Haryana: हरियाणा में सीएम विंडो के 5 नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस, जानें वजह
Haryana News: हरियाणा में सीएम विंडो पर दर्ज होने वाली जनता की शिकायतों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर सीएम विंडो का कार्यभार संभाल रहे ओएसडी राकेश संधू ने लापरवाही बरतने वाले पांच नोडल अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
इसके अलावा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड नरवाना के सचिव द्वारा ‘मेरी फसल–मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर बिना डेटा सत्यापन के जानकारी जारी करने, कैथल के जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा गलत खाते में वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना का भुगतान करने तथा करनाल के अतिरिक्त उपायुक्त (क्रीड अधिकारी) द्वारा प्रार्थी की आय, बैंक खाता और दिव्यांगता से जुड़े आंकड़ों का सत्यापन किए बिना गलत रिपोर्ट अपलोड करने पर भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
ओएसडी राकेश संधू ने सभी विभागों के सीएम विंडो नोडल अधिकारियों को स्पष्ट किया कि सीएम विंडो और जनसंवाद कार्यक्रम राज्य सरकार की जनता के प्रति प्रतिबद्धता और मुख्यमंत्री के सीधे संवाद का अहम माध्यम हैं। मुख्यमंत्री स्वयं इन शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करते हैं।
उन्होंने बताया कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ सीएम विंडो पर लंबित शिकायतों और उनके निस्तारण की समीक्षा बैठक करेंगे। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि वर्ष 2022 से पहले दर्ज सभी शिकायतों की सूची संबंधित एडीसी द्वारा मुख्यालय को भेजी जाए।
इसी बीच हरियाणा सरकार ने दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला जिलों में मृदा एवं जल संरक्षण परियोजनाओं पर 35 लाख रुपये की लागत से एक विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन कराने का निर्णय लिया है।
इस प्रस्ताव को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई सीएएमपीए हरियाणा की स्टीयरिंग कमेटी की नौवीं बैठक में मंजूरी दी गई। बैठक में पौधारोपण बढ़ाने, वन्यजीव आवासों की सुरक्षा और संरक्षण ढांचे को मजबूत करने से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली।
राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में सर्वेक्षण, सीमांकन, पिलर लगाने और बाड़ या दीवार निर्माण के लिए 16.95 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं शिवालिक क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए कालका, नारायणगढ़ और छछरौली वन क्षेत्रों के लिए 50 लाख रुपये की लागत से तीन गश्ती वाहनों की खरीद को भी हरी झंडी दी गई है।
उधर, हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने बिजली उपभोक्ताओं को लंबे समय तक औसत आधार पर गलत बिल जारी करने के मामलों को गंभीर लापरवाही करार दिया है। आयोग के चेयरमैन टीसी गुप्ता ने बताया कि वर्षों तक औसत बिल जारी कर बाद में एकमुश्त भारी-भरकम बिल थमाना उपभोक्ता उत्पीड़न के दायरे में आता है। एक मामले में उपभोक्ता को पहले 500 से 1000 रुपये तक के बिल मिलते रहे, लेकिन बाद में करीब 78 हजार रुपये का बिल जारी कर दिया गया।
आयोग की जांच में सामने आया कि 19 जुलाई 2022 से 14 मई 2025 तक उपभोक्ता को सही बिलिंग नहीं की गई और लगातार औसत आधार पर बिल दिए जाते रहे। टीसी गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि डेटा माइग्रेशन या तकनीकी कारणों का हवाला देकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जा सकता। आयोग ने आदेश दिया है कि प्रत्येक गलत बिल के लिए उपभोक्ता को 500 रुपये की क्षतिपूर्ति दी जाए।


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