सीबीआई पर अदालत ने जताई अपनी नाराजगी


अब तक क्यों नहीं कराया गया अस्थाना का लाई डिटेक्टर टेस्ट


न्यूज़डेस्क।

रिश्वतखोरी के एक मामले में सीबीआइ के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का मनोवैज्ञानिक और झूठ पकड़ने वाला परीक्षण नहीं करवाने के लिए बुधवार को जांच एजंसी पर अदालत ने अपनी नाराजगी दिखाई। वैसे तो  इस मामले में अस्थाना को हाल ही में क्लीन चिट दे दी गई थी।

 सीबीआइ ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था।जबकि सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने शुरुआत में जांच करने वाले अधिकारी अजय कुमार बस्सी को 28 फरवरी को अदालत में पेश होने और केस डायरी की जानकारी देने का निर्देश दिया।


जज साहब ने सीबीआई से पूछा


प्राप्त जानकारी के अनुसार जज ने सीबीआइ से पूछा कि क्या अस्थाना के टेलीफोन पर बातचीत की कोई रिकार्डिंग है, इस पर एजंसी ने इनकार किया। अदालत ने जानना चाहा कि व्हाट्सएप के जरिए अस्थाना को की गई कॉल का क्या हुआ ? शिकायतकर्ता सना सतीश बाबू ने 164 सीआरपीसी  के तहत दर्ज कराए गए अपने बयान में इस बारे में कहा कि आरोपपत्र दाखिल करने में प्रमाणों की अवहेलना नहीं की जा सकती।

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या सीबीआइ ने अस्थाना से कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन हासिल किए। क्या उसने मनोज प्रसाद और सोमेश्वर प्रसाद से उनका आमना-सामना कराया।सीबीआइ ने कहा-नहीं, हमने  पूछताछ की लेकिन कभी भी किसी से भी उनका आमना-सामना नहीं कराया। सीबीआई ने कहा कि मनोज प्रसाद और सोमेश्वर प्रसाद, उनके पिता, सोमेश्वर के ससुर सुनील मित्तल और एक अन्य वकील प्रकाश सिंह नेगी की कॉल पकड़ी गई। एजंसी ने अदालत से कहा- हमने आवाज के नमूनों को फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा है। 
अदालत ने दिए निर्देश

अदालत ने सीबीआइ को 15 अक्तूबर और 23 अक्तूबर 2018 के बीच कॉल रिकार्ड के विवरण जमा करने को कहा। अदालत ने कहा-15 अक्तूबर 2018 से 23 अक्तूबर 2018 तक पहले जांच अधिकारी की केस डायरी दाखिल करें।अदालत ने आगे कहा कि मामले का सह आरोपी वकील सुनील मित्तल ऐसा लगता है कि कोई काल्पनिक पात्र है जो मिशन इम्पॉसिबल या ‘जेम्स बांड’ की फिल्मों से निकला है। मित्तल के दामाद सोमेश्वर प्रसाद के बारे में अदालत ने पूछा-आप ऐसे व्यक्ति के प्रति इतनी दया क्यों दिखा रहे हैं

जो सहयोग नहीं कर रहा, यहां तक कि वह अपना फोन नंबर तक नहीं दे रहा ? इस मामले में वैसे तो सीबीआइ की जांच पर अदालत ने पिछले हफ्ते भी नाराजगी जाहिर की थी और पूछा था कि जिन आरोपियों की इसमें बड़ी भूमिका है वे खुले क्यों घूम रहे हैं। जबकि जांच एजंसी अपने खुद के डीएसपी को गिरफ्तार कर चुकी है।मामले में आरोपी बनाने के पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण सीबीआइ ने अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार के नाम आरोप-पत्र के कॉलम 12 में लिखे थे। डीएसपी को 2018 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। 

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