भाषा सामाजिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया एवं माध्यम है- प्रो. सलूजा

सशक्तिकरण के क्षेत्र में सार्थक संवाद को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है

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दिल्ली विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह सांध्य महाविद्यालय तथा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय भाषा परिवार : एकत्व का प्रारूप” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर देशभर के शिक्षाविद, विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं भाषा विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में समकृत प्रमोशन फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. चाँद किरण सलूजा उपस्थित रहे।

अपने बीज वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक निर्माण का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शब्द नहीं, बल्कि वाक्य अर्थ का निर्माण करता है। प्रो. सलूजा ने संप्रेषण की सूक्ष्मताओं तथा दैनिक जीवन में भाषा के उपेक्षित आयामों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं को दिए गए महत्व को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। संस्कृत भाषा पर उनकी गहन पकड़ ने श्रोताओं को भाषायी चेतना के व्यापक आयामों से परिचित कराया।

भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चामु कृष्ण शास्त्री ने भाषायी विविधता एवं राष्ट्रीय एकता के समन्वय को भारत की सांस्कृतिक शक्ति बताते हुए सामाजिक सौहार्द एवं भ्रातृत्व की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार अत्री ने अपने स्वागतीय उद्बोधन में भारतीय संविधान की अष्टम अनुसूची के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संवैधानिक आधार प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि भाषाओं का उपयोग समाज को विभाजित करने के राजनीतिक साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

संगोष्ठी के सह-संयोजक डॉ. प्रशांत उपाध्याय ने भाषाओं को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते हुए राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उद्घाटन सत्र का समापन संगोष्ठी के संयोजक प्रो. वी. एस. नेगी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय भाषाओं की एकात्मता, सांस्कृतिक समृद्धि तथा भाषायी सशक्तिकरण के क्षेत्र में सार्थक संवाद को निरंतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।

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