रंग और मन: प्रकृति से संस्कृति तक का सफर

रंगों की मौन भाषा और मनुष्य की भावनाएँ, भावनाओं के दो रंग: लाल और नीले की दुनिया

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

कृति आरके जैन

 रंग केवल देखने की वस्तु नहीं हैंबल्कि वे हमारे मनसोच और भावनाओं से गहराई से जुड़े होते हैं। जब हम किसी रंग को देखते हैंतो वह सीधे हमारे मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है। लाल बत्ती देखकर हमारा पैर अपने आप ब्रेक पर चला जाता हैऔर नीले आसमान को देखकर मन शांति से भर जाता है। यह सब संयोग नहीं है। यह रंगों की वह मौन भाषा हैजो वर्षों से मानव जीवन को दिशा देती आ रही है। लाल हमें सतर्क करता हैउत्तेजित करता है और चेतावनी देता हैजबकि नीला हमें ठहरनेसोचने और शांत रहने का अवसर देता है। इन्हीं दोनों रंगों के माध्यम से प्रकृति और मनुष्य के बीच एक गहरा संवाद चलता रहता है।

लाल रंग ऊर्जागर्मी और तीव्रता का प्रतीक माना जाता है। जब कोई व्यक्ति अत्यधिक क्रोधित होता हैतो उसका चेहरा लाल पड़ जाता है। उस समय शरीर में रक्त का प्रवाह तेज़ हो जाता है और हृदय तेजी से धड़कने लगता है। यह शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती हैजिसे लड़ने या भागने की स्थिति कहा जाता है। यह प्रतिक्रिया हमें खतरे से बचाने के लिए बनी है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि लाल रंग देखने पर हमारा ध्यान तुरंत केंद्रित हो जाता है और हम अधिक सतर्क हो जाते हैं। इसी कारण लाल रंग चेतावनी का प्रतीक बन गया है।

प्रकृति में भी लाल रंग अधिकतर खतरे और सावधानी से जुड़ा होता है। आग की लपटें लाल होती हैंखून लाल होता हैऔर कई विषैले कीड़े तथा फल लाल रंग के होते हैं। यह रंग हमें अनजाने में सावधान रहने का संकेत देता है। हमारे पूर्वजों ने अनुभव के आधार पर यह सीख लिया था कि लाल रंग से जुड़ी चीज़ों से सतर्क रहना आवश्यक है। यही कारण है कि आज भी लाल रंग हमें बेचैन और सक्रिय बना देता है। गुस्से में “लाल हो जाना” केवल कहावत नहींबल्कि शरीर की वास्तविक स्थिति है।

वैश्विक टैरिफ समझौते: भारतीय निर्यातकों एवं उत्पादनकर्ताओं के लिए स्वर्णिम युग Read More वैश्विक टैरिफ समझौते: भारतीय निर्यातकों एवं उत्पादनकर्ताओं के लिए स्वर्णिम युग

लाल रंग केवल क्रोध का प्रतीक नहीं हैबल्कि प्रेमउत्साह और जुनून का भी प्रतीक है। प्रेम में डूबे व्यक्ति के चेहरे पर लालिमा आ जाती है। किसी प्रतियोगिता में जीत का जोश भी लाल रंग जैसी तीव्रता लिए होता है। जब कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य के प्रति अत्यधिक उत्साहित होता हैतो उसके भीतर भी वही लाल ऊर्जा दौड़ती है। इस प्रकार लाल रंग हर उस भावना से जुड़ा हैजिसमें गर्मीगति और आवेग होता है। यह हमें आगे बढ़ने और संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।

 अप्रकाशित किताब, बड़े दावे और खाली हाथ राहुल गांधी Read More  अप्रकाशित किताब, बड़े दावे और खाली हाथ राहुल गांधी

नीला रंग लाल के बिल्कुल विपरीत प्रभाव डालता है। यह ठंडकगहराई और विस्तार का प्रतीक है। जब हम खुले नीले आकाश को देखते हैं या समुद्र की नीली लहरों पर ध्यान लगाते हैंतो मन अपने आप शांत होने लगता है। हमारी साँसें धीमी हो जाती हैं और हृदय की गति सामान्य हो जाती है। यह इसलिए होता है क्योंकि नीला रंग हमारे शरीर के उस हिस्से को सक्रिय करता हैजो विश्राम और संतुलन से जुड़ा होता है। इस कारण नीला हमें मानसिक शांति प्रदान करता है।

हवा-पानी-मिट्टी ही नहीं, अब रिश्ते भी प्रदूषित हो रहे हैं Read More हवा-पानी-मिट्टी ही नहीं, अब रिश्ते भी प्रदूषित हो रहे हैं

वैज्ञानिक अनुसंधानों से पता चलता है कि नीले वातावरण में लोग अधिक एकाग्र रहते हैं और कम चिड़चिड़े होते हैं। ऐसे स्थानों पर काम करने वाले लोग बेहतर निर्णय ले पाते हैं और अधिक रचनात्मक होते हैं। प्रकृति में नीला रंग अधिकतर उन तत्वों से जुड़ा होता हैजो दूर और सुरक्षित होते हैंजैसे आकाश और समुद्र। वहाँ तत्काल कोई खतरा दिखाई नहीं देताइसलिए हमारा मन भी निश्चिंत रहता है। नीला हमें सुरक्षा और स्थिरता का अनुभव कराता है।

नीला रंग उदासी और गहराई का भी प्रतीक माना जाता है। जब कोई व्यक्ति भीतर से शांत या गंभीर होता हैतो उसे नीले रंग से जोड़ा जाता है। “नीला मन” का अर्थ होता है गहरी भावना और आत्मचिंतन की अवस्था। यह वह समय होता हैजब व्यक्ति बाहरी दुनिया से थोड़ा दूर होकर अपने भीतर झांकता है। नीला हमें ठहरनेसोचने और स्वयं को समझने का अवसर देता है। इस कारण यह रंग मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत उपयोगी है।

रंगों का प्रभाव केवल शरीर और मन तक सीमित नहीं रहताबल्कि संस्कृति में भी गहराई से बस जाता है। पश्चिमी देशों में लाल रंग गुस्से का प्रतीक हैजबकि नीला उदासी या शांति का। चीन में लाल रंग शुभ और मंगलकारी माना जाता है और विवाह तथा त्योहारों में इसका विशेष प्रयोग होता है। भारत में नीला रंग आध्यात्मिक शक्ति और संतुलन का प्रतीक है। भगवान कृष्ण का नीला स्वरूप इसी गहराई और शांति का उदाहरण है।

व्यापार और संस्थानों में भी रंगों के इसी मनोविज्ञान का उपयोग किया जाता है। बैंक और बड़ी कंपनियाँ नीले रंग का प्रयोग इसलिए करती हैंताकि ग्राहकों को विश्वास और सुरक्षा का अनुभव हो। सामाजिक माध्यमों के प्रतीक भी अधिकतर नीले होते हैं। दूसरी ओरभोजन की दुकानों में लाल और पीले रंग का उपयोग किया जाता हैताकि लोगों की भूख बढ़े और वे जल्दी निर्णय लें। इस प्रकार रंग हमारे व्यवहार को बिना बताए नियंत्रित करते हैं।

अस्पतालों में नीले और हल्के रंगों के वस्त्र तथा दीवारें इसलिए होती हैंताकि रोगियों को मानसिक शांति मिले। विद्यालयों में हल्के और नीले रंग के कमरे बच्चों को पढ़ाई में ध्यान लगाने में सहायता करते हैं। खेल के मैदान में लाल जर्सी वाली टीम को अधिक आक्रामक और साहसी माना जाता है। इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि रंग हमारे विचारों और निर्णयों पर गहरा प्रभाव डालते हैं।

हालाँकि रंग हमारी भावनाओं को पूरी तरह बदल नहीं सकतेलेकिन उन्हें काफी हद तक प्रभावित अवश्य करते हैं। यदि कोई व्यक्ति पहले से क्रोधित हो और चारों ओर लाल रंग होतो उसका गुस्सा और बढ़ सकता है। यदि कोई व्यक्ति दुखी हो और नीले वातावरण में बैठ जाएतो उसे कुछ शांति मिल सकती है। यह संबंध दोतरफा होता है। हम रंगों को अर्थ देते हैंऔर रंग हमें भावनाएँ समझाते हैं।

बचपन से ही हम रंगों के साथ भावनाओं को जोड़ना सीखते हैं। गुस्से में “लाल होना” और उदासी में “नीला पड़ जाना” जैसे शब्द हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। यह प्रकृति और संस्कृति के मेल का सुंदर उदाहरण है। रंग हमारे जीवन की अदृश्य भाषा बन जाते हैंजिन्हें हम बिना बोले समझ लेते हैं।

लाल और नीला दोनों ही हमारे जीवन के लिए आवश्यक हैं। लाल हमें साहसऊर्जा और सतर्कता प्रदान करता है। नीला हमें शांतिसंतुलन और आत्मविश्वास देता है। इन दोनों के बिना जीवन अधूरा है। जब अगली बार कोई रंग आपकी आँखों के सामने आएतो केवल उसे देखिए नहींबल्कि महसूस कीजिए। वह आपसे कुछ कह रहा है। वह आपके मन और भावनाओं की कहानी सुना रहा है। क्योंकि रंग केवल दिखाई नहीं देतेवे हमारे जीवन से संवाद करते हैं और हमें स्वयं से जोड़ते हैं।

About The Author

Post Comments

Comments