बीएसए द्वारा किए गए नियम विरुद्ध समायोजन पर शिक्षकों में आक्रोश
नियमो को ताख पर रख समायोजन करने पर शिक्षकों में काफी आक्रोस्थानांतरित शिक्षक बीएसए द्वारा किये गये समायोजन आदेश को निरस्त करने की कर रहे माँग मनमाने समायोजन के खिलाफ शिक्षकों ने उच्च न्यायालय की ओर किया रुख
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बस्ती। बस्ती जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी अनूप कुमार तिवारी व जिले के कुछ खण्ड विकास अधिकारियों पर शिक्षकों के समायोजन को लेकर गंभीर आरोप लग रहा है और शिक्षकों में काफी आक्रोश है । नियम विरुद्ध समायोजन को निरस्त कराने के लिए शिक्षक संगठन व पीड़ित शिक्षक हर तरह से प्रयास कर रहा है ।
जानकारी के अनुसार परिषदीय विद्यालयों में मनमानी तरीके से बीएसए द्वारा किये गये समायोजन के खिलाफ शिक्षकों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है । विभिन्न जिलों के शिक्षकों की ओर से प्रयागराज और लखनऊ बेंच में दाखिल याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है। कुछ जिलों में शिक्षामित्रों को भी शिक्षक मानते हुए समायोजन कर दिया गया है जिसके खिलाफ शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
पिछले साल जून में पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी। दिसंबर अंत में तीसरे चरण के समायोजन में भी शिक्षकों से विकल्प नहीं लिया गया और मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया। कुछ जिलों में समायोजन शासनादेश इस कदर तार - तार हुआ है जिससे प्रक्रिया में भ्रष्टाचार स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है ।
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशकों से समायोजन की रिपोर्ट तलब की है। यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध छात्र संख्या के आधार पर मानक से अधिक अध्यापक संख्या वाले विद्यालय चिह्नित कर शिक्षक विहीन एवं एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था करने के निर्देश I विगत 14 नवंबर कोआदेश दिए गए थे। 26 दिसंबर को समीक्षा में अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ने समायोजन की प्रगति पर अप्रसन्नता व्यक्त की थी।
एक गलती सुधारने में और बड़ी भूल कर बैठे अफसर पहले चरण के समायोजन में की गई गलती सुधारने में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने और बड़ी गलती कर दी है। जून 2025 में समायोजन के दौरान बड़ी संख्या में स्कूल एकल हो गए थे। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं हुईं तो अफसरों ने समायोजन रद्द करते हुए शिक्षकों को वापस मूल विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया। समायोजन 3.0 के खिलाफ भी शिक्षकों ने याचिकाएं कर दी अब मामला न्यायालय की शरण में है ।
सारे नियमों को दरकिनार कर प्रधानाध्यापकों को उच्च प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक बना दिया गया जबकि एक से दूसरे स्तर के विद्यालय में भेजने पर टीईटी को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दाखिल याचिका में पिछली सुनवाई के बाद सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा गया है । मामला कोर्ट में विचाराधीन है अब देखना यह है कि समायोजन निरस्त हो होता है या फिर विभागीय मनमानी यूँ ही शिशकों पर अखरती रहेगी ?
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