अटल बिहारी वाजपेई जन्म शताब्दी समारोह वर्ष 24/ 25 विधानसभा भदोही ब्लाक सभागार सुरियावा  संपन्न

अटल बिहारी वाजपेई जन्म शताब्दी समारोह वर्ष 24/ 25 विधानसभा भदोही ब्लाक सभागार सुरियावा  संपन्न

भदोही
 
सुरियावा 27 दिसंबर 2025 शनिवार को अटल स्मृति सम्मेलन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खादी ग्रामोंउद्योग आयोग के सदस्य नागेंद्र रघुवंशी उपस्थित रहे इस सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए जिला अध्यक्ष दीपक मिश्रा संचालन जिला उपाध्यक्ष अखंड प्रताप ने किया इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने अटल बिहारी वाजपेई भारत रत्न के जीवन पर आधारित तमाम विषयों की चर्चा की अटल बिहारी वाजपेई विराट व्यक्तित्व और मर्म को महसूस कर नापतोल कर शब्द रखने वाले
 
वाक पटु हमारे परम स्नेही हमारे गौरव के प्रतीक प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई को हम सभी भारतवासियों की ओर से उनकी जन्म शताब्दी पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं ऐसे तमाम विषयों पर खुलासा करते हुए मुख्य अतिथि ने प्रकाश डाला संगठन से सत्ता तक यह भाषण केवल शब्दों का कम नहीं बल्कि भारतीय राजनीति की उस यात्रा का स्मरण है जहां सत्ता का शिकार संगठन की सीढ़िया से चढ़कर प्राप्त किया गया यह कथा है
 
अटल बिहारी वाजपेई की एक ऐसे राजनेता की जिनकी राजनीतिक यात्रा व्यक्ति से पहले विचार के पद से पहले संगठन की सत्ता से पहले संघर्ष की कहानी है अध्यक्षता कर रहे दीपक मिश्रा ने अपने विचार को रखते हुए कहा अटल बिहारी वाजपेई भारतीय राजनीति में उस पीढ़ी को प्रतिनिधि थे जिसने सत्ता को लक्ष्य नहीं साधन माना उनकी यात्रा किसी राजवंश की देन नहीं थी नहीं किसी आकस्मिक जन लहर का परिणाम था यह यात्रा संघ की शाखाओं में अनुशासन सीखने से आरंभ होती है जनसंघ की बैठकों में विचार करने से आगे बढ़ती है
 
और अंततः लोकतांत्रिक सत्ता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचती है 1940 के दशक में जब देश स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करता था उसी काल में अटल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे संघ उनके लिए केवल संगठन नहीं था बल्कि जीवन दृष्टि था राष्ट्र सर्वोपरि व्यक्ति साधन है 1957 का लोकसभा चुनाव अटल की राजनीतिक यात्रा का निर्णायक मोड़ था
 
बलरामपुर से निर्वाचित होकर वह संसद पहुंचे उस संसद में जहां जवाहरलाल नेहरू जैसे वैश्विक नेता उपस्थित थे 1967 में जनसंख्या की राजनीतिक स्वीकारता बढी अटल पहली बार सरकार के निकट पहुंचे 1977 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी सरकार बनी 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ 1984 में मात्र दो सिटे किंतु अटल बिहारी वाजपेई ने उस समय सत्ता की शॉर्टकट राजनीति नहीं चुनी 1996 में अटल पहली बार प्रधानमंत्री बने 13 दिन की सरकार रही और पराजय नहीं थी वह सिद्धांत की विजय थी 1998 में पुनः प्रधानमंत्री बने भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर आत्मनिर्भर सुरक्षा नीति की घोषणा की 1999 में कारगिल युद्ध के समय उनके नेतृत्व स्पष्ट करता है ऐसे तमाम विषयों को समाहित करते हुए अटल के स्मृति पर चर्चा की गई और उन्हें याद किया गया और उन्हें सच्ची श्रद्धा सुमन श्रद्धांजलि अर्पित की गई 
 
 कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व विधायक रविंद्र नाथ त्रिपाठी जिला प्रवासी पूर्व जिला अध्यक्ष जौनपुर रामविलास पाल जिला उपाध्यक्ष सुनील मिश्रा सुरेंद्रनाथ पांडेय गोवर्धन राय जिला मीडिया प्रभारी भाजपा अखंड प्रताप सिंह राजेंद्र दुबे नितेश त्रिपाठी मंडल अध्यक्ष संजय सरोज राकेश गुप्ता अशोक पाठक स्वरूप बिद नागेन्जय सुरेश पासी चंद्रशेखरसिंह सम्मानित सभी मातृशक्ति रेशमा बानो रीना श्रीवास्तव सीमा द्विवेदी दीपक पाठक युवा नेता मनीष पांडेय शिवम तिवारी अखिलेश तिवारी दीपक सिंह तथा सम्मानित सभी कार्यकर्ता उपस्थित रहे
 
 
 
 
 

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