कोरोना वैश्विक महामारी के बीच मनाया जायेगा ईद-उल-अजहा का त्यौहार

कुर्बानी इब्राहिम के धैर्य और अल्लाह पर भरोसे की परीक्षा

विशेष संवाददाता – अतीक राईन

गोण्डा –

कोरोना वैश्विक महामारी के बीच मनाया जायेगा ईद-उल-अजहा का त्यौहार।प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली हैं।प्रशासन ने सभी धर्म गुरुओं के  साथ बैठक कर अपील कि है की सभी लोग घर में रह कर अपने त्यौहार मनाएं मस्जिदों व ईद गाह में नमाज़ न अदा करें।शांति व्यवस्था बनाये रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
मनकापुर जामा मस्जिद इमाम मौलाना मुन्नवर अली खान ने शुक्रवार स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता अतीक राईन से ईदुल अजहा को लेकर हुई खास वार्ता में बताया की

ईद-उल-अजहा के मौके पर कुर्बानी क्यों

ईद-उल-अजहा के मौके पर कुर्बानी देने के पीछे एक दस्तान है। इसके अनुसार इस्लाम धर्म के प्रमुख पैगंबरों में एक हजरत इब्राहिम से कुर्बानी देने की यह परंपरा शुरू हुई। 

उन्होंने बताया की हजरत इब्राहित अलैहिसलाम का कोई संतान नहीं था। अल्लाह से औलाद की काफी ज्यादा मिन्नतों के बाद इब्राहित अलैहिसलाम को बेटा पैदा हुआ जिसका नाम इस्माइल रखा गया। इब्राहिम अपने बेटे इस्माइल से बहुत प्यार करते थे।

मौलाना मुन्नवर अली ने बताया की हजरत इब्राहिम अलैहिसलाम के ख्वाब में एक रात अल्लाह पाक ने उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम को पूरी दुनिया में अपना बेटा ही सबसे प्यारा था। ऐसे में वह अल्लाह पर भरोसा के साथ बेटे इस्माइल की कुर्बानी के लिए तैयार हो गए।

इब्राहिम अपने बेटे को कुर्बानी के लिए ले ही जा रहे थे कि रास्ते में उन्हें एक शैतान मिला और उसने उन्हें ऐसा करने से मना किया। शैतान ने पूछा कि वह भला अपने बेटे की कुर्बानी देने क्यों जा रहे हैं? इसे सुन इब्राहिम अलैहिसलाम ने कहा हट जा मेरे रास्ते से तू मुझे शैतान मालूम होता है, अरे मेरे रब का हुकुम है एक क्या कई बेटे होते तो भी मैं अपने रब की बारगाह में कुर्बान कर देता। फिर शैतान इस्माइल अलैहिसलाम के पास गया और बोला इस्माइल तुम्हे तुम्हारा वालिद(पिता) ज़िबह करने ले जा रहें हैं इस्माइल अलैहिसलाम बोले क्या कोई वालिद(पिता) अपने बेटे को ज़िबह करता है। हट जा तू मुझे शैतान मालूम होता है।फिर शैतान ने कहा नहीं अल्लाह की हुकूम से ज़िबह करने जा रहे है। फिर क्या इस्माइल ने कहा अगर ये बात है तो रब के लिए इस्माइल की एक जान क्या! हजारों जान होते वह भी कुर्बान कर देता।

इब्राहिम अलैहिसलाम ने कुर्बानी देने के समय अपने बेटे इस्माइल को अपने ख़्वाब के बारे में बताया तो इस्माइल ने कहा बाबा आप जो चाहें वह करें,इंशाल्ला आप मुझ सब्र करने वाला पाएंगे। इब्राहिम अलैहिसलाम अपने आंखों पर पट्टी बांध ली ताकि उन्हें दुख न हो। जब इस्माइल अलैहिसलाम को ज़िबह करने के लिए लिटाया गया तो छुरी इस्माइल अलैहिसलाम के गले पर नहीं चली।

इब्राहिम अलैहिसलाम ने जब छुरी को पत्थर पर मारा तो पत्थर दो टुकड़े हो गये।फिर बोले ऐ छुरी तेरा काम है काटना तू इस्माइल के गले को क्यों नहीं काट रही तो छुरी रब के फजल से बोल उठी ऐ इब्राहिम जिस आग में आप को डाला गया तो रब ने फ़रमाया ऐ आग ठण्डी हो जा और सलामती हो जा इब्राहिम पर तो आग को एक बार हुक्म हुआ तो ठण्डी हो गयी। तो वही रब मुझे 70 बार हुक्म दे रहा है इस्माइल के गले पर न चलने की, फिर मैं कैसे इस्माइल के गले को काटूं।
फिर इब्राहिम अलहिसलाम ने इस्माइल के गले पर छुरी चलायी तो गर्दन जैसे कटी उन्होंने अपनी पट्टी खोली,अपने बेटे को उन्होंने सही-सलामत सामने खड़ा पाया। 

दरअसल, अल्लाह पाक इब्राहिम के धैर्य और अल्लाह पर भरोसे की परीक्षा ले रहे थे। अल्लाह पाक ने फरिश्तो के सरदार हजरत जिब्राइल हुक्म दिया – की जाकर जन्नत से दुम्बा लेलो इससे पहले की इस्माइल के गर्दन पर छुरी चले,जिब्राइल ने छुरी के निचे इस्माइल को हटाकर दुंबे (भेड़) को आगे कर दिया। ऐसे में दुंबे की कुर्बानी हो गई और बेटे की जान बच गई। इसी के बाद से कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हो गई।

इसके मुताबिक आप अपने जीवन में जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हो उसकी कुर्बानी देनी होती थी। इस वजह से हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे को इस कुर्बानी के लिए चुना था।यह पर्व इसी की याद में मनाया जाता है। इसके बाद अल्लाह के हुक्म पर जानवरों की कुर्बानी देने का इस्लामिक कानून शुरू हो गया।

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