खेल मैदान की आरक्षित भूमि पर बन गए मकान, एस. डी. एम. को. भनक नहीं
एस डी एम से डी एम तक और डी एम से सी एम तक शिकायतों के बावजूद कार्रवाई सिफर
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लखीमपुर खीरी। जनपद की तहसील गोला के चंद जिम्मेदार अधिकारियो की धनलोलुपता के चलते ईमानदार जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल सहित सरकार की छवि धूमिल हो रही है। जिसका कारण तहसील प्रशासन की खामोशी, और बेलगाम दबंग भूमाफियाओं का सरकारी जमीनों, खेल मैदान, प्राइमरी पाठशाला की आरक्षित भूमि गाटा संख्या 159/0.100,474/0.0600 हे 0तथा खेल मैदान की गाटा संख्या 1192/0.1500हे पर अवैध कब्जा करके पक्का निर्माण कार्य करके मुख्यमंत्री के आदेशों की हवा निकाली जा रही हैं।
जिसकी वर्ष 2022से मुख्यमंत्री पोर्टल पर लगातार शिकायतों मे तत्कालीन लेखपाल भूपेंद्र कुमार और कानून गो, तहसीलदार द्वारा फर्जी जांच, वगैर पैमाईश किए ही झूठी रिपोर्ट कि यह पर कोई खेल मैदान है ही नहीं, और न ही कोई अवैध कब्जा है की रिपोर्ट लगाकर शासन प्रशासन को गुमराह किया जाता रहा है। अभी हाल ही में गत दिनों पूर्व मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत के क्रम मे की गई पैमाईश में लगभग आधा दर्जन लोगों के आलीशान पक्के मकान और दुकान बनी पाई गई।
जो तत्कालीन लेखपाल भूपेंद्र कुमार और तहसीदार, कानूनगो की काली करतूतों की पोल खोलती नजर आरही है। मामला परगना कुकुरा के ग्राम पंचायत जटपुरा का है। जहापर ग्राम प्रधान की सह और तहसील प्रशासन की मिलीभगत से खेल मैदान और प्राइमरी पाठशाला की आरक्षित भूमि पर दबंगों का अनाधिकृत कब्जा देखा जा सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील प्रशासन गोला द्वारा विपक्षी गणों से भारी सुविधा शुल्क लेकर मकान बनवा दिए गए।
और अब उनको खाली कैसे करवा दे। इस खेल में प्रधान से लेकर तहसीलदार तक के शामिल होने के आरोप लगाए जा रहे है। मजेदार बात तो यह है कि पैमाईश करने गई टीम ने खेलमेदान की पैमाईश कर अपनी रिपोर्ट तहसीलदार को सौप दी। प्राइमरी पाठशाला की जमीन के उपरोक्त गाटो की पैमाईश ही नहीं की। जबकि उक्त जमीन पर भी दबंग अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का अवैध कब्जा है और आलीशान मकान बने खड़े हैं।
रिपोर्ट मिले एक हफ्ता होना को है तहसीलदार साहब सेटिंग गेटिंग के खेल में लगे हैं और शिकायत कर्ता पर ग्राम प्रधान से दबाव बना कर शिकायत पर दस्तखत बनाए जाने का तमाशा चल रहा है। इसके एवज में लाखों का खेल हो सकता है ऐसा लोगों का आरोप है। यदि तहसील प्रशासन जरा सा भी सजग होता तो बच्चों के अधिकारों और खेल शिक्षा पर प्रतिकूल असर न पड़ता और अवैध निर्माण न हो पाता।
अवैध कब्जा की पुष्टि, फिर भी नहीं नहीं हटवाया जा रहा अनाधिकृत कब्जा
आज पैमाईश के एक हफ्ता बाद भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न होने पर तहसीलदार से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि क्या इससे पहले कोई तहसीलदार नहीं आए थे उनसे क्यों नहीं हटवाया अवैध कब्जा । मेरे पीछे क्यों पड़े हो। आप हाईकोर्ट चले जाओ आदेश ले आओ मैं कब्जा हटवादूंगा। मै कब्जा हटवाने नहीं जाऊंगा। मुख्यमंत्री के ऐसे आदेश आया जाया करते है। सबसे बड़ी बात तो यह है जिनको सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटवाए जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वही अवैध कब्जाधारकों की तरफदारी करते हुए मामले को मैनेज करने में लगे हैं।
आखिर क्यों नहीं लिखवाया जा रहा अवैध कब्जा धारकों के विरुद्ध मुकदमा
शासन का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी कीमत पर सरकारी जमीनों पर अनाधिकृत कब्जा करने वालों को बख्शा न जाए। इनके द्वारा किए गए अवैध कब्जे को तुरन्त हटवाया जाय और अवैध कब्जाधारकों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराया जाय। इसके बाद भी ध्वस्तीकरण की बात तो दूर मुकदमा तक दोषियों के खिलाफ नहीं लिखवाया जा रहा है। जो शासन के आदेशों की खुली अवमानना है।
सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार तहसील प्रशासन द्वारा अवैध कब्जाधारकों को दिए जा रहे संरक्षण से आहत लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत करने के साथ जनहित याचिका योजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। शीघ्र ही उच्च न्यायालय में मामले से संबंधित समस्त साक्ष्यों सहित याचिका योजित कर अवैध कब्जा हटवाए जाने तथा उच्च न्यायालय के द्वारा पूर्व में पारित आदेश के विपरीत अवैध कब्जाधारकों को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार अधिकारी राजस्व कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग की जाएगी।
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