रिक्श है इसके अलावा कुछ गाड़ियों के नंबर फर्जी है।

जिनके नाम पर कोई भी वाहन रजिस्टर नहीं है । बताया जाता है कि इन सबमें जिले के कई कई नामी अधिकारी शामिल है जिस वजह से जाँच आगे नहीं बढ़ पा रही है।ये बात भी सामने आई है कि इस घोटाले  में करोड़ो रुपये की चपत उत्तर प्रदेश सरका को लगायी गयी है।प्राप्त आंकड़ो के अनुसार लगभग 30 लाख क्विंटल धान की हेराफेरी की गयी है। ये सटीक आंकड़ा नहीं लेकिन अगर ठीक से जाँच की जायेगी तो आकड़ा चौकाने वाला होगा।

जिला विपणन अधिकारी अजीत कुमार सिंह

जब हमारे संवाददाता विपिन शुक्ला ने  खाद्य एवं विपणन अधिकारी अजीत कुमार सिंह से इस पूरे मामले पर बात की तो उनका कहना था कि चूंकि सरकार का दबाव था कि सारी डिटेल्स जल्दी आनलाईन फीड कराई जाये जिससे क्लरिकल मिस्टेक हो गई है जिस वजह से कई गाड़ियों का नंबर गलत हो गया है।बाकि सेक्शन में इंट्री सही हुई है।


खाद्य एवं रशद विभाग अम्बेडकर नगर पर उठने वाले मुख्य सवाल?

1-बगैर किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के छुट्टी के दिन किसानों से खरीद फरोख्त कैसे किया गया?

2- जो धान की खरीद की गयी उसको बाईक,आटो और बस से इतनी भारी मात्रा में कैसे ले जाया गया?

3- आनलाइन फीडिंग में सिर्फ एक कालम जिसमें वाहनों की इंट्री की गयी उसी में क्लरिकल मिस्टेक कैसे हुई? जबकि सारे कॉलम बिल्कुल सही भरे गये है?

4-ऑनलाइन फीडिंग में इतनी ज्यादा क्लरिकल मिस्टेक वो भी सिर्फ एक ही कॉलम में कैसे संभव है?

5-ऑनलाइन फीडिंग जहाँ से हुई वहाँ के अपर अधिकारी पर सक्षम अधिकारी द्वारा तत्काल कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गयी?


किसी देश का विकास देखना हो तो उस देश के किसानों की स्थिति देखिए ये बात किसी महान आदमी ने कही है। लेकिन अगर खाद्य एवं रशद जैसे विभाग में इस प्रकार से भ्रष्टाचार के मामले सामने आयेंगे तो देश और किसानों का भला कैसे होगा?और ये सिर्फ अम्बेडकर नगर का हाल है जहाँ पर कई करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है

ऐसे ही  प्रदेश में 75 जिलें है ज्यादा तर जिलों में ऐसे ही भ्रष्टाचार की खबरें आ रही है। सोचने वाली बात ये है कि ये विभाग प्रदेश के मुख्यमंत्री के पास है जो विभाग प्रदेश के मुख्यमंत्री के पास हो उस विभाग में इस प्रकार के भ्रष्टाचार की खबरें आये वो प्रदेश और देश दोनो के लिए काफी नुकसानदायक है।