न खेत न बही, जो पुलिस कहे वही सही

लखीमपुर में 'फर्जी मुठभेड़' की साजिश का आरोप

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लखीमपुर खीरी। जनपद के थाना फरधान क्षेत्र के ग्राम पीरपुर निवासी एक लाचार पिता ने पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस और क्राइम ब्रांच ने मिलकर एक निर्दोष राजमिस्त्री को "इनामी बदमाश" बताकर उसे फर्जी मुठभेड़ में मारने की साजिश रची। अब पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री से लेकर आलाधिकारियों तक न्याय की गुहार लगा रहा है।

क्या है पूरा मामला?
पीरपुर निवासी लल्लन के अनुसार, उनका पुत्र अच्छन बाबू पेशे से राजमिस्त्री है। घटना 11 मार्च 2026 की है, जब अच्छन अपने भाई हाशिम और एक अन्य साथी के साथ लखीमपुर शहर के पटेलनगर से काम खत्म कर घर लौट रहा था। आरोप है कि रास्ते में नीमगांव पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें बिना बताए हिरासत में ले लिया।

परिजनों के संगीन आरोप-
परिजनों का कहना है कि गिरफ्तारी के 7 घंटे तक पुलिस ने उन्हें कोई सूचना नहीं दी। जब काफी खोजबीन के बाद मुख्यमंत्री और पुलिस महानिरीक्षक को ट्वीट कर शिकायत की गई, तब जाकर पुलिस ने छोटे बेटे हाशिम के फोन से परिजनों को गिरफ्तारी की जानकारी दी।

पीड़ित पिता द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल---
इनाम की कहानी: पुलिस का दावा है कि अच्छन बाबू पर 50,000 रुपये का इनाम था। पिता का सवाल है कि यदि वह इतना बड़ा अपराधी था, तो पुलिस ने कभी घर पर दबिश क्यों नहीं दी? वह रोज शहर में खुलेआम काम कैसे कर रहा था?

लोकेशन का खेल-----
परिजनों का आरोप है कि अच्छन को शाम 6 बजे लखीमपुर शहर से पकड़ा गया, जबकि पुलिस ने गिरफ्तारी 20 किमी दूर बांछेपारा गांव से रात में दिखाई है। साथ ही नाजायज असलहा और कारतूस की बरामदगी को भी पूरी तरह फर्जी बताया जा रहा है।साजिस या इत्तेफाक? घटना से दो दिन पहले कुछ लोग सादी वर्दी में घर आए थे, जिन्होंने आधार कार्ड और फोटो लिए थे। आरोप है कि यह सब एक "फर्जी एनकाउंटर" की रूपरेखा तैयार करने के लिए किया गया था।"मेरे बेटे को प्रमोशन के लालच में फंसाया गया है।

फरधान पुलिस, नीमगांव पुलिस और क्राइम ब्रांच ने मिलकर यह घटिया कृत्य किया है। हम मांग करते हैं कि पुलिसकर्मियों के मोबाइल लोकेशन की जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।"लल्लन (पीड़ित पिता) जांच की उठ रही मांग पीड़ित परिवार ने इस पूरे प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिस ने जिस आरोपी के बयान पर अच्छन को पकड़ा है, वह पूरी तरह निराधार है। ग्रामीणों में भी पुलिस की इस कार्यप्रणाली को लेकर भारी रोष है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है या "खाकी" का रसूख सच्चाई पर भारी पड़ता है।

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