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गरीबी सबसे बड़ा अभिशाप, भक्ति ही जीवन का सहारा: पं. बृजनंदन शास्त्री
क्षेत्र के छमनीखेड़ा गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।
लालगंज (रायबरेली)।
क्षेत्र के छमनीखेड़ा गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पं. बृजनंदन शास्त्री ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाया। कथा सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य के जीवन में निर्धनता सबसे बड़ा अभिशाप है। गरीबी से बड़ा कोई दुख नहीं है। यह इंसान को भीतर से तोड़ देती है। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता वही है, जो श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी हो।
अंतिम दिन कंस वध, अक्रूर आगमन और परीक्षित मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में एक सच्चा भक्त जन्म लेता है, उसका पूरा कुल धन्य हो जाता है। जहां सत्संग होता है, वह स्थान अपने आप पवित्र बन जाता है। सप्ताह भर चली कथा का समापन भक्ति भाव के साथ हुआ। गांव के लोगों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया। हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया।
व्यवस्था से लेकर सेवा तक हर जगह गांव की एकजुटता दिखी। आयोजक मंडल के संरक्षक केशव तिवारी ने बताया कि रविवार दोपहर 12 बजे हवन-पूजन और पूर्णाहुति होगी। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रोफेसर आरके सिंह, अशोक तिवारी, अनूप तिवारी, सेवानिवृत्त फौजी संजय तिवारी, राजेंद्र दीक्षित, अतुल सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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