“तारीख बढ़ी, भुगतान अटका – छितौनी–तमकुही रेल परियोजना में किसान भटकते रहे”

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कुशीनगर। वर्षों से अधर में लटकी छितौनी–तमकुही रोड रेल परियोजना एक बार फिर पटरी पर लौटती दिखाई दी, लेकिन मुआवजा भुगतान को लेकर प्रभावित किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। राजस्व विभाग को जमीन अधिग्रहण का भुगतान मिलने के बाद भी किसानों को उनका हक अब तक नहीं मिल सका है।

अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) द्वारा 29 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी कर पहले चक्र में जटहा में लगभग  20, एकवनही उर्फ भागवतपुर में 15 किसानों को 15 फरवरी 2026 तक अपने सभी आवश्यक कागजात जमा करने का निर्देश दिया गया था। दूसरे चक्र में जरार के किसानो को नोटिस जारी किया गया। जिसमें 20 फरवरी तक जमा करने की जानकारी दी गई। नोटिस में फॉर्म 41/45 और 1359 भरकर कार्यालय में जमा करने की प्रक्रिया तय की गई थी, ताकि किसानों को मुआवजा भुगतान किया जा सके।
लेकिन हकीकत यह है कि निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद भी किसानों के हाथ कोई कागज नहीं लगा है। किसान एडीएम (न्यायिक), तहसीलदार, लेखपाल और अन्य राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हर दिन नई तारीख की बात कही जा रही है, लेकिन भुगतान की स्पष्ट तिथि अब तक घोषित नहीं की गई है।
प्रभावित किसानों का कहना है कि “सरकार ने जमीन ले ली, लेकिन भुगतान कब मिलेगा, यह कोई बताने को तैयार नहीं है।” दफ्तरों में बैठे बाबू और लेखपाल किसानों की परेशानियों को देखते हुए भी उदासीन बने हुए हैं। इससे किसानों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे किसानों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की क्षति उठानी पड़ रही है। अब किसानों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द भुगतान की निश्चित तिथि घोषित करे और लंबित कागजी प्रक्रिया को सरल बनाकर उन्हें उनका मुआवजा दिया जाए, ताकि वर्षों से लंबित इस परियोजना में न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। सवाल अब भी कायम है — तारीख बढ़ाने की घोषणा तो हो रही है, लेकिन भुगतान आखिर कब होगा?

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