उपेक्षा की राजनीति के खिलाफ युद्ध की घोषणा: 

एआईयूडीएफ उम्मीदवार अनुप कुमार दास तालुकदार ने जीत के लक्ष्य के साथ जोरदार तैयारी में जुटे।,रामकृष्णनगर में त्रिपक्षीय संघर्ष के स्पष्ट संकेत।

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

श्रीभूमि - श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मैदान में इस बार नए राजनीतिक समीकरण के संकेत देते हुए अनुप कुमार दास तालुकदार ने दमदार एंट्री की है। लंबे समय तक इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड में जनरल मैनेजर के पद पर कार्य करने के बाद उन्होंने जनसेवा के उद्देश्य से सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इंडियन नेशनल कांग्रेस से जुड़े रहने के बावजूद, 2026 के विधानसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर उन्होंने आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। 
 
 वर्तमान में वे जीत के लक्ष्य के साथ जोरदार तैयारी में जुटे हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान अनुप कुमार दास तालुकदार के स्वर में तीखा विरोध और असंतोष झलकता है। उन्होंने सीधे भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूरे घाटी क्षेत्र में लंबे समय से कायवर्त समाज की उपेक्षा और अपमान किया गया है। इसी के विरोध में उन्होंने एआईयूडीएफ का दामन थामते हुए “समाज और देश के विकास की लड़ाई” लड़ने का संकल्प लिया है।
 
उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई बुनियादी वैचारिक अंतर नहीं है। उनके शब्दों में, “दिन में कांग्रेस, रात में भाजपा असल में दोनों एक ही जड़ से जुड़े हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा प्रत्याशी विजय मालाकार की नागरिकता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “एक संदिग्ध नागरिक को उम्मीदवार बनाने में इतनी दिलचस्पी क्यों? क्या इस क्षेत्र में योग्य और शिक्षित लोगों की कमी है?” इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने सत्ताधारी दल की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।
 
अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव और ईमानदारी की छवि को सामने रखते हुए अनुप कुमार दास तालुकदार ने रामकृष्णनगर के मतदाताओं से समर्थन और सहयोग की अपील की है। उनका मानना है कि जनता अब “वादों की राजनीति” और “जमीनी हकीकत” के बीच का अंतर समझने लगी है। कुल मिलाकर, रामकृष्णनगर में इस बार इंडियन नेशनल कांग्रेस , भारतीय जनता पार्टी और आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।
 
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुपबाबू की आक्रामक रणनीति चुनावी समीकरण को नया मोड़ दे सकती है। अब मतदाता का निर्णय अंतिम समीकरण तय करेगा, और राजनीतिक दलों की रणनीति का असली असर जनता की पसंद में ही देखा जाएगा।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें