जीविका बना गरीबो के लिए कोरोना का संकट

पत्रकार आकाश कश्यप की कलम से

ठूठीबारी महराजगंज :-
कोरोना की बढ़ती महामारी ने आज सभी को हैरान कर डाला है । जिससे की लोगो मे कोरोना को देख सभी के मन में दहशत बनी हुई है । दिन प्रतिदिन गरीबो में जीविका पर आंच पड़ने से सफर की सुरुआत बन्द पड़ी है । विगत पिछले वर्ष में भी कोरोना की मार से गरीबो में जीविका पर आंच देखी गई । फिर इस बार भी जीविका के लिए गरीबो के आंसू बहने लगे है । दो वक्त की रोटी के लिए बाहर अपनी रोजगार की घण्टी बजा रहे है । जिसमे भय की कहर से गरीबो में चिंता की लहर जोर है । महामारी को देख अपने गांव की ओर गरीब पैर पसार रहे है । कहि कोरोना महामारी की हालत कहि और न बढ़ जाए जिसमे की भय लोगो मे बनी हुई है । जिससे की देखा जाए कि गांव में भी रोजगार मिलना भी ज्यादातर मुश्किल है ।

जो दो वक्त रोटी के किए घर घर रोजगार पाने के लिए भटक रहे है। कोरोना काल मे गरीबो के खाने का स्वाद भी फीकी नजर आ रही है । बढ़ती किल्लत से गरीब परिवार में जीविका कैसे चले । दो वक्त रोटी के लिए घर को छोड़ कर जाना भी रोजगार न मिलना अगर मिलता भी है तो उस दर से परिवार को चलाना मुश्किल है ।जिसको लेकर काफी सोचने वाली बात है । घर मे नन्हे मुंन्हे बच्चे शाम में पापा की राह को देख मां पापा कब आंएगे मेरे लिए क्या लाएंगे । जिसको गरीबो को अपनी परिस्थितियों को देख आंसू बहने लगते है ।