गैस संकट में घिरा बस्ती: डीएसओ की निष्क्रियता से उपभोक्ता परेशान, एजेंसियों की मनमानी चरम पर 

प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है, वहीं डीएसओ की भूमिका पूरी तरह से निष्क्रिय नजर आ रही है

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बस्ती। बस्ती जिले में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। शहर से लेकर गांव तक उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी जैसे हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। सबसे ज्यादा सवाल जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) की कार्यशैली पर उठ रहे हैं, जिनकी निष्क्रियता के कारण गैस एजेंसियों की मनमानी बेलगाम हो गई है।आरोप है कि जहां एक ओर जिलाधिकारी, आयुक्त और एडीएम स्तर पर प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है, वहीं डीएसओ की भूमिका पूरी तरह से निष्क्रिय नजर आ रही है।
 
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि उपभोक्ताओं को दिन में गैस नहीं मिल रही, लेकिन रात के अंधेरे में सिलेंडर बंटने की चर्चा खुलेआम हो रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर रात 12 बजे गैस कैसे और किसके इशारे पर वितरित की जा रही है?जनता का कहना है कि अगर दिन में पारदर्शी तरीके से गैस वितरण हो तो रात में चोरी-छिपे सिलेंडर बांटने की नौबत ही क्यों आए। एजेंसियों पर आरोप है कि वे मनमाने ढंग से गैस वितरण कर रही हैं, जिससे कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है। लेकिन पूर्ति विभाग की ओर से न तो कोई ठोस कार्रवाई दिख रही है और न ही कोई सख्त निगरानी।
 
बस्ती के लोगों का कहना है कि जिले के इतिहास में इतना ढीला और निष्क्रिय डीएसओ शायद ही कभी देखा गया हो। जब पूरे प्रशासनिक अमले की सक्रियता के बावजूद पूर्ति विभाग की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी ही घर बैठ जाएं, तो व्यवस्था चरमराना स्वाभाविक है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिलाधिकारी इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेकर पूर्ति विभाग की कार्यशैली की जांच कराएंगे?और अगर रात के अंधेरे में गैस वितरण हो रहा है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?फिलहाल बस्ती की जनता गैस संकट से जूझ रही है और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रही है। अगर समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो यह संकट और भी गहराता दिखाई दे रहा है।

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