राजनीति
भारत
तो इन्हें सताता है देश की बदनामी का डर ?
सवाल यह है कि आख़िर किन बातों से देश की बदनामी होती है
तनवीर जाफ़री
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भारतीय जनता पार्टी के नेता व समर्थक अक्सर यह आरोप लगाते रहते हैं कि वे विदेशी की धरती पर भारतीय राजनीति, संस्थानों चुनाव आयोग, न्यायपालिका या भारतीय मीडिया व सरकार की आलोचना करके देश की छवि को ख़राब करते रहते हैं। इतना ही नहीं बल्कि भाजपा इसे "देश-विरोधी" या "भारत को बदनाम करने" की साज़िश तक बताती है।
सवाल यह है कि आख़िर किन बातों से देश की बदनामी होती है और बदनामी और नेकनामी का पैमाना है क्या ? याद कीजिये जब राहुल गांधी ने 2023 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (यू के ) में कहा कि भारत में विपक्ष को दबाया जा रहा है और चीन का ख़तरा समझा नहीं जा रहा है। इसमें राहुल ने क्या ग़लत कहा था ? परन्तु भाजपा ने राहुल के इस सच्चाई भरे वक्तव्य को "भारत को बदनाम करना" बताया था। इसी तरह जब 2023 में कोलंबिया की एक यूनिवर्सिटी में राहुल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र पर "हमला" हो रहा है और कुछ बड़े व्यापारियों का अर्थव्यवस्था पर क़ब्ज़ा है तब भी भाजपा ने इसे राहुल द्वारा "विदेशी धरती पर भारत को बदनाम करना" बताया था।
अभी कुछ समय पूर्व ही जब राहुल गाँधी ने बर्लिन (जर्मनी) में चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और कहा कि हरियाणा चुनाव में धांधली हुई उस समय भी भाजपा ने इसे "संस्थानों को बदनाम करने की साज़िश " बताया था। राहुल गाँधी के ऐसे आरोपों से भाजपा इतना तिलमिला जाती है कि वह राहुल की आलोचना को "एंटी-इंडिया फ़ोर्सेज़ " से जोड़कर कांग्रेस को कमज़ोर करने की कोशिश करने लगती है। यहाँ तक कि कुछ भाजपा नेता इसे "चाइना की तारीफ़ " या "विदेशी हस्तक्षेप" को आमंत्रित करने तक के रूप में परिभाषित कर देते हैं। भाजपाई कहते हैं कि इससे भारत की "ग्लोबल इमेज" ख़राब होती है
इस विषय पर कांग्रेस व राहुल गाँधी का कहना है कि वे सिर्फ़ "सच्चाई" बोलते हैं,और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है। लिहाज़ा राहुल भाजपा के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि चीन जैसे मुद्दों पर तो मोदी ख़ुद ही विदेश में भारत को बदनाम करते हैं। कुछ का मत है कि राहुल विदेश में कुछ नया नहीं कहते,वे भारत में भी यही कहते हैं। कांग्रेस के अनुसार समस्या चुनावी प्रक्रिया में है, न कि आलोचना में। कांग्रेस इसे "साइलेंट करने" की कोशिश बताती है।
और सच भी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेता प्रायः विदेश में अपनी सरकार की आलोचना करते हैं, और यह 'फ़्री स्पीच' का हिस्सा माना जाता है। इससे देश की बदनामी नहीं होती, बल्कि इससे किसी भी देश के लोकतान्त्रिक मूल्य नज़र आते हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह भी कि ऐसे भी कोई प्रमाण नहीं है कि विदेश में की गयी राहुल की बातों से भारत की अर्थव्यवस्था, निवेश या कूटनीति पर कभी कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा हो। सरकार ख़ुद ही तो बताती रहती है कि भारत की जी डी पी ग्रोथ और ग्लोबल रैंकिंग मज़बूत बनी हुई है?
इसी तरह राहुल गांधी व कांग्रेस के कई नेता नरेंद्र मोदी पर भी यह आरोप लगा चुके हैं कि वे विदेशी धरती पर भारत या पिछले 70 वर्षों के शासन की आलोचना कर देश को बदनाम करते हैं। नरेंद्र मोदी ने 2014 से 2023 के दौरान देश विदेश में कई बार यह दोहराया कि "पिछले 70 सालों में भारत में कुछ ख़ास नहीं हुआ", " पहले लोग भारत में जन्म लेना दुर्भाग्य मानते थे", या "70 साल में विकास नहीं हुआ"। इसी तरह मोदी ने 2022 में रूस में एक कार्यक्रम में भारत के पिछड़ापन, ग़रीबी या पिछली सरकारों की कमियों पर बात की थी।
अमेरिका, यूके या अन्य देशों में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी ने अक्सर पूर्व सरकारों की "कमज़ोर विदेश नीति", उनके "घोटालों" या उस दौर में "विकास की कमी" पर ज़ोर दिया है । कांग्रेस भी मोदी की इन बातों को "भारत की बदनामी" बताती है। कांग्रेस के अनुसार, मोदी ने कम से कम 4-5 बार विदेश में ऐसा कहा कि कांग्रेस शासन में "भारत को दुनिया ने गंभीरता से नहीं लिया" या "पिछले शासकों ने देश को कमज़ोर बनाया" आदि । कांग्रेस इसे भारत और भारतीयों ख़ास तौर से पिछली पीढ़ियों का अपमान मानती है, क्योंकि यह कांग्रेस के शासन काल को नकारात्मक रूप से पेश करता है। राहुल गांधी ने 2023 में लंदन में कहा भी था कि मोदी ख़ुद विदेश में भारत को बदनाम करते हैं, क्योंकि वे हर भारतीय, उनके माता-पिता और दादा-दादी का अपमान करते हैं।
ऐसे में यह समझना भी ज़रूरी है कि दरअसल सत्ता व विपक्ष के उपरोक्त आरोपों प्रत्यारोपों से ही देश की बदनामी होती है या फिर इसतरह के आरोप प्रत्यारोप ही एक दूसरे नेताओं व उनके दलों को नीचा दिखाने व उन्हें जनता में बदनाम करने जैसा एक षड्यंत्र मात्र है ? या फिर वास्तव में जनता को इस तरह की बहस में उलझाकर उन वास्तविक समस्याओं व विषयों पर पर्दा डालने का प्रयास है जिससे हक़ीक़त में देश की बदनामी होती है ? क्या ग़लत कहते है राहुल गांधी कि चुनाव आयोग संदिग्ध है ? वे चुनाव आयोग सामने कितने सबूत पेश कर चुके जिनका कोई जवाब नहीं आया ? क्या देश के अनेक महत्वपूर्ण संस्थानों व संसाधनों पर अडानी का क़ब्ज़ा नहीं होता जा रहा ?
क्या सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग विपक्ष को परेशान करने के लिये नहीं किया जा रहा ? जब देश में मॉब लिंचिंग होती है तो क्या देश की बदनामी नहीं होती ? देश में सत्तारूढ़ दल की ओर से मंत्री व मुख्यमंत्री स्तर के लोग खुले आम साम्प्रदायिकता फैलाने वाली बातें कर ओछी राजनीति करते हैं तो क्या देश की बदनामी नहीं होती ? देश की राजनीति को संविधान से अलग हटकर सांप्रदायिकता के रंग में चलाने के प्रयास क्या देश की बदनामी का कारण नहीं ? कितने लुटेरे जिनमें अधिकांश गुजराती,देश की अरबों रुपये लूटकर विदेशों में बैठे हैं क्या यह बदनामी की वजह नहीं ?
देश के सर्वोच्च धर्माधिकारी शंकराचार्य जी को व उनके सहयोगियों को संगम तट पर मारा पीटा गया क्या वह देश की बदनामी की वजह नहीं ? नक़ली डिग्री धारक लोग सत्ता में सर्वोच्च पदों पर बैठे हों,यह बदनामी की बात नहीं ? संसद विधानसभा व मंत्रिमंडल में भ्रष्ट,बलात्कारियों व अन्य अपराधियों का शामिल होना क्या बदनामी की बात नहीं ? गाँधी के हत्यारों का महिमामंडन क्या देश की बदनामी नहीं ? सत्ता द्वारा बलात्कारियों व अपराधियों को संरक्षण क्या बदनामी की वजह नहीं ? बड़ा आश्चर्य है कि देश की बदनामी इबारत लिखने वालों को ही देश की बदनामी का दर सताता रहता है?

Comments