किराएदारों के लिए बड़ी राहत! HRA पर सरकार का बड़ा फैसला, अब बचेगा ज्यादा पैसा

इसके बाद कुल 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को 50 फीसदी HRA छूट मिलेगी, जबकि बाकी शहरों में यह सीमा 40 फीसदी ही रहेगी।

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किराए के मकान में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक अब दिल्ली और मुंबई की तरह बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में भी 50 फीसदी तक HRA छूट का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल इन शहरों में यह सीमा 40 फीसदी है।

अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी टैक्स बचत में इजाफा होगा।


क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?

वर्तमान नियमों के अनुसार, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में रहने वाले कर्मचारियों को ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत सैलरी के 50 प्रतिशत तक HRA पर टैक्स छूट मिलती है। वहीं, अन्य शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत तक ही सीमित है।

अब सरकार इस सूची में चार और बड़े शहरों को जोड़ने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार—

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को भी मेट्रो कैटेगरी में शामिल किया जाएगा।

इसके बाद कुल 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को 50 फीसदी HRA छूट मिलेगी, जबकि बाकी शहरों में यह सीमा 40 फीसदी ही रहेगी।


क्यों जरूरी था यह बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर तेजी से विकसित हुए हैं। ये शहर अब देश के बड़े—

  • आईटी हब

  • मैन्युफैक्चरिंग सेंटर

  • सर्विस सेक्टर हब

बन चुके हैं।

रोजगार बढ़ने के साथ-साथ यहां मकानों का किराया भी काफी बढ़ गया है। कई इलाकों में किराया मेट्रो शहरों के बराबर या उससे भी ज्यादा हो गया है।

ऐसे में 40 फीसदी की सीमा कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नहीं रह गई थी। सरकार का यह कदम इन शहरों की बदली हुई आर्थिक और सामाजिक स्थिति को स्वीकार करने जैसा माना जा रहा है।


टैक्स बचत पर कितना पड़ेगा असर?

इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जो अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं।

  • ओल्ड टैक्स रिजीम में HRA पर छूट मिलती है

  • न्यू टैक्स रिजीम में HRA की सुविधा नहीं है

अगर कोई कर्मचारी 40% से 50% की कैटेगरी में आ जाता है, तो उसकी टैक्स योग्य आय कम हो जाएगी। इससे—

  • टैक्स कम देना होगा

  • महीने की बचत बढ़ेगी

  • जेब में ज्यादा पैसा बचेगा

विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे मध्यम वर्ग के कर्मचारियों को सालाना हजारों रुपये तक का फायदा हो सकता है।


कब लागू हो सकता है नियम?

फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे आने वाले बजट या वित्तीय संशोधन में लागू कर सकती है। आधिकारिक घोषणा के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।


निष्कर्ष

सरकार का यह कदम बढ़ती महंगाई और किराए के दबाव से जूझ रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। अगर प्रस्ताव लागू होता है, तो मेट्रो के अलावा बड़े शहरों में रहने वालों को भी टैक्स में बराबरी का लाभ मिलेगा।


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