वाराणसी कोर्ट ने PM मोदी पर X पोस्ट को लेकर मधु किश्वर के खिलाफ शिकायत पर पुलिस रिपोर्ट मांगी
इस मामले में शिकायत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लीगल सेल के संयोजक, वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दायर की थी
ब्यूरो प्रयागराज- वाराणसी की एक कोर्ट में एक शिकायत दायर की गई है, जिसमें शिक्षाविद और लेखिका प्रो. मधु किश्वर के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य राजनीतिक नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, किश्वर ने कथित तौर पर X और अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने वेरिफ़ाइड सोशल मीडिया अकाउंट का दुरुपयोग करके लगातार गुमराह करने वाला, झूठा, भड़काऊ और मानहानिकारक कंटेंट फैलाया।
वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शिकायत का संज्ञान लिया है, जिसमें पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह कथित तौर पर मानहानिकारक पोस्ट के लिए किश्वर के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करे। कोर्ट ने इस मामले को एक विविध मामले के तौर पर दर्ज किया है और इस मामले पर पुलिस से एक रिपोर्ट भी मांगी है।इस मामले में शिकायत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लीगल सेल के संयोजक, वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दायर की थी।
शिकायत में विशेष रूप से आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ किश्वर द्वारा किए गए कुछ पोस्ट बहुत ज़्यादा गुमराह करने वाले थे और उनका समाज पर व्यापक असर पड़ सकता था। आगे यह तर्क दिया गया कि चूंकि किश्वर एक वेरिफ़ाइड सोशल मीडिया अकाउंट चलाती हैं, इसलिए उनके बयानों को जनता द्वारा ज़्यादा विश्वसनीय माने जाने की संभावना है, जिससे उनका असर और गंभीरता बढ़ जाती है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि पहले किश्वर को कई कानूनी नोटिस जारी किए गए थे, जिसमें उनसे अपने दावों को साबित करने और कथित तौर पर आपत्तिजनक कंटेंट को बदलने या हटाने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने कथित तौर पर कोई सहायक सामग्री पेश नहीं की और न ही कोई सुधार किया। यह तर्क दिया गया कि यह किश्वर की ओर से व्यवहार का एक दोहराया जाने वाला पैटर्न है, जिसका उद्देश्य समाज में भ्रम, असंतोष और कलह पैदा करना है।
शिकायत में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि ऐसा कंटेंट संस्थानों में जनता के विश्वास को कम कर सकता है, सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसी आधार पर, तत्काल कानूनी हस्तक्षेप और FIR दर्ज करने की मांग की गई। इस मामले की सुनवाई कोर्ट 15 अप्रैल को करेगा, तब तक पुलिस से अपनी रिपोर्ट जमा करने की उम्मीद है।


Comments