बंगाल चुनाव में बदलती सियासत और नई दिशा शीर्ष नेतृत्व की पकड़ और जनसमर्थन की असली कसौटी

इन दोनों की संयुक्त भूमिका भाजपा को एक सशक्त विकल्प के रूप में प्रस्तुत करती है

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पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां हर दल अपनी पूरी शक्ति के साथ चुनावी मैदान में उतरा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने चालीस प्रमुख प्रचारकों की सूची जारी कर इस चुनाव को अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है। इस सूची में सबसे आगे नरेंद्र मोदीऔर अमित शाह का नाम रखकर यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि चुनाव प्रचार की पूरी जिम्मेदारी देश के शीर्ष नेतृत्व के हाथों में रहेगी।
 
इस सूची में केवल अनुभवी नेताओं को ही स्थान नहीं दिया गया है बल्कि नए और चर्चित चेहरों को भी अवसर मिला है। लेंडर पाईस जैसे पूर्व खेल जगत के प्रसिद्ध नाम को शामिल कर युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास किया गया है। इसी प्रकार मिथुन चक्रवर्ती जैसे लोकप्रिय अभिनेता को प्रमुख स्थान देकर जनता के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने की कोशिश की गई है।
 
सूची में हेमा मालिनी और कंगना रनोट जैसे नाम भी शामिल हैं जो अपने प्रभाव के कारण मतदाताओं को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। इसके साथ ही मनोज तिवारी जैसे लोकगायक और जनप्रतिनिधि को भी शामिल कर विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
 
भाजपा की रणनीति का मुख्य उद्देश्य चुनावी बहस को अपने पक्ष में मोड़ना है। नरेंद्र मोदी के भाषणों में विकास राष्ट्रीय गौरव और सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहते हैं। वहीं अमित शाह संगठन को मजबूत करने और प्रत्येक मतदान केंद्र तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर देते हैं। इन दोनों की संयुक्त भूमिका भाजपा को एक सशक्त विकल्प के रूप में प्रस्तुत करती है।
 
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समाज का मत लंबे समय से निर्णायक रहा है। राज्य में यह वर्ग अधिकतर ममता बनर्जी  के साथ जुड़ा रहा है। परंतु इस बार स्थिति में कुछ परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि कांग्रेस और वामपंथी दल भी इस वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि इस वर्ग के मतों में बंटवारा होता है तो इसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।
 
दलित पिछड़ा और अन्य पिछड़ा वर्ग इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। भाजपा ने इन वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को आधार बनाया है। आवास योजना उज्ज्वला योजना और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं का प्रभाव इन वर्गों पर पड़ा है। इससे भाजपा को इन वर्गों का समर्थन मिलने की संभावना बढ़ी है।
 
भाजपा का एक महत्वपूर्ण पक्ष उसका संगठन है। पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल में अपने संगठन को व्यापक रूप से फैलाया है। गांव और नगर स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है जिससे चुनाव के समय हर क्षेत्र में पार्टी की मजबूत उपस्थिति बनी हुई है।
 
दूसरी ओर  ममता बनर्जी के सामने कई चुनौतियां हैं। लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण जनता के एक वर्ग में असंतोष देखने को मिल रहा है। कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे भी प्रमुख बने हुए हैं। यदि इन विषयों का प्रभाव चुनाव में बढ़ता है तो तृणमूल कांग्रेस के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।
 
भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए विकास को मुख्य मुद्दा बनाया है। पार्टी का कहना है कि वह राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी। इसके साथ ही सड़कों और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। भाजपा यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि वह राज्य को नई दिशा देने में सक्षम है।
 
चुनाव में लोकप्रिय चेहरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। मिथुन चक्रवर्ती जैसे अभिनेता जनता के बीच अपनी पहचान के कारण प्रभाव डालते हैं। वहीं लेंडर पाईस जैसे खिलाड़ी युवाओं को प्रेरित करते हैं। इन चेहरों के माध्यम से भाजपा मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
 
अंत में यह कहा जा सकता है कि पश्चिम बंगाल का यह चुनाव केवल राजनीतिक दलों की शक्ति का नहीं बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की सोच का भी प्रतिबिंब होगा। भाजपा अपने शीर्ष नेतृत्व और मजबूत संगठन के सहारे आगे बढ़ रही है जबकि ममता बनर्जीअपने अनुभव और जनाधार के बल पर मुकाबला कर रही हैं। आने वाला समय यह तय करेगा कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी और किस दल की रणनीति सफल सिद्ध होगी।
 
कांतिलाल मांडोत

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