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चुनावी रार: ममता बनर्जी बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त
ममता बनर्जी और निर्वाचन आयोग के बीच चल रहा गतिरोध अब देश की शीर्ष अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है
कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और निर्वाचन आयोग के बीच चल रहा गतिरोध अब देश की शीर्ष अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों की अनदेखी की है।
ममता बनर्जी का आरोप है कि निर्वाचन आयोग द्वारा बंगाल में चलाया जा रहा Special Intensive Revision (SIR) अभियान पूरी तरह से "असंवैधानिक और पक्षपाती" है। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को उठाया गया है: डेटा में हेरफेर: आरोप है कि निर्वाचन आयोग का पोर्टल अवैध रूप से नियंत्रित किया जा रहा है और वास्तविक मतदाताओं का नाम सूची से हटाने के लिए डेटा के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।
माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति: मुख्यमंत्री ने राज्य में 8,100 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं, जिन्हें वह "अवैध" मानती हैं। कोर्ट के आदेश की अवमानना: याचिका में कहा गया है कि 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का आदेश दिया था, जिसका पालन नहीं किया गया।
140 मौतों का गंभीर दावा
मुख्यमंत्री ने अपने हालिया पत्रों और याचिका में यह चौंकाने वाला दावा भी किया है कि इस दोषपूर्ण पुनरीक्षण प्रक्रिया के कारण बंगाल में अब तक 140 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने इसे "मानवाधिकारों का उल्लंघन" बताते हुए चुनाव आयोग पर जानबूझकर बंगाल के लिए अलग नियम बनाने का आरोप लगाया है।आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है।
वहीं दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और वह केवल त्रुटियों को सुधारने का काम कर रहा है। 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई राज्य की राजनीति में नया उबाल लेकर आई है। "हम बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन नहीं होने देंगे। अगर आयोग निष्पक्ष नहीं है, तो हमें न्याय के लिए उच्चतम न्यायालय जाना ही होगा।

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