Haryana: डेरा प्रमुख राम रहीम को लगा बड़ा झटका, CBI कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

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Haryana News: हरियाणा में सिरसा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित बधियाकरण (नपुंसक बनाने) मामले में हरियाणा की विशेष सीबीआई कोर्ट ने एक अहम आदेश सुनाया है। कोर्ट ने न्यूयॉर्क में रह रहे मुख्य गवाह की याचिका पर फैसला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के दौरान वकील से परामर्श की अनुमति तो दी है, लेकिन साक्ष्य रिकॉर्डिंग के समय वकील की उसी कक्ष में मौजूदगी की इजाजत नहीं दी। इस फैसले को राम रहीम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

अब यह गवाह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष अपना बयान दर्ज कराएगा। इससे पहले गवाह ने कोर्ट को बताया था कि राम रहीम एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनके कई बड़े राजनेताओं से संबंध रहे हैं। ऐसे में गवाही के दौरान किसी दूरस्थ स्थान पर अपने वकील की मौजूदगी से उसे मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास मिलेगा।

बचाव पक्ष ने जताई थी आपत्ति

राम रहीम की ओर से पेश वकीलों ने गवाह की इस मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि साक्ष्य रिकॉर्डिंग के दौरान रिमोट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग स्थल पर वकील की मौजूदगी का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का हवाला देते हुए कहा कि VC के रिमोट पॉइंट पर केवल अधिकृत समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) ही मौजूद रह सकता है।

कोर्ट ने सुनवाई के बाद दिया आदेश

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई के विशेष मजिस्ट्रेट अनिल कुमार यादव ने कहा कि जब अभियोजन और बचाव पक्ष के वकील कोर्ट में शारीरिक रूप से मौजूद रहेंगे, तो गवाह के वकील की VC कक्ष में उपस्थिति आवश्यक नहीं है। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि साक्ष्य रिकॉर्डिंग शुरू होने से पहले गवाह अपने वकील से दूरस्थ स्थान के बाहर परामर्श कर सकता है।

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दबाव की आशंका पर अदालत की टिप्पणी

गवाह द्वारा यह आशंका जताए जाने पर कि दूतावास अधिकारियों या किसी अन्य माध्यम से उस पर दबाव डाला जा सकता है, कोर्ट ने कहा कि वह स्वयं गवाह से बातचीत कर यह सुनिश्चित करेगी कि उस पर किसी भी तरह का दबाव या भय न हो। यदि ऐसी कोई स्थिति सामने आती है, तो अदालत साक्ष्य को निष्पक्ष तरीके से दर्ज कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

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2014 में दर्ज हुआ था मामला

इस मामले में गवाह ने दावा किया है कि वह कथित बधियाकरण का शिकार हुआ था। उसकी याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2014 को आदेश देते हुए राम रहीम के इशारे पर अनुयायियों के कथित सामूहिक बधियाकरण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने को कहा था।

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जांच के बाद 1 फरवरी 2018 को सीबीआई ने राम रहीम और दो डॉक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस केस में उन पर गंभीर चोट पहुंचाने, धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l 

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